रेयर-अर्थ मैग्नेट के लिए चीन से लाइसेंस का इंतज़ार कर रही भारतीय कंपनियों की संख्या दोगुनी हुई

रेयर-अर्थ मैग्नेट की खरीद के लिए चीन से लाइसेंस का इंतज़ार कर रही भारतीय कंपनियों की संख्या दो हफ्तों में 11 से बढ़कर 21 हो गई है। ईवी उद्योग में चिंता बढ़ी है क्योंकि उन्हें डर है कि रेयर-अर्थ मैग्नेट का स्टॉक जुलाई मध्य तक खत्म हो सकता है.

प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटो साभार: Michael Marais/Unsplash)

नई दिल्ली: सिर्फ़ दो हफ्तों के अंदर, उन कंपनियों की संख्या लगभग दोगुनी हो गई है जो चीन के वाणिज्य मंत्रालय (कॉमर्स मिनिस्ट्री) से रेयर-अर्थ मैग्नेट खरीदने के लिए लाइसेंस मिलने का इंतजार कर रही हैं.

रिपोर्ट के मुताबिक, जहां पहले ऐसी कंपनियों की संख्या 11 थी, अब यह बढ़कर 21 हो गई है. नई कंपनियों में बॉश इंडिया, मरेली पावरट्रेन इंडिया, महले इलेक्ट्रिक ड्राइव्स इंडिया, टीवीएस मोटर और यूनो मिंडा शामिल हैं.

यह जानकारी द इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट में दी गई है.

एक वरिष्ठ इंडस्ट्री एक्जिक्टिव ने इकोनॉमिक टाइम्स को बताया, ‘इन कंपनियों ने एंड-यूज़र सर्टिफिकेट को भरकर सही तरीके से प्रमाणित करवा लिया है और रेयर अर्थ मैग्नेट खरीदने के लिए जरूरी दस्तावेज़ अपने सप्लायर्स को भेज दिए हैं, लेकिन अभी तक चीन सरकार की ओर से लाइसेंस नहीं जारी किया गया है.’

4 अप्रैल को चीन ने एक आदेश जारी किया था, जिसके तहत मध्यम और भारी रेयर अर्थ मैग्नेट का निर्यात करने वाले एक्सपोर्टर्स को लाइसेंस लेना अनिवार्य कर दिया गया था. यह लाइसेंस वाणिज्य मंत्रालय से तब मिलेगा जब खरीदार की ओर से एंड-यूज़र सर्टिफिकेट प्रस्तुत किया गया हो.

इस प्रमाणपत्र (एंड-यूज़र सर्टिफिकेट) में खरीदारों से कुछ ज़रूरी गारंटी ली जाती हैं, जिनमें यह वादा शामिल है कि इन सामग्रियों का इस्तेमाल जनसंहारक हथियारों को बनाने या प्रोसेस करने के लिए नहीं किया जाएगा.

सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) के आंकड़ों के अनुसार, भारत में स्थित 52 कंपनियां चीन से मैग्नेट मंगवाती हैं, जिन्हें देशभर की ऑटोमोबाइल कंपनियों को सप्लाई किया जाता है.

इस समय इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) उद्योग के हितधारक चिंतित हैं, क्योंकि उन्हें डर है कि ईवी ट्रैक्शन मोटर्स और पावर स्टीयरिंग सिस्टम में इस्तेमाल होने वाले रेयर-अर्थ मैग्नेट का भंडार जुलाई मध्य तक खत्म हो सकता है. रेटिंग एजेंसी आईसीआरए ने कहा है कि इन्वेंटरी कम हो रही है, इसलिए तत्काल वैकल्पिक योजना की ज़रूरत है.

वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने करीब 20 करोड़ डॉलर मूल्य के रेयर-अर्थ मैग्नेट आयात किए. इनका अधिकांश उपयोग ऑटोमोबाइल और औद्योगिक क्षेत्रों में किया गया.

इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स में लगने वाले मोटर की कीमत 8,000 रुपये से 15,000 रुपये के बीच होती है और इस मोटर की कुल लागत का लगभग 30% हिस्सा रेयर-अर्थ मैग्नेट पर खर्च हो जाता है.