नई दिल्ली: एक-दूसरे के शीर्ष राजदूतों को निष्कासित करने के आठ महीने बाद भारत और कनाडा ने एक-दूसरे की राजधानियों में उच्चायुक्तों को बहाल करने पर सहमति जताई है. यह फैसला खटास में पड़े संबंधों को सामान्य करने की दिशा में पहला कदम है.
रिपोर्ट के मुताबिक, यह घोषणा कनाडा के कनानस्कीस में जी-7 नेताओं के शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के बीच हुई बैठक के बाद की गई. यह बैठक बुधवार (18 जून) भारतीय समयानुसार सुबह हुई.
उल्लेखनीय है कि 2023 में नई दिल्ली में जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के साथ पीएम मोदी की तनावपूर्ण बैठक के बाद से यह भारतीय और कनाडाई नेताओं के बीच पहली ठोस द्विपक्षीय बातचीत है.

उस बैठक में ट्रूडो ने पहली बार खालिस्तानी अलगाववादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या मामले में भारतीय सरकारी एजेंटों के शामिल होने का आरोप लगाया था, जिसे एक हफ्ते बाद सार्वजनिक कर दिया गया था.
इसके परिणामस्वरूप उच्चायुक्तों को एक साल बाद अक्टूबर 2024 में प्रतिशोधात्मक कार्रवाई के तहत निष्कासित कर दिया गया था. इस दौरान रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (आरसीएमपी) ने आरोप लगाया था कि कनाडा में ‘व्यापक हिंसा’ से भारतीय सरकारी एजेंटों के जुड़े होने के सबूत हैं.
कार्नी के निमंत्रण को स्वीकार करने के बाद भारत की ओर से एक नरमी की उम्मीद थी
मालूम हो कि पीएम मोदी द्वारा जी-7 शिखर सम्मेलन के इस सत्र में भाग लेने के लिए कार्नी के निमंत्रण को स्वीकार करने के बाद एक नरमी की उम्मीद की जा रही थी – यह निमंत्रण आयोजन से ठीक एक सप्ताह पहले दिया गया और स्वीकार किया गया था.
बैठक के बाद भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा कि दोनों नेता संबंधों को स्थिर करने के लिए ‘संतुलित कदम’ उठाने पर सहमत हुए हैं, जिसकी शुरुआत ‘जल्द से जल्द’ उच्चायुक्तों की बहाली से होगी. उन्होंने कहा, ‘अन्य कूटनीतिक कदम भी समय के साथ उठाए जाएंगे.’
कनाडा की ओर से आधिकारिक तौर पर इस घटनाक्रम को दोहराते हुए कहा गया कि दोनों नेताओं ने नागरिकों और व्यवसायों के लिए नियमित कांसुलर सेवाओं को फिर से शुरू करने के उद्देश्य से ‘नए उच्चायुक्तों को नामित करने’ पर सहमति व्यक्त की है. व्यापार के मोर्चे पर दोनों पक्षों ने रुकी हुई वार्ता को फिर से शुरू करने का फैसला किया है.
मिस्री ने व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (सीईपीए) पर लंबे समय से स्थगित वार्ता का जिक्र करते हुए कहा, ‘दोनों नेताओं ने अपने अधिकारियों को इसे जल्द से जल्द शुरू करने का निर्देश देने का भी फैसला किया.’
दोनों पक्षों ने व्यापक रणनीतिक और आर्थिक संबंधों के महत्व को रेखांकित किया.
मिस्री ने कहा कि नेताओं ने स्वच्छ ऊर्जा, डिजिटल प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, आपूर्ति श्रृंखला और महत्वपूर्ण खनिजों में सहयोग पर चर्चा की. इसी तरह कनाडाई पक्ष ने आर्थिक विकास, आपूर्ति श्रृंखला और इंडो-पैसिफिक में साझा हितों को रेखांकित किया.
वरिष्ठ भारतीय राजनयिक ने कहा कि द्विपक्षीय संबंध ‘साझा मूल्यों, लोकतंत्र और कानूनी शासन, लोगों से लोगों के संपर्क और कई अन्य समानताओं’ पर आधारित हैं.
कनाडाई पीएम के कार्यालय के बयान में कहा गया है कि ये संबंध ‘आपसी सम्मान, कानूनी शासन, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सिद्धांत के प्रति प्रतिबद्धता’ पर आधारित हैं.

इस बैठक को लेकर जहां एक ओर भारतीय वक्तव्य में द्विपक्षीय संबंधों दोबारा जिलाने पर ध्यान केंद्रित किया गया. वहीं कनाडा की ओर से इस बात पर प्रकाश डाला कि प्रधानमंत्री कार्नी ने ‘जी-7 एजेंडे में प्राथमिकताएं सामने रखी हैं, जिनमें अंतरराष्ट्रीय अपराध और दमन, सुरक्षा और नियम-आधारित व्यवस्था शामिल हैं.’
हालांकि, इस वक्तव्य में इन मुद्दों को भारत से स्पष्ट रूप से नहीं जोड़ा गया, लेकिन उल्लेख से पता चलता है कि कनाडा में भारतीय कदमों के बारे में कनाडा का दावा दोनों सरकारों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है.
कनाडाई सुरक्षा एजेंसियों द्वारा लगाए गए आरोपों पर टिप्पणी नहीं करेंगे: कार्नी
शिखर सम्मेलन के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में कार्नी ने कहा कि उन्होंने कानून प्रवर्तन और अंतरराष्ट्रीय दमन से निपटने के महत्व को उठाया है.
उन्होंने दोहराया कि चूंकि न्यायिक प्रक्रिया चल रही है, इसलिए वे सावधानी बरतेंगे और कनाडाई सुरक्षा एजेंसियों द्वारा लगाए गए आरोपों पर टिप्पणी नहीं करेंगे.
इस संबंध में कार्नी ने अपने आधिकारिक एक्स एकाउंट पर अन्य विश्व नेताओं के साथ तस्वीरें पोस्ट कीं, लेकिन न तो उन्होंने और न ही कनाडा के पीएमओ के आधिकारिक एकाउंट ने इस रिपोर्ट को प्रकाशित करने के समय पीएम मोदी के साथ कोई फोटो पोस्ट की.
वहीं, भारतीय प्रधानमंत्री की ओर से एक्स पर तस्वीरें पोस्ट की गई हैं.
Had an excellent meeting with Prime Minister Mark Carney. Complimented him and the Canadian Government for successfully hosting the G7 Summit. India and Canada are connected by a strong belief in democracy, freedom and rule of law. PM Carney and I look forward to working closely… pic.twitter.com/QyadmnThwH
— Narendra Modi (@narendramodi) June 17, 2025
अंतरराष्ट्रीय दमन पर जी-7 के एक अलग संयुक्त बयान में कहा गया कि औद्योगिक लोकतंत्रों के समूह के नेता ‘गहरी चिंता’ में हैं.
इसमें कहा गया है, ‘टीएनआर (अंतरराष्ट्रीय दमन) विदेशी हस्तक्षेप का एक आक्रामक रूप है, जिसके तहत राज्य या उनके प्रतिनिधि अपनी सीमाओं के बाहर व्यक्तियों या समुदायों को डराने, परेशान करने, नुकसान पहुंचाने या मजबूर करने का प्रयास करते हैं.’
जी-7 आमंत्रित देशों में भारत एकमात्र ऐसा देश है, जिस पर मेजबान कनाडा ने ‘विदेशी हस्तक्षेप’ और ‘अंतरराष्ट्रीय अपराध’ में संलिप्तता का आरोप लगाया है.
बयान में भारत का कोई उल्लेख नहीं किया गया, लेकिन कहा गया कि अंतरराष्ट्रीय दमन ‘राष्ट्रीय सुरक्षा, राज्य संप्रभुता, पीड़ितों की सुरक्षा और मानवाधिकारों और अंतर्राष्ट्रीय कानून के सिद्धांतों को कमजोर करता है.’
इस बीच कनाडाई अखबार ग्लोब एंड मेल ने मंगलवार (17 जून) को बताया कि कनाडा की जासूसी (spy) एजेंसी ने शुक्रवार (13 जून) को संसद में पेश अपनी वार्षिक रिपोर्ट में चेतावनी दी है कि भारत ‘कनाडा के लिए लगातार विदेशी हस्तक्षेप का खतरा बना हुआ है’.
