नई दिल्ली: एक ओर अमेरिकी राष्ट्रपति पांच साल में पहली बार ह्वाइट हाउस में पाकिस्तानी सेना प्रमुख की मेज़बानी की तैयारी कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डोनाल्ड ट्रंप से कहा है कि भारत ने हालिया भारत-पाक सैन्य तनाव के दौरान अमेरिका से किसी भी स्तर पर न तो व्यापार समझौते पर बात की और न ही किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता पर चर्चा की.
मोदी की यह बात तब सामने आई जब फोन पर ट्रंप से 35 मिनट लंबी बातचीत हुई. यह बातचीत फ़ोन पर इसलिए हुई क्योंकि जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान कनाडा के कनानस्कीस में तय द्विपक्षीय बैठक से पहले ही अमेरिकी राष्ट्रपति वॉशिंगटन लौट गए और बैठक रद्द हो गई — इसके बाद ट्रंप ने खुद इस कॉल की पहल की थी.
यह फोन कॉल उस दिन की पूर्व संध्या पर हुआ जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार (18 जून) दोपहर ह्वाइट हाउस में पाकिस्तान के सेना प्रमुख, फील्ड मार्शल असीम मुनीर के लिए एक लंच की मेज़बानी की.
पाकिस्तानी सेना प्रमुख इससे पहले जुलाई 2019 में ह्वाइट हाउस आए थे, जब जनरल क़मर जावेद बाजवा तत्कालीन प्रधानमंत्री इमरान ख़ान के साथ राष्ट्रपति ट्रंप से मिलने पहुंचे थे.
विपक्ष कर रहा था सवाल
कुछ दिन पहले कांग्रेस पार्टी ने प्रधानमंत्री मोदी की ‘चुप्पी’ पर सवाल उठाया था. यह चुप्पी अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बार-बार किए गए दावों को लेकर थी — ट्रंप ने सार्वजनिक मंचों पर कम से कम 13 बार यह दावा किया कि अमेरिका ने भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष विराम कराने में मदद की.
हाल ही में, 15 जून को ट्रंप ने फिर से दावा किया कि जैसे उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच शांति स्थापित की थी, वैसे ही वे ईरान और इज़रायल के बीच भी कर सकते हैं. उन्होंने कहा, ‘मैंने उस मामले में अमेरिका के साथ व्यापार को इस्तेमाल करते हुए दोनों समझदार नेताओं के साथ बात कराई और उन्हें जल्दी फैसला लेने में मदद की जिससे संघर्ष रुक गया.’
ट्रंप प्रशासन ने इस दावे को एक कानूनी दस्तावेज़ में भी औपचारिक रूप दिया है. अमेरिका के वाणिज्य सचिव हॉवर्ड डब्ल्यू. लटनिक ने न्यूयॉर्क की एक संघीय अदालत में लिखित रूप से कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध को टालने के लिए व्यापार पहुंच को एक प्रलोभन के रूप में इस्तेमाल किया.
अब तक भारत के विदेश मंत्रालय और विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ट्रंप की इस बात का सार्वजनिक रूप से खंडन किया था, लेकिन इससे ट्रंप ने अपने दावे दोहराना नहीं छोड़ा. यह स्पष्ट नहीं है कि भारत ने अमेरिका के सामने इस मुद्दे पर औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई है या नहीं.
यह प्रधानमंत्री मोदी और ट्रंप के बीच 10 मई को भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव खत्म होने के बाद पहली फोन बातचीत थी.
विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने विदेश मंत्रालय की ओर से जारी एक वीडियो बयान में कहा, ‘प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति ट्रंप को स्पष्ट रूप से बताया कि इस पूरे घटनाक्रम के दौरान कभी भी, किसी भी स्तर पर, भारत और अमेरिका के बीच कोई व्यापार समझौता या भारत-पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता का प्रस्ताव चर्चा में नहीं आया.’
ह्वाइट हाउस की ओर से इस कॉल पर कोई अलग से आधिकारिक बयान नहीं आया है.
मिस्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी बताया कि भारत की सैन्य कार्रवाई दोनों सेनाओं के बीच हुई बातचीत के बाद रोकी गई थी — और वह पाकिस्तान के अनुरोध पर शुरू हुई थी.
उन्होंने आगे कहा, ‘प्रधानमंत्री मोदी ने दृढ़ता से कहा कि भारत कभी भी किसी भी मध्यस्थता को स्वीकार नहीं करता और न ही करेगा. इस मुद्दे पर भारत में पूर्ण राजनीतिक सहमति है.’
