पंजाब: ‘ड्रग मनी’ मामले में शिअद नेता बिक्रम मजीठिया की गिरफ़्तारी से उठा राजनीतिक तूफान

शिरोमणि अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया को पंजाब विजिलेंस ब्यूरो द्वारा 25 जून को अमृतसर में उनके घर से गिरफ़्तार किया गया है. यह कार्रवाई 2021 की उस एफआईआर से जुड़ी है, जिसमें मजीठिया को तीन महीने के लिए जेल भेजा गया था. विपक्ष ने इस कार्रवाई को पंजाब सरकार की हताशा और राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से प्रेरित बताया है.

शिरोमणि अकाली दल (शिअद) नेता बिक्रम सिंह मजीठिया। फोटो: X/@bsmajithia

जालंधर: शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया को पंजाब सतर्कता (विजिलेंस) ब्यूरो की एक टीम द्वारा बुधवार 25 जून को अमृतसर स्थित उनके घर से गिरफ्तार किए जाने से राज्य में राजनीतिक तूफान आ गया है, जिससे नशीले पदार्थों की समस्या और इसके इर्द-गिर्द पंजाब की राजनीति एक बार फिर सुर्खियों में है.

नेता के चंडीगढ़ स्थित आवास पर भी विजिलेंस ब्यूरो के अधिकारियों ने छापेमारी की. मजीठिया को गुरुवार सुबह अदालत में पेश किया गया और उन्हें सात दिन की विजिलेंस हिरासत में भेज दिया गया.

ज्ञात हो कि उनकी पत्नी गनीव कौर मजीठिया अमृतसर में उनके गृह क्षेत्र मजीठा विधानसभा क्षेत्र से मौजूदा विधायक हैं. सोशल मीडिया पर सामने आए छापे के वीडियो में, जो कथित तौर पर उनके द्वारा फिल्माए गए हैं, मजीठिया अधिकारियों से उनकी पहचान के बारे में पूछते हुए और यह सवाल करते हुए दिखाई दे रहे हैं कि वे वर्दी में क्यों नहीं हैं.

भ्रष्टाचार निवारण ब्यूरो के सहायक महानिरीक्षक स्वर्णदीप सिंह, विजिलेंस ब्यूरो, फ्लाइंग स्क्वॉड-1, पंजाब, एसएएस नगर द्वारा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 2018 की धारा 13 (1) (बी) और 13 (2) के तहत शिअद नेता के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी.

मई में ड्राइविंग लाइसेंस घोटाले में एक अन्य पंजाब पुलिस अधिकारी के साथ निलंबित किए गए सिंह को हाल ही में बहाल किया गया है.

मजीठिया की गिरफ्तारी आम आदमी पार्टी (आप) के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार के 1 मार्च, 2025 को शुरू किए गए ‘युद्ध नशे विरुद्ध’ अभियान की पृष्ठभूमि में हुई है, जिसके तहत कथित तौर पर ड्रग तस्करों की संपत्तियों को बुलडोजर का इस्तेमाल करके ध्वस्त कर दिया गया था.

मजीठिया विपक्षी शिअद और कांग्रेस के उन नेताओं में शामिल हैं जो नशीले पदार्थों पर अंकुश लगाने में विफल रहने के लिए आप सरकार पर निशाना साध रहे थे.

हालांकि, इस बार उनके पिता सत्यजीत सिंह मजीठिया, उनके बड़े भाई गुरमेहर सिंह मजीठिया और दीपक खजूरिया की स्वामित्व वाली दिल्ली स्थित ‘सरया इंडस्ट्रीज’ जांच के घेरे में आ गई.

पंजाब में ड्रग्स का खतरा

पंजाब में ड्रग्स का खतरा एक दशक से भी अधिक समय से एक राजनीतिक और कानूनी मुद्दा रहा है. 6,000 करोड़ रुपये के सिंथेटिक ड्रग्स मामले में पहली एफआईआर 2012 में फतेहगढ़ साहिब जिले में दर्ज की गई थी. 2014 में इस घोटाले ने तब राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया था, जब इस घोटाले के मुख्य आरोपी और अब बर्खास्त पंजाब पुलिस के पहलवान-सह-पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) जगदीश भोला ने अदालत की सुनवाई के दौरान मजीठिया का नाम लिया था.

चूंकि पंजाब में ड्रग्स एक प्रमुख राजनीतिक मुद्दा बना हुआ था, इसलिए आप और कांग्रेस दोनों ने चुनावी लाभ के लिए इस मुद्दे का फायदा उठाया. आप नेताओं ने खास तौर पर मजीठिया को ड्रग व्यापार से जोड़ा.

आप नेताओं द्वारा उनकी छवि खराब करने से नाराज मजीठिया ने 2016 में पार्टी सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल, आशीष खेतान और संजय सिंह के खिलाफ आपराधिक मानहानि का मुकदमा भी दायर किया था.

मार्च 2018 में केजरीवाल और खेतान दोनों को अपने बयान वापस लेने पड़े और कोर्ट में लिखित माफ़ी मांगनी पड़ी. इस बीच, संजय सिंह अभी भी केस लड़ रहे हैं.

मजीठिया, जो शिअद अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल के साले हैं, पिछली शिअद-भाजपा सरकार में पंजाब के राजस्व मंत्री थे.

इसके अलावा, 2022 के विधानसभा चुनावों से पहले पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने दिसंबर 2021 में उनके खिलाफ़ एक एफआईआर दर्ज की थी.

विजिलेंस ब्यूरो की कार्रवाई 2021 की उसी एफआईआर के संबंध में है, जिसमें मजीठिया को तीन महीने के लिए जेल भेजा गया था.

जल्द ही और बड़ी मछलियां पकड़ी जाएंगी: मुख्यमंत्री भगवंत मान

मजीठिया की गिरफ़्तारी के एक दिन बाद पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बिक्रम मजीठिया के खिलाफ़ आय से अधिक संपत्ति के मामले में प्रेस कॉन्फ्रेंस की और कहा, ‘अभी तक वे कह रहे थे कि हम बड़ी मछलियां नहीं पकड़ पा रहे हैं, अब वे कह रहे हैं कि यह राजनीतिक प्रतिशोध है. कोई भी व्यक्ति कितना भी बड़ा या राजनीतिक रूप से प्रभावशाली क्यों न हो, मैं किसी पर दया नहीं करने वाला. चाहे वे किसी भी पार्टी के अध्यक्ष हों, उन्हें सज़ा दी जाएगी.’

मजीठिया का नाम लिए बिना मान ने कहा कि उनकी सरकार ने पुख्ता सबूतों के साथ काम किया है.

उन्होंने कहा, ‘जो लोग जेल गए, उनमें से 80/90% को कभी जमानत नहीं मिल पाई. जिन लोगों को यह गलतफहमी है कि उनके पास गिरफ्तारी से बचने के लिए सही ‘संपर्क’ हैं, उनका कुछ नहीं चलेगा. यहां विजिलेंस ब्यूरो और पंजाब पुलिस आएगी और अपराधियों को सजा मिलेगी. लोग नशे की लत से तंग आ चुके हैं.’

उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ‘युद्ध नशे विरुद्ध’ लड़ रही है और उन्हें गांवों से जबरदस्त समर्थन मिल रहा है.

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मान ने यह भी आशंका जताई कि उनकी जान को खतरा हो सकता है. उन्होंने कहा, ‘चाहे वो मेरा भी कोई नुक्सान करना चाहे, मैं नशे के खिलाफ जंग जारी रखूंगा.’

30 मोबाइल फोन, पांच लैपटॉप, तीन आईपैड, दो डेस्कटॉप और संपत्ति के दस्तावेज जब्त

25 जून को अपने बयान में विजिलेंस ब्यूरो ने कहा कि एनडीपीएस अधिनियम, 1985 की धारा 25, 27-ए और 29 के तहत दर्ज दिसंबर 2021 की एफआईआर की जांच कर रही एसआईटी और विजिलेंस ब्यूरो द्वारा की गई जांच में मजीठिया द्वारा ड्रग मनी के बड़े पैमाने पर लॉन्ड्रिंग का खुलासा हुआ है.

बयान में कहा गया है, ‘प्रारंभिक जांच से पता चलता है कि 540 करोड़ रुपये से अधिक की ड्रग मनी को विभिन्न तरीकों से लूटा गया है, जिसमें बिक्रम सिंह मजीठिया द्वारा नियंत्रित कंपनियों के बैंक खातों में जमा 161 करोड़ रुपये की भारी बेहिसाबी नकदी, संदिग्ध विदेशी संस्थाओं के माध्यम से 141 करोड़ रुपये का चैनलाइजेशन, कंपनी के वित्तीय विवरणों में प्रकटीकरण/स्पष्टीकरण के बिना 236 करोड़ रुपये का अतिरिक्त जमा और बिक्रम सिंह मजीठिया द्वारा बिना किसी वैध आय स्रोत के चल/अचल संपत्ति का अधिग्रहण शामिल है.’

विजिलेंस ब्यूरो के प्रवक्ता ने कहा कि इन लेन-देनों की जांच ब्यूरो द्वारा की जा रही है और एसआईटी जांच से यह भी स्पष्ट संकेत मिलता है कि इन फंडों का इस्तेमाल ड्रग मनी को सफेद करने के लिए किया गया था, जिसे ‘सरया इंडस्ट्रीज’ में डाला गया और मजीठिया द्वारा इसमें मदद की गई.

प्रवक्ता ने कहा, ‘अब तक 540 करोड़ रुपये की ड्रग मनी अवैध रूप से अर्जित की गई है और यह बिक्रम सिंह मजीठिया के प्रभाव का इस्तेमाल करके अर्जित की गई है, जो एक लोक सेवक, विधायक और तत्कालीन पंजाब सरकार में कैबिनेट पद पर थे. बिक्रम सिंह मजीठिया और उनकी पत्नी गनीव कौर के नाम पर अचल/चल दोनों तरह की संपत्तियों में काफी वृद्धि हुई है, जिसके लिए आय का कोई वैध स्रोत नहीं बताया गया है.’

विजिलेंस ब्यूरो के प्रवक्ता के अनुसार, एसआईटी ने 22 व्यक्तियों के यहां तलाशी ली और जब्ती की तथा विजिलेंस ब्यूरो ने तीन स्थानों पर छापे मारे, जिसमें 30 मोबाइल फोन, पांच लैपटॉप, तीन आईपैड, दो डेस्कटॉप, कई डायरियां, कई संपत्ति दस्तावेज और सरिया इंडस्ट्रीज के दस्तावेज बरामद हुए.

प्रवक्ता ने बताया कि बिक्रम सिंह मजीठिया को विजिलेंस ब्यूरो ने उचित प्रक्रिया का पालन करते हुए कानून के अनुसार गिरफ्तार किया है.

प्रवक्ता ने कहा, ‘जांच जारी है और और भी गिरफ्तारियां, तलाशी और जब्ती की जाएगी. न्यायिक फैसले के लिए सक्षम क्षेत्राधिकार वाली अदालत के समक्ष सभी एकत्रित साक्ष्य प्रस्तुत करके जांच को उसके तार्किक निष्कर्ष पर ले जाया जाएगा.’

अकाली विधायकों ने मजीठिया की गिरफ्तारी पर सवाल उठाए

गुरुवार 26 जून को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए वरिष्ठ अकाली नेता बलविंदर सिंह भूंदर, महेशिंदर सिंह ग्रेवाल और पार्टी प्रवक्ता दलजीत सिंह चीमा ने कहा कि आप सरकार ने वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज करके कानून का उल्लंघन किया है, जबकि न तो प्रारंभिक जांच की गई है और न ही नियमित जांच.

उन्होंने आप सरकार पर मजीठिया को चुप कराने और अपने नशा विरोधी अभियान की विफलता से ध्यान हटाने के लिए राजनीतिक प्रतिशोध में लिप्त होने का भी आरोप लगाया.

उन्होंने कहा कि भगवंत मान के नेतृत्व वाली सरकार पंजाबियों को गुमराह कर रही है और यह कहकर अदालत की अवमानना ​​कर रही है कि मजीठिया को 540 करोड़ रुपये के ड्रग मामले में गिरफ्तार किया गया है.

महेशिंदर ग्रेवाल ने कहा, ‘यह न केवल बेतुका है बल्कि झूठ का पुलिंदा है, जिसके लिए आप नेताओं को जवाबदेह ठहराया जाएगा.’ उन्होंने कहा कि सरकार को यह बताना चाहिए कि उसने एफआईआर या अन्य किसी मामले में 540 करोड़ रुपये के जो आंकड़े गढ़े हैं, उनके संबंध में एक भी शिकायत क्यों नहीं जारी की है.

ग्रेवाल ने कहा कि सरकारी वकील ने आज कहा कि मजीठिया के खिलाफ सिर्फ आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज किया गया है.

उन्होंने कहा, ‘यह भी मनगढ़ंत है. शिकायत में बताई गई संपत्तियां बिक्रम मजीठिया के जन्म से पहले ही मजीठिया परिवार के पास थीं. मजीठिया परिवार पैतृक रूप से समृद्ध परिवार है, जिसमें बिक्रम मजीठिया के दादा के पास 1950 के दशक में विमान और यहां तक ​​कि रोल्स रॉयस कार भी थी. यह भी गलत आरोप लगाया गया है कि बिक्रम मजीठिया सरिया इंडस्ट्रीज में निर्णय लेने के लिए जिम्मेदार थे, क्योंकि उन्होंने 2007 में कंपनी के निदेशक के पद से इस्तीफा दे दिया था.’

पार्टी प्रवक्ता दलजीत चीमा ने कहा कि मजीठिया के खिलाफ नए मामले में लगाए गए आरोप सुप्रीम कोर्ट में भी एनडीपीएस मामले में अकाली नेता को दी गई जमानत रद्द करने की मांग करते हुए पेश किए गए थे.

उन्होंने आरोप लगाया, ‘सुप्रीम कोर्ट ने आरोपों का संज्ञान नहीं लिया और अब उन्हें फिर से पेश करके नया मामला बना दिया गया है.’

चीमा ने यह भी कहा कि मोहाली अदालत में ‘आपातकाल जैसी स्थिति’ पैदा कर दी गई थी, क्योंकि सभी गेट पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया था और किसी को भी अंदर जाने की इजाजत नहीं दी जा रही थी.

उन्होंने विपक्ष, विशेषकर कांग्रेस नेता सुखपाल खैरा का धन्यवाद किया, जो मजीठिया के घर उनके साथ एकजुटता व्यक्त करने पहुंचे थे.

मजीठिया की गिरफ्तारी के बाद उनकी बहन और बठिंडा की सांसद हरसिमरत कौर बादल, और उनके बहनोई, शिअद अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने आप सरकार की निंदा की और इसे राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया.

हरसिमरत कौर बादल ने बताया कि उनके भाई आप सरकार की गलतियां उजागर करने के लिए जाने जाते हैं, चाहे वह सरकार के गलत काम हों या उसके मंत्रियों के आपत्तिजनक वीडियो हों.

उन्होंने सीएम मान को याद दिलाया कि यह आप के राष्ट्रीय अध्यक्ष अरविंद केजरीवाल ही थे जिन्होंने उनके भाई से लिखित माफ़ी मांगी थी. उन्होंने उन्हें चुनौती देते हुए कहा, ‘1.5 साल बाद भी, जब आप (मान) देश छोड़कर भाग जाएंगे, तो अकाली दल आपको वापस लाकर सभी को न्याय दिलाएगा.’

आप विधायक ने भी गिरफ्तारी पर सवाल उठाए

दिलचस्प बात यह है कि अमृतसर उत्तर से आप विधायक कुंवर विजय प्रताप सिंह ने मजीठिया को अभी गिरफ्तार करने के औचित्य पर सवाल उठाया है, जबकि 2021 में पूर्व सीएम चन्नी द्वारा उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज किए जाने के समय वे पहले ही तीन महीने जेल में बंद थे.

उन्होंने फेसबुक पर एक पोस्ट में पार्टी के भीतर दरार के संभावित संकेत देते हुए कहा, ‘मेरे राजनीतिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन भगवंत मान सरकार ने उनसे रिमांड या पूछताछ नहीं की. बाद में मान सरकार के अधिकारियों ने उन्हें जमानत दे दी. हाईकोर्ट ने इस आधार पर जमानत दी थी कि अगर मजीठिया पूछताछ के लिए वांछित नहीं हैं, तो उन्हें जेल में रखना अवैध है. हालांकि, अब नोटिस जारी किए जा रहे हैं, छापेमारी की जा रही है और घर की महिलाओं की गरिमा का हनन किया जा रहा है. यह अब राजनीति के बारे में नहीं है, यह सिद्धांतों, नैतिकता और शालीनता के बारे में है.’

इससे पहले शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी ने भी मजीठिया की गिरफ्तारी को पंजाब सरकार की हताशा और राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से प्रेरित बताया था. उन्होंने कहा, ‘अगर जांच या पूछताछ की जरूरत थी तो उचित कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया जाना चाहिए था.’

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