रथयात्रा भगदड़: विपक्ष का आरोप- राज्य सरकार ने अडानी परिवार की भागीदारी के लिए यात्रा में देरी की

विपक्ष ने ओडिशा की भाजपा सरकार पर पुरी में भगवान जगन्नाथ के रथों को खींचने में जानबूझकर देरी करने का आरोप लगाया है, ताकि उद्योगपति गौतम अडानी के परिवार को रथ खींचने की अनुमति मिल सके. गुंडिचा मंदिर के बाहर रविवार सुबह मची भगदड़ में तीन लोगों की मौत हो गई और 50 से अधिक लोग घायल हो गए.

पुरी में वार्षिक 'रथ यात्रा' उत्सव के दौरान भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के रथों के पास एकत्रित लोग. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: विपक्ष ने ओडिशा की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार पर शुक्रवार (27 जून) को पुरी में भगवान जगन्नाथ और उनके भाई-बहनों के रथों को खींचने में जानबूझकर देरी करने का आरोप लगाया है, ताकि उद्योगपति गौतम अडानी के परिवार को रथ खींचने की अनुमति मिल सके.

द टेलीग्राफ की रिपोर्ट के अनुसार, कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री प्रसाद हरिचंदन ने कहा, ‘वहां पूरा प्रशासन मौजूद था, लेकिन रथों को रोके रखने के कारण असहाय होकर देखता रहा. गौतम अडानी और उनके परिवार के रथ यात्रा में भाग लेने के बारे में बहुत चर्चा हुई. यहां तक ​​कि मुख्य मंदिर प्रशासक ने भी कहा कि कुछ भक्तों के आने की उम्मीद में रथों को रोका गया होगा. इसलिए, हम यह निष्कर्ष निकालना उचित समझते हैं कि अडानी परिवार की भागीदारी को सुविधाजनक बनाने के लिए देरी की गई थी.’

हरिचंदन ने इस घटना की पुरी के जिला एवं सत्र न्यायाधीश से न्यायिक जांच कराने की मांग की.

वार्षिक रथ यात्रा के अवसर पर रथ खींचने में हुई देरी को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है.

बीजू जनता दल (बीजद) के सुप्रीमो और ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने एक्स पर पोस्ट किया, ‘हम यहां कल नंदीघोष रथ खींचने में हुई अत्यधिक देरी के लिए प्रशासन पर उंगली उठाने या उसे दोष देने के लिए नहीं आए हैं. लेकिन हमारे राज्य में सबसे पवित्र आयोजन के दौरान जिस तरह से चीजें सामने आईं, उस पर अपनी गहरी चिंता और पीड़ा व्यक्त करना असंभव है. यह भूलना मुश्किल है कि पिछले साल, भगवान बलभद्र की मूर्ति अडापा बिजे पहंडी के दौरान कैसे फिसल गई थी – एक ऐसा क्षण जिसने अनगिनत भक्तों को झकझोर कर रख दिया था.’

उन्होंने कहा, ‘और अब इस साल, हमने देखा कि नंदीघोष रथ शाम 7.45 बजे तक सिंहद्वार पर खड़ा रहा, लेकिन रात होने से पहले कुछ मीटर इसे हटा दिया गया. जाहिर है, इस अनूठी घटना को देखने के लिए दुनिया भर से आए लाखों भक्त पूरी तरह निराश और हताश हो गए हैं. भीड़ प्रबंधन के खराब प्रबंधन के कारण सैकड़ों भक्त घायल भी हुए.’

बीजद ने कुप्रबंधन को लेकर मौजूदा मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी और कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन के इस्तीफे की भी मांग की.

भाजपा नेता और मंत्री हरिचंदन ने विपक्ष पर इस मुद्दे का राजनीतिकरण का प्रयास करने का आरोप लगाया और कहा कि ‘भगवान उन्हें माफ नहीं करेंगे.’

रथ यात्रा में भगदड़, प्रबंधन में खामियों का आरोप

पुरी के गुंडिचा मंदिर के बाहर रविवार सुबह मची भगदड़ में तीन लोगों की मौत हो गई और 50 से अधिक लोग घायल हो गए.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, पुरी में हुई भगदड़ में मारे गए लोगों के परिवार के सदस्यों ने घटनास्थल पर सुरक्षाकर्मियों और व्यवस्थाओं की कमी पर सवाल उठाए हैं.

जिन लोगों ने इस अव्यवस्था को देखा, उनके अनुसार, यह करीब 20 मिनट तक जारी रहा, जबकि दो वाहन घनी भीड़ वाले इलाके में घुस गए. स्थानीय लोगों और अन्य भक्तों ने सबसे पहले मदद की और घायल लोगों को भीड़ से निकाला और उन्हें नजदीकी अस्पतालों में पहुंचाया.

एक प्रत्यक्षदर्शी ने कहा, ‘रात भर में बड़ी भीड़ जमा होने के बावजूद दर्शन जल्दी ही बंद कर दिए गए (लगभग आधी रात को). जो लोग रात में दर्शन नहीं कर पाए, वे सुबह तक रथों के पास प्रतीक्षा करते रहे. ‘पहाड़ा भंग’ की रस्म शुरू होते ही भीड़ अचानक बढ़ गई. इससे भगदड़ मच गई.

कई अन्य लोगों ने इस भगदड़ के लिए दोषपूर्ण बैरिकेडिंग प्रणाली को जिम्मेदार ठहराया. रथ यात्रा के हिस्से के रूप में देवताओं के तीनों रथ शनिवार को गुंडिचा मंदिर पहुंचे, जहां देवता 5 जुलाई को होने वाली बहुदा यात्रा तक रहेंगे.

इससे पहले शुक्रवार को रथ यात्रा के दौरान भीड़भाड़ और उमस के कारण 200 से अधिक श्रद्धालु बीमार पड़ गए थे.

ओडिशा सरकार ने मामले की प्रशासनिक जांच के आदेश दिए हैं, जिसकी अध्यक्षता विकास आयुक्त अनु गर्ग की अध्यक्षता वाली समिति करेगी. पुरी कलेक्टर सिद्धार्थ शंकर स्वैन और पुलिस अधीक्षक (एसपी) विनीत अग्रवाल को हटा दिया गया है. दो वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को भी ‘कर्तव्य में लापरवाही’ के लिए निलंबित कर दिया गया है.

इस बीच, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी इस घटना पर चिंता व्यक्त की.

उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, ‘यह त्रासदी एक गंभीर चेतावनी है – ऐसे बड़े आयोजनों के लिए, सुरक्षा व्यवस्था और भीड़ प्रबंधन की तैयारियों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और पूरी तरह से समीक्षा की जानी चाहिए. जीवन की रक्षा सर्वोपरि है, और इस जिम्मेदारी में कोई चूक स्वीकार्य नहीं है.’