नई दिल्ली: भाजपा की तेलंगाना राज्य इकाई का नेतृत्व करने के लिए कथित तौर पर उन्हें नहीं चुने जाने पर निराशा व्यक्त करते हुए विधायक टी. राजा सिंह, जो सांप्रदायिक रूप से भड़काऊ बयान देने के लिए जाने जाते हैं, ने सोमवार (30 जून) को कहा कि उन्होंने पार्टी से इस्तीफा देने का फैसला किया है.
सिंह ने यह भी दावा किया कि भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए खुद को नामांकित करने के लिए जिन पार्टी सदस्यों का समर्थन हासिल करने की उन्होंने योजना बनाई थी, उन्हें ‘धमकाया गया और दूर रहने पर मजबूर किया गया’, हालांकि पार्टी ने इस आरोप का खंडन किया है.
हैदराबाद में गोशामहल निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले विधायक ने निवर्तमान राज्य इकाई के अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी को पत्र लिखकर कहा कि उन्होंने भाजपा के ‘प्राथमिक सदस्य’ के रूप में इस्तीफा देने का फैसला किया है, क्योंकि वह पार्टी की तेलंगाना शाखा द्वारा अपनाए गए कदम से निराश महसूस कर रहे हैं.
सिंह ने अपने पत्र में कहा कि ख़बरों में कहा गया है कि पूर्व एमएलसी एन. रामचंदर राव राज्य इकाई के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभालने जा रहे हैं, जो उनके साथ-साथ लाखों कार्यकर्ताओं, नेताओं और मतदाताओं के लिए एक ‘सदमा और निराशा’ की तरह है.
उन्होंने आगे कहा, ‘दुर्भाग्य से, ऐसा लगता है कि कुछ व्यक्तियों ने निजी स्वार्थों से प्रेरित होकर केंद्रीय नेतृत्व को गुमराह किया है और पर्दे के पीछे से मामले को संभालते हुए निर्णय लिए हैं.’
सिंह ने यह भी कहा कि भले ही वह पार्टी छोड़ रहे हैं, लेकिन वह ‘हिंदुत्व की विचारधारा और हमारे धर्म और गोशामहल के लोगों की सेवा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं.’
पार्टी ने आरोपों का खंडन किया
समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए सिंह ने कहा कि प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए खुद को नामांकित करने के लिए जिन लगभग दस लोगों के समर्थन की आवश्यकता थी, उन्हें ‘डराया गया और दूर रहने पर मजबूर किया गया.’
राज्य भाजपा ने इस आरोप का खंडन किया है और प्रवक्ता रानी रुद्रमा ने दावा किया कि सिंह ने पार्टी के खिलाफ तब बोलना शुरू कर दिया जब उन्हें नामांकन दाखिल करने का अवसर दिया गया, लेकिन पार्टी के नियमों के अनुसार वे दस राज्य परिषद सदस्यों के हस्ताक्षर प्राप्त करने में विफल रहे.
सिंह ने एएनआई से यह भी कहा कि हालांकि बूथ स्तर से लेकर नेतृत्व तक के कार्यकर्ताओं से चर्चा के बाद राज्य इकाई की बागडोर संभालने के लिए एक ‘आक्रामक’ अध्यक्ष की मांग की गई थी, ऐसा लगता है कि चयन प्रक्रिया पार्टी के भीतर कुछ लोगों द्वारा ‘पूर्व निर्धारित’ थी.
सिंह ने कहा, ‘यहां तेलंगाना में हिंदू-मुस्लिम भाईचारे की राजनीति काम नहीं करती. तेलंगाना में केवल हिंदू धर्म काम करता है.’
उन्होंने अपने दस संभावित हस्ताक्षरकर्ताओं को कथित रूप से डराने-धमकाने पर दुख जताया और कहा कि ‘कुछ लोग’ पार्टी के चारों ओर सांप की तरह लिपटे हुए हैं और उन्हें केंद्रीय नेतृत्व द्वारा ‘इलाज’ किए जाने की जरूरत है.
इससे पहले सिंह ने इस साल की शुरुआत में जिला स्तर के नेताओं के लिए अपनी पसंद पर असहमति का हवाला देते हुए पार्टी की कार्यप्रणाली पर असंतोष व्यक्त किया था, जिसके बाद राज्य नेतृत्व ने कहा था कि वह उचित दिशा में नहीं जा रहे हैं.
पैगंबर मुहम्मद के बारे में उनकी कथित टिप्पणी के कारण अगस्त 2022 से एक वर्ष से अधिक समय के लिए पार्टी से निलंबन के बाद सिंह को 2023 के तेलंगाना विधानसभा चुनाव से पहले बहाल कर दिया गया था, जिसमें उन्होंने 54% वोट के साथ अपनी गोशामहल सीट बरकरार रखी.
नफरत फैलाने वाले भाषण देने के कई मामलों में आरोपी सिंह अक्सर सांप्रदायिक बयान देते रहे हैं और उन्होंने भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने का आह्वान भी किया है.
इस बीच, एन. रामचंदर राव तेलंगाना भाजपा के नए अध्यक्ष नियुक्त किए गए.
तेलंगाना भाजपा राज्य इकाई के अध्यक्ष नियुक्त किए जाने पर राव ने कहा, ‘मैं अपने राष्ट्रीय नेतृत्व और पार्टी के अन्य सभी वरिष्ठ नेताओं को धन्यवाद देता हूं जिन्होंने मुझ पर अपना विश्वास और भरोसा जताया और मुझे तेलंगाना राज्य इकाई का अध्यक्ष बनाने का फैसला किया. मैं निश्चित रूप से देखूंगा कि तेलंगाना भाजपा कड़ी मेहनत करे और हमारा लक्ष्य अगले चुनावों में तेलंगाना में सत्ता में आना है. इस संबंध में कैडर, नेताओं को एक साथ कड़ी मेहनत करनी होगी और मैं इसके लिए प्रयास करूंगा.’
राव अपेक्षाकृत उदारवादी किशन रेड्डी की जगह ली है, जिन्होंने 2023 के विधानसभा चुनाव से महीनों पहले तेजतर्रार सांसद बंडी संजय कुमार की जगह ली थी.
