महिला पेंशन: ‘अयोग्य’ पाई गईं 60,000 से अधिक लाभार्थियों की पेंशन बंद करेगी दिल्ली सरकार

दिल्ली सरकार के महिला एवं बाल विकास द्वारा बड़े पैमाने पर किए गए सत्यापन अभियान के बाद महिला पेंशन योजना के तहत 60,000 से अधिक लाभार्थी अपात्र पाई गई हैं. इस योजना के तहत विधवा, तलाकशुदा, अलग रह रही और निराश्रित महिलाओं को हर महीने 2,500 रुपये की वित्तीय सहायता मिलती है.

प्रतीकात्मक तस्वीर: राजस्थान में पेंशन सुनिश्चित करने के लिए काम करने वाले कार्यकर्ता. (फोटो साभार: यूएन वीमेन एशिया एंड द पैसिफिक/फ्लिकर (CC BY-NC-ND 2.0 DEED)

नई दिल्ली: दिल्ली सरकार के महिला एवं बाल विकास (डब्ल्यूसीडी) विभाग द्वारा बड़े पैमाने पर किए गए सत्यापन अभियान में महिला पेंशन योजना के तहत 60,000 से अधिक लाभार्थी ‘पात्र नहीं’ पाई गई हैं.

मालूम हो कि इस पेंशन योजना के तहत विधवा, तलाकशुदा, अलग रह रही और निराश्रित महिलाओं को हर महीने 2,500 रुपये की वित्तीय सहायता मिलती है.

समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, एक अधिकारी ने बताया कि सत्यापन में कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें महिलाएं अब पात्रता मानदंड को पूरा नहीं करती हैं, लेकिन उनकी पेंशन जारी है. इनमें तलाकशुदा होने का दावा करने वाली पुनर्विवाहित महिलाएं, स्थिर आय के बावजूद सहायता प्राप्त करने वाली कार्यरत महिलाएं और अन्य जो अब अपने पंजीकृत पते पर नहीं रहती, शामिल हैं.

अधिकारियों ने बताया कि पिछले साल नवंबर में शुरू किए गए डोर-टू-डोर सत्यापन अभियान में ‘व्यापक विसंगतियां’ सामने आईं, जिसके कारण 60,000 लाभार्थियों को हटा दिया गया, जो अपात्र पाई गईं.

उल्लेखनीय है कि ये सत्यापन अभियान आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा चलाया गया था और इस योजना के लगभग 4.25 लाख लाभार्थियों को कवर किया गया.

अधिकारी ने बताया, ‘सभी जिलों में सत्यापन अभियान पूरा हो चुका है और डेटाबेस में आवश्यक सुधार किए गए हैं. अपात्र पाए गए लोगों के लिए पेंशन भुगतान बंद कर दिया गया है और सत्यापित लाभार्थियों के लिए फिर से शुरू कर दिया गया है. वर्तमान में लगभग 3.65 लाख महिलाएं इस योजना के तहत नियमित पेंशन प्राप्त कर रही हैं.’

गौरतलब है कि यह योजना पहली बार 2007-08 में आर्थिक रूप से कमजोर विधवा महिलाओं को आय का एक नियमित स्रोत प्रदान करने के लिए शुरू की गई थी, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इस योजना के तहत राशि बढ़ा दी गई और पात्रता का विस्तार कर अन्य श्रेणियों की महिलाओं को भी इसमें शामिल किया गया.