नई दिल्ली: बांग्लादेश इंटरनेशनल क्राइम्स ट्राइब्यूनल (आईसीटी) ने देश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को अदालत की अवमानना के एक मामले में छह महीने की जेल की सजा सुनाई है.
ढाका ट्रिब्यून के मुताबिक, यह फैसला बुधवार (2 जुलाई) को इंटरनेशनल क्राइम्स ट्राइब्यूनल-1 की तीन सदस्यीय पीठ द्वारा सुनाया गया, जिसकी अध्यक्षता जस्टिस मो. गोलाम मोर्तुज़ा मोजुमदार ने की.
इसी फैसले में, गैइबांधा के गोविंदगंज निवासी शकील अकंद बुलबुल को दो महीने की जेल की सजा भी सुनाई गई.
यह पहली बार है जब सत्ता से बाहर की गई अवामी लीग नेता शेख हसीना को किसी भी मामले में दोषी ठहराकर सज़ा सुनाई गई है. हसीना ने 11 महीने पहले देश छोड़ दिया था, तब से निर्वासन में हैं.
मानवता के खिलाफ अपराध के मामले में चल रहा है मुकदमा
इस कथित इंटरनेशनल क्राइम्स ट्राइब्यूनल ने 1 जून, 2025 को शेख हसीना और दो अन्य लोगों पर मानवता के खिलाफ अपराधों और अन्य आरोपों में औपचारिक रूप से अभियोग तय किया था. यानी मुकदमा शुरू कर दिया था.
इन आरोपों में सामूहिक हत्या भी शामिल है. यह आरोप पिछले साल छात्र-नेतृत्व वाले विरोध प्रदर्शन को बलपूर्वक दबाने में उनकी कथित भूमिका को लेकर लगाए गए हैं, जिसमें सैकड़ों लोग मारे गए थे.
हसीना के साथ जिन दो अन्य लोगों पर आरोप लगाए गए हैं, वे हैं पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमान खान कमाल और पूर्व पुलिस महानिदेशक (आईजीपी) चौधरी अब्दुल्ला अल ममून.
तब जस्टिस गोलाम मुर्तजा माजुमदार की अध्यक्षता वाली तीन न्यायाधीशों की आईसीटी पीठ ने कहा था कि, ‘हम इन आरोपों को संज्ञान में ले रहे हैं.’
ट्राइब्यूनल ने जांचकर्ताओं को आदेश दिया कि तीनों आरोपियों को 16 जून को अदालत में पेश किया जाए. ममून इस समय पुलिस हिरासत में हैं, जबकि हसीना और कमाल विदेश में रह रहे हैं.
बता दें कि आईसीटी में दोषी पाए जाने पर हसीना और अन्य आरोपियों को मृत्युदंड भी दिया जा सकता है.
मानवता के खिलाफ अपराध से हसीना का इनकार
पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने मानवता के खिलाफ अपराध करने के आरोपों से इनकार किया है. यह जानकारी एक जुलाई को बचाव पक्ष के वकील आमिर हुसैन ने दी.
सत्ता से हटाई गई अवामी लीग, जो अब प्रतिबंधित है, ने लंदन से एक बयान जारी कर इसे ‘नकली मुकदमा’ करार दिया और कहा कि शेख हसीना ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है.
हसीना को भारत से वापस भेजने की मांग
आईसीटी की सुनवाई के लिए बांग्लादेश की अंतरिम सरकार शेख हसीना को वापस भेजने के लिए भारत से औपचारिक अनुरोध कर चुकी है. पिछले साल दिसंबर में बांग्लादेश की अंतरिम सरकार में विदेश मामलों के सलाहकार तौहीद हुसैन ने कहा है, ‘हमने भारत सरकार को एक राजनयिक संदेश भेजा है, जिसमें कहा गया है कि बांग्लादेश न्यायिक प्रक्रिया के लिए शेख हसानी को वापस अपने यहां चाहता है.’
भारत के विदेश मंत्रालय ने इस अनुरोध की पुष्टि भी की थी. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा था, ‘हम पुष्टि करते हैं कि हमें बांग्लादेश उच्चायोग से प्रत्यर्पण अनुरोध पर एक नोट प्राप्त हुआ है.’ हालांकि भारत ने इस मामले पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया था.
बता दें कि 5 अगस्त को अपने 16 साल लंबे शासन के पतन के बाद बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना भारत आ गई थीं.
