पुराने वाहनों पर ईंधन प्रतिबंध के फैसले से पलटी दिल्ली सरकार, कहा- व्यावहारिक नहीं

दिल्ली में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए पुराने वाहनों को ईंधन की बिक्री बंद करने के दो दिन बाद अधिकारियों ने कहा कि यह प्रतिबंध व्यावहारिक नहीं है. दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि इस प्रतिबंध के कारण लोगों में 'असंतोष' पैदा हुआ है.

ईंधन प्रतिबंध मंगलवार को लागू किया गया था ताकि 15 वर्ष से अधिक पुरानी पेट्रोल कारों और 10 वर्ष से अधिक पुरानी डीजल कारों पर पहले से लागू लेकिन व्यापक रूप से उपेक्षित प्रतिबंध को और मजबूत किया जा सके. (फोटो: एएफपी)

नई दिल्ली: भारत की राजधानी दिल्ली में खतरनाक वायु प्रदूषण से निपटने के लिए पुराने वाहनों को ईंधन की बिक्री बंद करने के दो दिन बाद अधिकारियों ने गुरुवार (3 जुलाई) को कहा कि यह प्रतिबंध व्यावहारिक नहीं है.

रिपोर्ट के मुताबिक, कई अध्ययनों में बताया गया है कि नई दिल्ली को नियमित रूप से दुनिया भर में सबसे प्रदूषित राजधानियों में से एक माना जाता है, जहां वाहनों से होने वाला उत्सर्जन सबसे अधिक खतरनाक है.

धुंध के चरम पर पीएम 2.5 प्रदूषकों का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा अनुशंसित दैनिक अधिकतम स्तर से 60 गुना अधिक हो जाता है. ये प्रदूषक खतरनाक कैंसर पैदा करने वाले सूक्ष्म कण हैं, जो इतने छोटे होते हैं कि फेफड़ों के माध्यम से रक्त (bloodstream) में प्रवेश कर जाते हैं.

मालूम हो कि दिल्ली में ये ईंधन प्रतिबंध मंगलवार (1 जुलाई) को लागू किया गया था, ताकि 15 साल से अधिक पुरानी पेट्रोल कारों और 10 साल से अधिक पुरानी डीजल कारों पर पहले से मौजूद लेकिन व्यापक रूप से उपेक्षित प्रतिबंध को और मजबूत किया जा सके.

हालांकि, दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने संवाददाताओं से कहा कि ईंधन प्रतिबंध ‘तकनीकी गड़बड़ियों से संबंधित महत्वपूर्ण मुद्दों’ के कारण तर्कसंगत नहीं है. उन्होंने बताया कि ईंधन स्टेशनों पर लगाए गए नंबर प्लेट पहचानने वाले कैमरे और लाउडस्पीकर ‘खराब’ थे, जिसके कारण ‘झगड़े और बहस’ हुईं.

पर्यावरण मंत्री के अनुसार, इस प्रतिबंध के कारण लोगों में ‘असंतोष’ पैदा हुआ है.

सिरसा ने आगे ये भी कहा कि उन्होंने क्षेत्र के प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकरण को पत्र लिखकर प्रतिबंध को लागू करने में आने वाली समस्याओं के बारे में बताया है.

उन्होंने कहा, ‘जब तक कोई मजबूत व्यवस्था नहीं होगी और प्रतिबंध हर जगह ये लागू नहीं होगा, तब तक यह प्रतिबंध काम नहीं करेगा.’

ज्ञात हो कि नवंबर से इस प्रतिबंध को राजधानी के आसपास के शहरों तक बढ़ाया जाना था, जहां 32 मिलियन से अधिक लोग रहते हैं.

द लांसेट मेडिकल जर्नल में छपे एक अध्ययन के अनुसार, 2019 में भारत में 1.67 मिलियन असामयिक मौतें वायु प्रदूषण के कारण हुईं.

ज्ञात हो कि हर साल सर्दी में वाहनों और कारखानों से निकलने वाले उत्सर्जन के साथ-साथ आस-पास के राज्यों में खेतों में पराली जलाने से उत्पन्न हुई आग शहर को धुंध में लपेट देती है.

ठंडा तापमान और धीमी गति से चलने वाली हवाएं घातक प्रदूषकों को फंसाकर स्थिति को और खराब कर देती हैं. ऐसे में जीवाश्म ईंधन से चलने वाले परिवहन पर आंशिक प्रतिबंध और टैंकर द्वारा पानी के छिड़काव जैसी सरकार की छोटी-छोटी पहलों का कोई खास असर नहीं हुआ है.