बिहार: मतदाता सूची संशोधन के तहत 57% फॉर्म जमा, दस्तावेज़ और समयसीमा को लेकर उठ रहे सवाल

आयोग ने अपने विवादास्पद पुनरीक्षण अभियान के पहले 15 दिनों में राज्य के लगभग 7.9 करोड़ मतदाताओं में से 4.54 करोड़ या लगभग 57.54% मतदाताओं के गणना प्रपत्र एकत्र करने के बाद एक प्रेस विज्ञप्ति में दावा किया कि संग्रहण प्रक्रिया 25 जुलाई की 'निर्धारित तिथि से काफी पहले पूरी हो सकती है.'

चुनाव आयोग का दिल्ली स्थित मुख्यालय (फोटो साभार: पीआईबी)

नई दिल्ली: चुनाव आयोग (ईसी) ने बताया कि राज्य में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के तहत बिहार के 57% से अधिक मौजूदा मतदाताओं के गणना प्रपत्र बुधवार (9 जुलाई) शाम तक एकत्र कर लिए गए हैं.

रिपोर्ट के मुताबिक, आयोग ने अपने विवादास्पद पुनरीक्षण अभियान के पहले 15 दिनों में राज्य के लगभग 7.9 करोड़ मतदाताओं में से 4.54 करोड़ या लगभग 57.54% मतदाताओं के गणना प्रपत्र एकत्र करने के बाद एक प्रेस विज्ञप्ति में दावा किया कि संग्रहण प्रक्रिया 25 जुलाई की ‘निर्धारित तिथि से काफी पहले पूरी हो सकती है.’

चुनाव आयोग ने बताया कि बुधवार शाम 6 बजे से पहले के 24 घंटों में बिहार में चुनाव अधिकारियों ने 83.13 लाख गणना फ़ॉर्म या कुल संख्या का 10.52% एकत्र किया.

इस दौरान आयोग ने यह भी दावा किया कि उसने लगभग 7.9 करोड़ मुद्रित फ़ॉर्मों में से 7.7 करोड़ (लगभग 98%) वितरित कर दिए हैं.

मालूम हो कि बिहार में कुछ महीनों बाद नवंबर तक विधानसभा चुनाव होने हैं. ऐसे में मतदाता सूची को अपडेट करने की पहल के तहत चुनाव आयोग ने 25 जून को अपना विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान शुरू किया था.

आयोग ने इस प्रक्रिया की घोषणा करते हुए कहा था कि तेज़ी से बढ़ते शहरीकरण, लगातार हो रहे प्रवास, युवा नागरिकों के मतदान के योग्य होने, मौतों की सूचना न देने और विदेशी अवैध प्रवासियों के नाम शामिल करने जैसे कई कारणों से राज्य में यह संशोधन ज़रूरी हो गया है.

इस संशोधन के तहत जिन लोगों के नाम 2003 में राज्य में हुए आखिरी संशोधन के बाद तैयार की गई मतदाता सूची में नहीं हैं, उन्हें अपने जन्म का विवरण और उनके जन्म के समय के आधार पर अपने माता-पिता में से एक या दोनों का विवरण देना होगा.

इसके तहत राज्य के निवासियों को अपनी जन्मतिथि, मोबाइल नंबर और माता-पिता का नाम भरना होगा. साथ ही अपनी एक ‘वर्तमान तस्वीर’ लगानी होगी और एक गणना फॉर्म में एक घोषणापत्र पर हस्ताक्षर करने होंगे, जिस पर उनका नाम और पता सहित कई अन्य विवरण पहले से ही प्रिंट होंगे.

इस प्रक्रिया के आलोचकों ने इसके लिए निर्धारित समय की कमी और इस तथ्य की ओर इशारा किया है कि बिहार के मतदाताओं के एक बड़े हिस्से के पास उन 11 विशिष्ट रूप से सूचीबद्ध दस्तावेज़ों में से कोई भी नहीं हो सकता है, जिन्हें चुनाव आयोग जन्म विवरण के प्रमाण के रूप में स्वीकार कर रहा है.

इस संबंध में आयोग ने कहा है कि यह सूची ‘सांकेतिक’ है और ‘संपूर्ण नहीं’ है.

उल्लेखनीय है कि इस प्रक्रिया के तहत आयोग आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र या मनरेगा जॉब कार्ड, जिनमें से कोई भी राज्य के अधिकांश निवासियों के पास होने की संभावना है, को प्रमाण के रूप में स्वीकार नहीं कर रहा है, जिसके चलते इसका विरोध करने वालों ने यह भी कहा है कि यह प्रक्रिया ऐसे समय में हो रही है, जब बिहार में मानसून की मार पड़ रही है और यहां के कई निवासी भारत या दुनिया के अन्य हिस्सों में प्रवासी मज़दूरों के रूप में काम कर रहे हैं.

कुछ लोगों ने इस प्रक्रिया पर रोक लगाने के लिए सर्वोच्च न्यायालय का दरवाज़ा भी खटखटाया है, जिस पर शीर्ष अदालत गुरुवार को इस संशोधन के खिलाफ सांसदों, पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं सहित कई अन्य याचिकाओं पर सुनवाई करेगी.

इस बीच बुधवार को एक अलग प्रेस विज्ञप्ति में चुनाव आयोग ने अपने विशेष गहन पुनरीक्षण के ‘चार स्तंभों’ की सूची दी.

इसके तहत पहला स्तंभ यह है कि ये प्रक्रिया ‘सर्व-समावेशी’ है, जिसमें बूथ-स्तरीय अधिकारी मतदाताओं के घरों में ‘कम से कम’ तीन बार जाकर उन्हें उनके पहले से भरे हुए गणना फॉर्म देंगे.

दूसरा, जो भी लोग 25 जुलाई तक ये फॉर्म जमा करेंगे, उनके नाम 1 अगस्त को प्रकाशित होने वाली मतदाता सूची के ड्राफ्ट में शामिल होंगे.

आयोग के अनुसार, ‘आवेदक दावों और आपत्तियों की अवधि, जो 1 सितंबर को समाप्त हो रही है, के दौरान पात्रता संबंधी दस्तावेज़ अलग से भी जमा किए जा सकते हैं.’

तीसरा ‘स्तंभ’ मतदाताओं के लिए कानूनी पात्रता मानदंड से संबंधित है, जबकि चौथा यह है कि यदि किसी अधिकारी को उनकी पात्रता पर संदेह हो, तो निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) द्वारा जारी किए गए ‘स्पीकिंग ऑर्डर’ के बिना किसी को मतदाता सूची से बाहर नहीं किया जा सकता.

गौरतलब है कि चुनाव आयोग का कहना है कि ईआरओ के फैसले से असहमत कोई भी व्यक्ति डीएम (जिला मजिस्ट्रेट) के समक्ष अपील कर सकता है और सीईओ (मुख्य निर्वाचन अधिकारी) के समक्ष दूसरी अपील की जा सकती है.’