नई दिल्ली: एनसीईआरटी की कक्षा 8 के लिए तैयार की गई नई विज्ञान की पाठ्यपुस्तक में भारतीय वैज्ञानिक ‘विरासत और खोजों’ को विशेष रूप से शामिल किया गया है. प्राचीन दार्शनिक आचार्य कणाद की ‘पारमाणु’ (अणु) की अवधारणा से लेकर आधुनिक टीकों से पहले चेचक से बचाव के लिए अपनाई गई पारंपरिक विधि ‘वैरियोलेशन’ का भी उल्लेख किया गया है.
किताब में ‘कांस्य’ (तांबा और टिन का मिश्रधातु) जैसे मिश्रधातुओं के औषधीय उपयोग, आयुर्वेदिक औषधियों में जल व तेल जैसे प्राकृतिक विलायकों के इस्तेमाल और आधुनिक टीकों से पहले चेचक से बचाव के लिए अपनाई गई पारंपरिक विधि ‘वैरियोलेशन’ का भी उल्लेख है.
हिंदुस्तान टाइम्स ने कक्षा 8 की विज्ञान की पाठ्यपुस्तक में किए गए बदलावों पर एक विस्तृत रिपोर्ट की है. रिपोर्ट के अनुसार, पाठ्यपुस्तक में ‘क्या आपने कभी सुना है?’ और ‘हमारी वैज्ञानिक विरासत’ जैसे खंडों के ज़रिये आधुनिक वैज्ञानिक सिद्धांतों को भारत की कथित प्राचीन वैज्ञानिक खोजों से जोड़ा गया है. एक खंड में रोचक तथ्य दिए गए हैं, तो दूसरे में उन संस्थानों और व्यक्तियों का ज़िक्र है जिन्होंने वैज्ञानिक सोच के विकास में योगदान दिया.
एनसीईआरटी के पूर्व निदेशक जे.एस. राजपूत ने कहा, ‘2 अक्टूबर, 1996 को जारी यूनेस्को की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि 21वीं सदी की शिक्षा अपने देश की संस्कृति से जुड़ी होनी चाहिए. यह महात्मा गांधी की सोच के भी अनुरूप है, जिन्होंने कहा था, ‘मैं अपने घर की खिड़कियां और दरवाज़े ताज़ी हवा के लिए खुली रखूंगा, लेकिन अपना घर उड़ने नहीं दूंगा.’ राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 भी यही कहती है कि छात्रों को अपनी परंपराओं, इतिहास और वैज्ञानिक खोजों के बारे में जानना चाहिए. एनसीईआरटी ने इसे पाठ्यपुस्तक में शामिल कर सराहनीय कार्य किया है.’
228 पन्नों की यह नई किताब राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी 2020) और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (एनसीएफएससी 2023) के अनुरूप तैयार की गई है. इसमें कुल 13 अध्याय हैं.
विभिन्न अध्यायों में किए गए बदलाव
‘स्वास्थ्य: सबसे बड़ा खज़ाना’ नामक एक अध्याय में ‘हमारी वैज्ञानिक विरासत’ खंड के अंतर्गत बताया गया है कि ‘आधुनिक टीकों के आने से पहले भारत में चेचक से बचाव के लिए ‘वैरियोलेशन’ नामक पारंपरिक पद्धति अपनाई जाती थी, जिसमें संक्रमित घाव से लिए गए पदार्थ को त्वचा पर खरोंच कर हल्का संक्रमण उत्पन्न किया जाता था, जिससे शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित होती थी.’
इसी अध्याय के ‘क्या आपने कभी सुना है?’ खंड में यह बताया गया है कि ‘कोविड-19 महामारी के दौरान भारतीय वैक्सीन कंपनियों की भूमिका महत्वपूर्ण रही और वे आज भी वैश्विक स्वास्थ्य प्रयासों में योगदान दे रही हैं.’
‘पदार्थ की कणात्मक प्रकृति’ नामक अध्याय में आचार्य कणाद की परमाणु सिद्धांत का जिक्र किया गया है. ‘उन्होंने यह विचार रखा था कि समस्त पदार्थ अत्यंत सूक्ष्म और शाश्वत कणों (परमाणु) से बने हैं. यह विचार उनके ग्रंथ ‘वैशेषिक सूत्र’ में लिखे हुए हैं.’
‘पदार्थ की प्रकृति: तत्व, यौगिक और मिश्रण’ अध्याय में बताया गया है कि प्राचीन भारतीय ग्रंथों में औषधीय प्रयोगों के लिए मिश्रधातुओं के उपयोग का उल्लेख है. जैसे की- कांस्य, तांबा और टिन से मिलकर बना मिश्रधातु है, जिसे पाचन सुधारने और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए उपयोग किया जाता था.
‘प्रकाश: दर्पण और लेंस’ अध्याय में उल्लेख किया गया है कि 800 वर्ष पूर्व, भास्कर द्वितीय के काल में भारतीय खगोलशास्त्री उथले जलपात्रों और कोणयुक्त ट्यूबों का प्रयोग कर आकाशीय पिंडों की स्थिति का निरीक्षण और मापन किया करते थे, जिससे यह संकेत मिलता है कि उन्हें परावर्तन के सिद्धांत का व्यावहारिक ज्ञान था.
‘आसमान के साथ समय मापना’ नामक अध्याय में पुराने ग्रंथ- तैत्तिरीय संहिता के एक श्लोक का जिक्र किया गया है, जिसमें सूर्य के दक्षिणायन और उत्तरायण के छह-छह महीनों की यात्रा का वर्णन है. इस अध्याय में इसरो के चंद्रयान-1, 2 और 3, सूर्य अध्ययन मिशन- आदित्य-एल1 और मंगलयान जैसे अभियानों का विवरण भी दिया गया है.
हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय की कुलपति सुषमा यादव ने कहा, ‘एनईपी 2020 कहती है कि हमें ऐसे भारतीय नागरिक तैयार करने हैं जो न केवल आज के युग के लिए जरूरी ज्ञान रखते हों, बल्कि अपनी सांस्कृतिक जड़ों पर भी गर्व करें. एनसीईआरटी द्वारा भारतीय वैज्ञानिक योगदानों को पाठ्यक्रम में शामिल करना छात्रों को भारत की समृद्ध विरासत पर गर्व करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है.’
एनसीईआरटी राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और एनसीएफएसई 2023 के अनुरूप नए पाठ्यपुस्तकों को चरणबद्ध रूप से तैयार कर रहा है. वर्ष 2023 में कक्षा 1 और 2 के लिए, और वर्ष 2024 में कक्षा 3 और 6 के लिए किताबें जारी की गई थीं. इस वर्ष कक्षा 4, 5, 7 और 8 के लिए नई किताबें प्रकाशित की जा रही हैं.
अन्य पाठ्यपुस्तकों में भी किए गए बदलाव
इससे पहले एनसीईआरटी ने इस साल अपनी कक्षा 7 की स्कूल किताबों में से मुगलों और दिल्ली सल्तनत से जुड़े सभी उल्लेख हटा दिए थे और उनकी जगह ‘भारतीय भावना’ को दर्शाने वाले राजवंशों, महाकुंभ और केंद्र सरकार की प्रमुख पहलों पर आधारित नए अध्याय जोड़े थे.
वहीं पिछले साल एनसीईआरटी ने कक्षा 3 और 6 के कई पाठ्यपुस्तकों से संविधान की प्रस्तावना को हटा दिया गया था.
कक्षा 6 की सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक से जाति और वर्ण व्यवस्था के उल्लेख को हटा दिया गया था. इस कदम को शिक्षाविदों की आलोचना झेलनी पड़ी थी.
