अब सीरिया पर क्यों बमबारी कर रहा है इज़रायल?

दक्षिणी सीरिया के स्वेदा प्रांत में स्थानीय सुन्नी बेदुईन कबीलों और द्रूज़ सशस्त्र गुटों के बीच हुई हिंसा को बहाना बनाकर इज़रायल ने दमिश्क में रक्षा मंत्रालय और राष्ट्रपति भवन के पास के इलाके को निशाना बनाया. इज़रायल ने हमलों का उद्देश्य अल्पसंख्यक द्रूज़ समुदाय की रक्षा बताया है.

सीरिया और इज़रायल के द्रूज़ समुदाय के लोग 16 जुलाई, 2025 को इज़रायली-सीरियाई सीमा पर स्थित माज्दल शम्स (जो इज़रायल के नियंत्रण वाले गोलान हाइट्स में है) में प्रदर्शन करते हुए. यह प्रदर्शन सीरिया के दक्षिणी शहर स्वेदा में सीरियाई सरकारी बलों और द्रूज़ सशस्त्र गुटों के बीच जारी संघर्ष के दौरान हुआ. (फ़ोटो: एपी/पीटीआई)

नई दिल्ली: इज़रायल ने बुधवार (16 जुलाई, 2025) को लगातार तीसरे दिन सीरिया पर हमला किया है. इज़रायली सरकार का कहना है कि उसके हमलों का उद्देश्य सीरिया में रहने वाले द्रूज़ अल्पसंख्यक समुदाय की रक्षा करना है.

दरअसल, सीरिया में हालिया तनाव की शुरुआत दक्षिणी स्वेदा प्रांत में स्थानीय सुन्नी बेदुईन कबीलों और द्रूज़ सशस्त्र गुटों के बीच अपहरण और जवाबी हमलों से हुई. हालात संभालने के लिए सीरियाई सरकार ने सेना भेजा, लेकिन सरकार सेना बाद में खुद ही द्रूज़ लड़ाकों से भिड़ गई.

हालांकि, गुरुवार (17 जुलाई, 2025) को सीरियाई सरकार के अधिकारियों और द्रूज़ धार्मिक अल्पसंख्यक समुदाय के नेताओं ने एक नया युद्धविराम (सीज़फायर) घोषित किया.

सरकारी बलों के काफिले स्वेदा शहर से पीछे हटने लगे हैं, लेकिन यह अभी साफ नहीं है कि सीरिया के गृह मंत्रालय और एक द्रूज़ धार्मिक नेता द्वारा एक वीडियो संदेश में घोषित यह समझौता लंबे समय तक टिकेगा या नहीं. इससे एक दिन पहले मंगलवार को घोषित एक और युद्धविराम बहुत जल्दी टूट गया था.

दूसरी तरफ द्रूज़ समुदाय के एक प्रमुख नेता शेख हिकमत अल-हिजरी ने नए समझौते से खुद को अलग कर लिया है. युद्धविराम की घोषणा के बावजूद, इज़रायली हमले जारी हैं.

16 जुलाई, 2025 का हमला



बुधवार को इज़रायल ने सीरिया की राजधानी दमिश्क में रक्षा मंत्रालय के मुख्यालय को निशाना बनाया, जो एक व्यस्त चौराहे के पास स्थित है और असद की सत्ता से बेदखली के बाद प्रदर्शनकारियों का प्रमुख ठिकाना बन गया था.

सीरियाई अधिकारियों के अनुसार, इस हमले में तीन लोगों की मौत हुई और 34 लोग घायल हुए. इज़रायल का एक और हमला दमिश्क के बाहर पहाड़ियों में स्थित राष्ट्रपति भवन के पास किया गया.

इस हमले के बाद इज़रायली रक्षा मंत्री इस्राइल काट्ज़ ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स (पहले ट्विटर) पर चेतावनी देते हुए लिखा, ‘दमिश्क को दी गई चेतावनियों का समय अब खत्म हो चुका है — अब दर्दनाक प्रहार होंगे.’ काट्ज़ ने आगे कहा कि उन्होंने और प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने सीरिया में द्रूज़ समुदाय की रक्षा करने का संकल्प लिया है.

इज़रायल को द्रूज़ समुदाय की चिंता क्यों?



द्रूज़ समुदाय सीरिया के साथ-साथ इज़रायल में भी एक बड़ा और महत्वपूर्ण समुदाय है. इज़रायल में द्रूज़ समुदाय को वफादार अल्पसंख्यक के रूप में देखा जाता है, और वे अक्सर इज़रायली सेना में सेवा भी करते हैं. इसके अलावा इज़रायल का मकसद कथित इस्लामी चरमपंथियों को अपनी सीमा से दूर हटाना भी है.

स्वेदा में जारी लड़ाई के बीच इज़रायल के द्रूज़ समुदाय के लोग सीरिया में प्रवेश कर वहां के द्रूज़ लड़ाकों का समर्थन कर रहे हैं, जबकि सीरिया के द्रूज़ समुदाय के कुछ लोग इज़रायल में प्रवेश करने की कोशिश कर रहे हैं.

सीमा पर व्यवस्था बनाए रखने के लिए इज़रायली सैनिक आंसू गैस का इस्तेमाल कर रहे हैं. यह इलाका बेहद कड़ी सुरक्षा वाले बॉर्डर क्षेत्र में आता है.

हालिया हिंसा सीरिया की नई सरकार के लिए चुनौती



यह हिंसा अब तक की सबसे गंभीर चुनौती के रूप में देखी जा रही है, जो सीरिया की नई सरकार के देश में नियंत्रण स्थापित करने के प्रयासों को कमजोर कर सकती है. दिसंबर में इस्लामी विद्रोही गुटों की अगुवाई में एक विद्रोह के बाद, लंबे समय से सत्तारूढ़ और तानाशाह बशर अल-असद को सत्ता से बेदखल कर दिया गया था, जिससे लगभग 14 साल से चल रहा गृहयुद्ध खत्म हुआ.

नई सरकार, जो मुख्य रूप से सुन्नी मुस्लिम समुदाय की है, को धार्मिक और जातीय अल्पसंख्यकों से अविश्वास का सामना करना पड़ रहा है — खासकर मार्च में सरकारी बलों और असद समर्थक गुटों के बीच हुई झड़पों के बाद, जो सांप्रदायिक बदले की हिंसा में बदल गई थी. इस दौरान असद के अलावी समुदाय के सैकड़ों नागरिकों की हत्या कर दी गई थी.

ताजा हिंसा में मरने वालों की आधिकारिक संख्या अब तक जारी नहीं की गई है. हालांकि गृह मंत्रालय ने सोमवार को बताया था कि 30 लोगों की मौत हुई है. वहीं, ब्रिटेन स्थित युद्ध निगरानी समूह ‘सीरियन ऑब्जर्वेटरी फॉर ह्यूमन राइट्स’ ने कहा है कि बुधवार सुबह तक मरने वालों की संख्या 300 से अधिक हो चुकी थी, जिनमें चार बच्चे, आठ महिलाएं और 165 सैनिक व सुरक्षाकर्मी शामिल हैं.

इज़रायल की नई सरकार पर आक्रामक नीति

इज़रायल ने सीरिया की नई सरकार के प्रति आक्रामक रुख अपनाया है. उसका कहना है कि वह अपने सीमावर्ती क्षेत्रों में इस्लामी चरमपंथियों की मौजूदगी नहीं चाहता. इसी वजह से इज़रायली सेना ने सीरिया के गोलान हाइट्स सीमा से लगे हिस्से में संयुक्त राष्ट्र की निगरानी वाली बफर ज़ोन पर कब्ज़ा कर लिया है और सीरिया के सैन्य ठिकानों पर सैकड़ों हवाई हमले कर चुकी है.

रक्षा मंत्री काट्ज ने एक बयान में कहा कि इज़रायली सेना ‘सरकारी बलों को तब तक निशाना बनाएगी जब तक वे वहां से पीछे नहीं हटते’. उन्होंने चेतावनी दी कि ‘अगर सीरिया ने संदेश नहीं समझा तो हमारी प्रतिक्रिया और तीखी होगी.’

नेतन्याहू ने इस साल फरवरी में कहा था कि दक्षिणी सीरिया को पूरी तरह से डिमिलिटराइज़्ड किया जाना चाहिए और चेतावनी दी थी कि इज़रायल सीरियाई सरकारी बलों की अपनी नियंत्रण वाली सीमाओं के पास मौजूदगी को बर्दाश्त नहीं करेगा.