नई दिल्ली: भारत द्वारा फिल्म निर्माता सत्यजीत रे के कथित पैतृक घर को संरक्षित करने में सहयोग करने की इच्छा जताने के एक दिन बाद बांग्लादेश सरकार ने स्पष्ट रूप से कहा है कि जिस इमारत की बात हो रही है, उसका रे के परिवार से कोई पारिवारिक या ऐतिहासिक संबंध नहीं रहा है.
रिपोर्ट के मुताबिक, 17 जुलाई को जारी एक आधिकारिक बयान में बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने कहा कि आर्काइव दस्तावेज़ और ज़मीन से जुड़े रिकॉर्ड इस बात की पुष्टि करते हैं कि मैमनसिंह में जिस इमारत को तोड़ा जा रहा है, उसका रे या उनके पूर्वजों से कोई नाता नहीं है.
मंत्रालय के अनुसार, यह इमारत मूल रूप से एक स्थानीय ज़मींदार ने अपने कर्मचारियों के लिए बनवाई थी और बाद में इसे बांग्लादेश शिशु अकादमी को सौंप दिया गया था, जो इसे दशकों तक अपने ज़िला कार्यालय के रूप में इस्तेमाल करती रही.
मालूम हो कि यह स्पष्टीकरण भारत के विदेश मंत्रालय द्वारा इस इमारत को साझा बंगाली सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक बताते हुए इसके संरक्षण में बांग्लादेश को सहयोग की पेशकश के बाद आया है.
उल्लेखनीय है कि यह मुद्दा तब सुर्खियों में आया, जब बुधवार (16 जुलाई) की शाम ‘द डेली स्टार’ में एक रिपोर्ट प्रकाशित हुई, जिसमें दावा किया गया कि मैमनसिंह में सत्यजीत रे के दादा और मशहूर बंगाली साहित्यकार उपेंद्र किशोर रे चौधरी का पैतृक घर तोड़ा जा रहा है ताकि वहां नई इमारत बनाई जा सके.
विदेश मंत्रालय की यह पेशकश पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सार्वजनिक अपील के बाद आई थी, जिसमें उन्होंने इस इमारत को उपेंद्र किशोर रे चौधरी का पैतृक घर बताकर उसके तोड़े जाने पर चिंता जताई थी.
इस संबंध में बांग्लादेश सरकार ने बयान जारी कर कहा, ‘यह ज़मीन गैर-कृषि खस ज़मीन के रूप में वर्गीकृत है और इसे लंबे समय के पट्टे पर बांग्लादेश शिशु अकादमी को दिया गया था. अकादमी ने 2014 तक इस इमारत का उपयोग किया, जिसके बाद इसे असुरक्षित मानते हुए खाली कर दिया गया. तब से यह संरचना कथित तौर पर अवैध गतिविधियों का अड्डा बन गई थी और स्थानीय लोगों के लिए खतरा पैदा कर रही थी.’
मंत्रालय ने यह भी कहा कि हालांकि, पास की एक सड़क का नाम फिल्मकार के एक रिश्तेदार हरि किशोर रे के नाम पर है, लेकिन रे परिवार का असली घर जो कभी इस इलाके में हुआ करता था, उसे कई दशक पहले बेच दिया गया था. उस संपत्ति के वर्तमान मालिक ने पुरानी संरचना के स्थान पर एक बहुमंज़िला इमारत बना लिया है.
इस मामले को लेकर बुधवार (16 जुलाई) दोपहर मैमनसिंह के डिप्टी कमिश्नर ने स्थानीय लेखकों, पत्रकारों, शिक्षाविदों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों के साथ एक बैठक बुलाई.
विदेश मंत्रालय के अनुसार, बैठक में मौजूद सभी लोगों ने सर्वसम्मति से कहा कि जिस इमारत को लेकर विवाद है, उसका रे परिवार से कोई लेना-देना नहीं रहा है.
मंत्रालय ने अपने बयान के अंत में जनता और मीडिया से अपील की कि वे ‘गलत या भ्रामक सूचनाएं फैलाने से बचें, क्योंकि इससे लोगों के बीच भ्रम फैल सकता है और सामाजिक सौहार्द में बाधा उत्पन्न हो सकती है.’
भारत ने की थी मदद की पेशकश
गौरतलब है कि सत्यजीत रे के कथित पैतृक घर के जर्जर हालत में हो जाने के कारण भवन को गिराने की आधिकारिक मंजूरी मिली थी. इस इमारत की जगह यहां एक अर्ध-पक्का नया भवन बनाया जा रहा है, जिसमें शिशु अकादमी की गतिविधियां संचालित की जाएंगी.
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बांग्लादेश सरकार से इस घर को संरक्षित करने की अपील की थी और भारत सरकार से इस मामले पर संज्ञान लेने को कहा था.
असके बाद मंगलवार देर रात भारत के विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर भवन के तोड़े जाने पर गहरा खेद व्यक्त करते हुए कहा था कि यह इमारत फिलहाल जर्जर अवस्था में है.
मंत्रालय के बयान में कहा गया था, ‘इस भवन को बंगाली सांस्कृतिक पुनर्जागरण के प्रतीक के रूप में देखा जाता है. ऐसे में बेहतर होगा कि इस ‘विध्वंस’ पर पुनर्विचार किया जाए और इसे एक साहित्यिक संग्रहालय और भारत-बांग्लादेश की साझा संस्कृति के प्रतीक के रूप में पुनर्निर्माण का विकल्प तलाशा जाए.’
भारत ने यह भी कहा था कि वह इस उद्देश्य के लिए सहयोग करने का इच्छुक है.
