नई दिल्ली: कई बैंक मिनिमम बैलेंस राशि न रखने पर लगने वाले शुल्क को माफ करने की घोषणा कर रहे हैं, लेकिन वित्त मंत्रालय ने मंगलवार (29 जुलाई) को संसद को बताया कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) ने पांच साल की अवधि में इस पर लगभग 9,000 करोड़ रुपये का जुर्माना वसूला है.
मालूम हो कि ग्राहकों के लिए मिनिमम बैलेंस की सीमा शहरों और गांवों में अलग-अलग है. ये जुर्माना बैंक और ग्राहक के स्थान के आधार पर 25 रुपये से 600 रुपये तक लगाया जाता है.
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, मंगलवार को राज्यसभा में प्रस्तुत वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, ग्यारह सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) ने बचत बैंक खातों में कम बैलेंस राशि के लिए जुर्माने के रूप में पिछले पांच वर्षों में लगभग 9,000 करोड़ रुपये वसूल किए हैं.
राज्यसभा में एक प्रश्न के उत्तर में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, राज्य के स्वामित्व वाले बैंकों ने 2020-21 से शुरू होकर 2024-25 तक – पांच वर्षों में न्यूनतम औसत मासिक बैलेंस राशि न रखने पर जुर्माने के रूप में 8,932.98 करोड़ रुपये वसूल किए.
वित्त मंत्रालय द्वारा साझा किए गए ये आंकड़े यूनियन बैंक ऑफ इंडिया द्वारा अन्य सरकारी बैंकों के साथ मिलकर मिनिमम बैलेंस राशि न रखने पर लगने वाले जुर्माने को माफ करने के कुछ दिनों बाद आए हैं, जो पिछले कुछ समय से एक संवेदनशील मुद्दा रहा है. यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने पिछले हफ्ते कहा था, ‘इस कदम का उद्देश्य एकरूपता, निष्पक्षता सुनिश्चित करना और ग्राहकों के लिए बुनियादी बैंकिंग सेवाओं की पहुंच बढ़ाना है.’
वित्त मंत्रालय ने बताया कि चालू तिमाही से इन शुल्कों को समाप्त करने वाले अन्य सरकारी बैंकों में केनरा बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, पंजाब नेशनल बैंक, इंडियन बैंक, बैंक ऑफ इंडिया और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया शामिल हैं. देश के सबसे बड़े ऋणदाता- भारतीय स्टेट बैंक ने मार्च 2020 से मेंटेनेंस न रखने पर कोई जुर्माना (non-maintenance penalties) नहीं लगाया है.
चौधरी ने राज्यसभा को बताया, ‘वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) ने बैंकों को न्यूनतम औसत बैलेंस न रखने पर जुर्माने को तर्कसंगत बनाने के मुद्दे की जांच करने की सलाह दी है, जिसमें अर्ध-शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राहकों को राहत प्रदान करने पर विशेष जोर दिया गया है.’
वित्त राज्य मंत्री द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, इंडियन बैंक ने पांच साल की अवधि में इन सभी जुर्माने का पांचवां हिस्सा, यानी 1,828.18 करोड़ रुपये वसूला. इसके बाद पंजाब नेशनल बैंक 1,662.42 करोड़ रुपये के साथ दूसरे स्थान पर रहा, बैंक ऑफ बड़ौदा 1,531.62 करोड़ रुपये के जुर्माने के साथ शीर्ष तीन में रहा, जिसने अपने खातों में एक निश्चित न्यूनतम बैलेंस न रखने वाले ग्राहकों से जुर्माना वसूला.
2020-21 में न्यूनतम राशि न रखने पर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों द्वारा 1,142.13 करोड़ रुपये का जुर्माना वसूला गया, जो 2021-22 में 25 प्रतिशत, 2022-23 में 30 प्रतिशत और 2023-24 में 26 प्रतिशत बढ़कर क्रमशः 1,428.53 करोड़ रुपये, 1,855.43 करोड़ रुपये और 2,331.08 करोड़ रुपये हो गया.
हालांकि, 2024-25 में यह 7 प्रतिशत की मामूली गिरावट के साथ 2,175.81 करोड़ रुपये रह गया.
