केरल: छत्तीसगढ़ में गिरफ़्तार दो नन ज़मानत पर बाहर आईं, राजनीतिक दलों में श्रेय लेने की होड़

छत्तीसगढ़ में मानव तस्करी और जबरन धर्म परिवर्तन के आरोप में गिरफ्तार केरल की दो ननों और एक अन्य व्यक्ति को शनिवार (2 अगस्त) को राज्य की एक विशेष अदालत से जमानत मिलने के बाद दुर्ग केंद्रीय जेल से रिहा कर दिया गया है.

(प्रतीकात्मक फोटो साभार: Pixabay)

नई दिल्ली: छत्तीसगढ़ में मानव तस्करी और जबरन धर्म परिवर्तन के आरोप में गिरफ्तार केरल की दो ननों और एक अन्य व्यक्ति को शनिवार (2 अगस्त) को राज्य की एक विशेष अदालत से जमानत मिलने के बाद दुर्ग केंद्रीय जेल से रिहा कर दिया गया है.

मीडिया खबरों के मुताबिक, ननों की रिहाई को लेकर राज्य की सत्तारूढ़ भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) (माकपा), विपक्षी कांग्रेस और भाजपा ने ईसाई समुदाय के साथ एकजुटता का व्यापक प्रदर्शन किया है.

विभिन्न दलों के कई नेताओं ने केरल में इन दोनों ननों के घरों का दौरा किया. साथ ही छत्तीसगढ़ के दुर्ग स्थित उस जेल भी गए, जहां शनिवार को ज़मानत पर रिहाई से पहले इन ननों को रखा गया था.

मालूम हो कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) शासित छत्तीसगढ़ में ननों पर लगे जबरन धर्मांतरण और मानव तस्करी के आरोपों को खारिज करने वाले भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने पार्टी के प्रदेश महासचिव अनूप एंटनी को छत्तीसगढ़ के गृह मंत्री विजय शर्मा से मिलने भेजा था.

शनिवार को चंद्रशेखर खुद एंटनी के साथ दुर्ग स्थित जेल के सामने ननों को ज़मानत मिलने के बाद उनकी अगवानी करने पहुंचे.

गौर करें कि माकपा और कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल भी इस मौके पर मौजूद थे.

ऐसा माना जा रहा है कि भाजपा को डर था कि छत्तीसगढ़, जहां वह सत्ता में है, में ननों की गिरफ़्तारी से केरल में ईसाईयों तक पहुंचने के उसके प्रयासों में हुई प्रगति पर पानी फिर जाएगा.

दूसरी ओर, माकपा और कांग्रेस ने गिरफ़्तारियों का फ़ायदा उठाते हुए दावा किया कि ‘भाजपा का असली चेहरा सामने आ गया है.’

ननों को ज़मानत मिलने के बाद चंद्रशेखर ने फेसबुक पर कहा, ‘भाजपा हमेशा संकट में फंसे किसी भी मलयाली के साथ खड़ी रहेगी, चाहे वे दुनिया में कहीं भी हों, चाहे उनका धर्म, जाति या मान्यता कुछ भी हो. जब भी ज़रूरत होगी, हम आगे आकर उनकी समस्याओं के समाधान के लिए काम करेंगे. मैं उन सभी का भी धन्यवाद करता हूं, जिन्होंने पिछले कुछ दिनों में ननों की ज़मानत सुनिश्चित करने के लिए अथक परिश्रम किया.’

इस संबंध में राज्य के सामान्य शिक्षा मंत्री वी. शिवनकुट्टी ने फेसबुक पर ननों की रिहाई को ‘उत्साहजनक’ बताया और यह भी कहा कि उनकी गिरफ्तारी के पीछे राजनीतिक एजेंडा स्पष्ट है.

उन्होंने दावा किया कि यह घटना भाजपा के दोहरे मानदंडों को उजागर करती है क्योंकि वह भगवा पार्टी शासित राज्यों में अल्पसंख्यक समुदायों पर कथित अत्याचारों और उत्पीड़न पर आंखें मूंद लेती है, जबकि राजनीतिक लाभ के लिए केरल में उनके रक्षक के रूप में काम करती है.

उन्होंने भारतीय संविधान द्वारा प्रदत्त धार्मिक और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को नष्ट करने के ऐसे कथित कदमों के खिलाफ एकजुट होने का आह्वान किया.

वहीं, विपक्ष के नेता वीडी. सतीसन ने कहा कि कांग्रेस ननों का समर्थन तब तक करती रहेगी जब तक उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द नहीं हो जातीं.

उन्होंने एक बयान में कहा, ‘जब भाजपा नेता बिशपों के घर केक लेकर जा रहे थे, तो हमने उन्हें चेतावनी दी थी कि वे भेड़ की खाल में भेड़िये हैं. अब, यह हकीकत बन गया है. पादरियों को भी एहसास हो गया है कि भाजपा उन्हें धोखा दे रही है. यूडीएफ (केरल में कांग्रेस के नेतृत्व वाला विपक्षी गठबंधन) भाजपा की विभाजनकारी राजनीति के खिलाफ लड़ेगा.’

गौरतलब है कि इससे पहले 28 जुलाई को केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिख कर इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की थी.

संसद के बाहर इंडिया गठबंधन के नेताओं ने प्रदर्शन किया था. लोकसभा में भी कांग्रेस सांसद हिबी ईडन ने स्थगन प्रस्ताव का नोटिस देकर इस मामले पर चर्चा की भी मांग की थी.

मालूम हो कि नन प्रीती और वंदना को छत्तीसगढ़ धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम और अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम की धाराओं के तहत गिरफ्तार किया गया था. इनकी गिरफ्तारी बजरंग दल के एक स्थानीय कार्यकर्ता की शिकायत पर हुई थी. इन पर नारायणपुर की तीन महिलाओं का जबरन धर्म परिवर्तन कराने और उनकी तस्करी करने की कोशिश का आरोप लगाया था.