नई दिल्ली: केरल पुलिस ने दक्षिणपंथी लोगों के एक समूह द्वारा कथित तौर पर धर्म परिवर्तन के आरोप में एक पादरी को धमकी देने के मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए मामला दर्ज किया है.
समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने यह कार्रवाई बिना किसी औपचारिक शिकायत के शुरू की है.
मालूम हो कि यह मामला ऐसे समय में सामने आया है, जब केरल से दिल्ली तक छत्तीसगढ़ में दो ननों की गिरफ्तारी के बाद सियासत गरमाई है.
वायनाड पुलिस ने ताज़ा मामला सोशल मीडिया पर प्रसारित एक वीडियो के आधार पर शनिवार (2 अगस्त) को दर्ज किया है. ऐसा माना जा रहा है कि यह घटना कुछ महीने पहले हुई थी.
इस संबंध में स्थानीय मीडिया द्वारा प्रसारित फुटेज में लोगों के एक समूह को पादरी से भिड़ते और शारीरिक नुकसान पहुंचाने की धमकियां देते हुए देखा जा सकता है.
सुल्तान बाथरी पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर में कहा गया है कि आरोपियों ने धर्म परिवर्तन का आरोप लगाते हुए एक व्यक्ति को धमकाने की कोशिश की, घटना का वीडियो बनाया और समाज में मौजूद शांतिपूर्ण माहौल को बिगाड़ने के इरादे से उसे सोशल मीडिया पर प्रसारित किया.
इस मामले में बीएनएस की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है, जिनमें धारा 192 (दंगा भड़काने के इरादे से जानबूझकर उकसाना), 351 (3) (मृत्यु या गंभीर चोट पहुंचाने के लिए आपराधिक धमकी) और 3 (5) (एक ही इरादे से कई लोगों द्वारा किया गया अपराध) शामिल हैं.
पीटीआई की रिपोर्ट में कहा गया है कि सूत्रों के अनुसार, वीडियो में दिख रहे आरोपियों की पहचान के लिए जांच की जा रही है.
इस बीच छत्तीसगढ़ में मानव तस्करी और जबरन धर्म परिवर्तन के आरोप में गिरफ्तार केरल की दो ननों और एक अन्य व्यक्ति को शनिवार (2 अगस्त) को राज्य की एक विशेष अदालत से ज़मानत मिलने के बाद दुर्ग केंद्रीय जेल से रिहा कर दिया गया है.
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ननों के वकील अमृतो दास ने कहा, ‘न्यायाधीश ने यह कहते हुए ज़मानत दे दी कि उन्हें हिरासत में रखने की कोई ज़रूरत नहीं है.’
गौरतलब है कि इससे पहले शुक्रवार (1 अगस्त) को ज़मानत पर सुनवाई के बाद दास ने कहा था कि अभियोजन पक्ष ने पूछताछ के लिए तीनों की हिरासत की मांग नहीं की थी और कथित पीड़ितों को उनके घर वापस भेज दिया गया था.
उन्होंने यह भी बताया था कि कथित पीड़ित सभी वयस्क हैं और ईसाई धर्म का पालन करते हैं.
