श्रीनगर: कश्मीर में सबसे लंबे आतंकवाद विरोधी अभियानों में से एक अखाल के जंगलों में चल रहा ऑपरेशन शनिवार (9 अगस्त) को नौवें दिन भी जारी रहा. इस दौरान दो सैनिक शहीद हो गए, जबकि दो अन्य घायल हो गए.
इस संबंध में एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सेना की एक टीम ने 8 और 9 अगस्त की दरम्यानी रात दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले के अखाल जंगल में आतंकवादियों के एक संदिग्ध ठिकाने पर छापा मारा.
छापेमारी के दौरान सेना पर भारी गोलीबारी हुई और चार जवान गंभीर रूप से घायल हो गए. उन्हें पास के एक अस्पताल ले जाया गया, जहां दो जवानों की मौत हो गई, जबकि दो अन्य घायल जवानों की हालत स्थिर बताई जा रही है.
शहीद जवानों की पहचान लांस नायक प्रितपाल सिंह और सिपाही हरमिंदर सिंह के रूप में हुई है.
श्रीनगर स्थित चिनार कोर के एक प्रवक्ता ने कहा कि सेना ‘देश के लिए कर्तव्य निभाते हुए’ शहीद हुए दोनों जवानों के ‘सर्वोच्च बलिदान’ का सम्मान करती है. उनका साहस और समर्पण हमें सदैव प्रेरित करता रहेगा. भारतीय सेना गहरी संवेदना व्यक्त करती है और शोक संतप्त परिवारों के साथ एकजुटता से खड़ी है. ऑपरेशन जारी है.’
मालूम हो कि अखाल जंगल में ये ऑपरेशन 1 अगस्त को शुरू हुआ था, जब जम्मू-कश्मीर पुलिस, सेना और केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के जवानों की एक टीम ने आतंकवादियों के एक समूह की मौजूदगी की खुफिया जानकारी मिलने के बाद एक जंगली इलाके की घेराबंदी की.
शुरुआती गोलीबारी में सेना ने एक संदिग्ध आतंकवादी को मार गिराने का दावा किया, जिसकी पहचान बाद में पुलवामा जिले के राजपोरा निवासी हारिस नजीर डार के रूप में हुई. रिपोर्टों के अनुसार, बाद में मुठभेड़ में एक और आतंकवादी मारा गया.
नौ दिनों में कम से कम 10 सैन्यकर्मी घायल हो चुके हैं
अंतिम रिपोर्ट मिलने तक मुठभेड़ शुरू होने के बाद से पिछले नौ दिनों में कम से कम 10 सैन्यकर्मी घायल हो चुके हैं. इस मुठभेड़ पर जम्मू-कश्मीर पुलिस प्रमुख नलिन प्रभात और सेना के उत्तरी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा कड़ी नज़र रख रहे हैं.
खबरों के अनुसार, शुक्रवार और शनिवार की मध्यरात्रि के दौरान जंगली इलाके से भारी गोलीबारी और विस्फोटों की आवाज़ें आती रहीं, जब सेना ने पहली बार हताहत की स्थिति का सामना किया.
उल्लेखनीय है कि स्थानीय प्रशासन ने नागरिकों और पशुपालकों से जंगल से दूर रहने का आग्रह किया है, क्योंकि उन्हें आशंका है कि समूह के शेष आतंकवादी, जो अब तक सुरक्षा बलों से बच रहे हैं, विस्फोटक लगा सकते हैं.
मालूम हो कि घने जंगलों और दुर्गम पहाड़ी इलाकों वाले इस इलाके में अतिरिक्त सुरक्षा बल भेजा गया है, जिससे अभियान में देरी हुई है. साथ ही, आतंकवादियों को भागने से रोकने के लिए हेलीकॉप्टर, ड्रोन और खोजी कुत्तों को भी तैनात किया गया है.
पिछले नौ दिनों में अभियान कुलगाम ज़िले से बढ़कर दक्षिण कश्मीर के शोपियां और अनंतनाग ज़िलों के ऊपरी इलाकों तक फैल गया है, जो पीर पंजाल पर्वत श्रृंखला की तलहटी में स्थित हैं – ये 2019 के बाद जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद का एक नया केंद्र बनकर उभरा है.
सुरक्षा बलों का मानना है कि पिछले हफ़्ते अपने दो साथियों के मारे जाने के बाद भारी हथियारों से लैस और अत्यधिक कुशल आतंकवादियों का एक समूह अखाल जंगल में है.
सूत्रों के अनुसार, इस समूह में स्थानीय और विदेशी दोनों शामिल हैं, जिन्होंने आगामी स्वतंत्रता दिवस समारोह से पहले जम्मू-कश्मीर के पूरे सुरक्षा तंत्र को चौकन्ना कर रखा है.
जम्मू-कश्मीर में यह दूसरी बड़ी मुठभेड़
ज्ञात हो कि अखाल जंगल में यह अभियान जम्मू-कश्मीर में दूसरी बड़ी मुठभेड़ है, जब सुरक्षा बलों ने 28 जुलाई को पहलगाम आतंकवादी हमले के तीन आतंकवादियों को श्रीनगर के दाचीगाम के ऊंचे इलाकों में मार गिराने का दावा किया था.
दाचीगाम में यह मुठभेड़ पुंछ जिले में नियंत्रण रेखा पर दो घुसपैठियों को मार गिराए जाने के ठीक तीन दिन बाद हुई है.
गौरतलब है कि अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद के वर्षों में पाकिस्तान स्थित जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा और उनके सहयोगी आतंकवादी समूहों ने कश्मीर घाटी के चारों ओर फैले पहाड़ों और घने जंगलों को एक सक्रिय युद्धक्षेत्र में बदल दिया है.
इन क्षेत्रों में सुरक्षा बलों को भारी नुकसान हुआ है, जिसके कारण जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने इस वर्ष 22 अप्रैल को पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद पीर पंजाल पर्वत श्रृंखला, लिद्दर घाटी और सिंध घाटी को साहसिक गतिविधियों के लिए बंद कर दिया था.
कुलगाम जिले में हुई हालिया मुठभेड़ के बाद जंगल से संदिग्धों को बाहर निकालने के लिए व्यापक तलाशी अभियान शुरू किया गया है.
इससे पहले 31 जुलाई को आतंकवादियों की मौजूदगी की सूचना मिलने के बाद सुरक्षा बलों ने कुलगाम के कैमोह इलाके में घेराबंदी और तलाशी अभियान शुरू किया था. हालांकि, बाद में इस अभियान रोक दिया गया था.
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