लद्दाख को राज्य के दर्जे और छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग, सोनम वांगचुक अनशन में शामिल

लेह एपेक्स बॉडी के कई नेता लद्दाख को राज्य का दर्जा देने और उसे संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर तीन दिवसीय अनशन कर रहे हैं. गिरफ़्तारी की अफ़वाह के बीच इसमें शामिल हुए जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने कहा कि जेल जाना उनके लिए सम्मान की बात है और वे महात्मा गांधी के पदचिह्नों पर चल रहे हैं.

सोनम वांगचुक. (फोटो: वीडियो स्क्रीनग्रैब)

नई दिल्ली: लेह एपेक्स बॉडी (एलएबी) के कई नेता, जिनमें सह-अध्यक्ष चेरिंग दोरजे और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक शामिल हैं, लद्दाख को राज्य का दर्जा देने और उसे संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग के समर्थन में चल रही तीन दिवसीय भूख हड़ताल के दूसरे दिन शामिल हुए.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, दोरजे और वांगचुक रविवार को करगिल पहुंचे, इस बीच व्यापक अटकलें लगाई जा रही थीं कि उन्हें करगिल विकास प्राधिकरण (केडीए) द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शन में भाग लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी और उन्हें गिरफ्तार भी किया जा सकता है.

वांगचुक ने संवाददाताओं से कहा, ‘मैं लद्दाख के लोगों की मांगों का समर्थन करने के लिए विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए दृढ़ था. संभावित गिरफ़्तारियों की अफवाहें थीं, लेकिन मैंने उन्हें कभी गंभीरता से नहीं लिया. मैंने कभी कुछ गलत नहीं किया और हमेशा लोगों और राष्ट्र की सेवा की है.’

उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि उनकी भागीदारी का उद्देश्य करगिल और लेह के लोगों के बीच राज्य के दर्जे और आवश्यक सुरक्षा उपायों की मांग में एकता का संदेश देना था, और लद्दाख के लोगों को बांटने की कोशिश करने वालों का विरोध करना था.

वांगचुक ने कहा, ‘झूठी तारीफ के बजाय आलोचना, नेताओं को बेहतर बनाने में मदद करती है. हम सच्ची आलोचना में विश्वास करते हैं, और इसे इसी भावना से समझा जाना चाहिए. अगर वे निर्दयी हैं और हमें गिरफ़्तार करना और जेल में डालना चाहते हैं, तो हमें कोई आपत्ति नहीं है. मैंने अपना जीवन अपने देश के लिए जिया है, और मैं इसके लिए मरने को भी तैयार हूं.’

इससे पहले सभा को संबोधित करते हुए मैगसेसे पुरस्कार विजेता ने कहा कि वह चाहते हैं कि लद्दाख के उपराज्यपाल कविंदर गुप्ता यह जानें कि क्षेत्र के लोग कायर नहीं, बल्कि शांतिप्रिय हैं और संवाद में विश्वास रखते हैं.

उन्होंने कहा, ‘हम हमेशा अपने देश के लिए जीते रहे हैं, यहां तक कि पिछले युद्धों में भी अपनी जान कुर्बान की है. मेरा विनम्र अनुरोध है कि कॉर्पोरेट क्षेत्र के कुछ लोगों के लाभ के लिए इस रिश्ते का दुरुपयोग न करें.

वांगचुक ने नौकरशाही स्तर पर व्यापक भ्रष्टाचार का आरोप लगाया और दावा किया कि उनके पास इसे उजागर करने के लिए आंकड़े हैं.

करगिल जाते समय दिन में पहले वांगचुक ने एक्स पर एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने लद्दाख में स्थापित किए जा रहे एक सौर ऊर्जा संयंत्र पर अपनी चिंता व्यक्त की.

उन्होंने कहा, ‘दो हफ़्ते पहले मैंने अपने पॉडकास्ट पर सवाल उठाया था कि कैसे हमारी ज़मीन का एक बड़ा हिस्सा – लगभग 40,000 एकड़ – एक विशाल सौर संयंत्र के लिए निगमों को आवंटित किया जा रहा है. यह स्थापना 13,000 मेगावाट बिजली पैदा करेगी, जो दुनिया के सबसे बड़े सौर संयंत्र से तीन गुना ज़्यादा है.’

उद्योगपति गौतम अडानी का ज़िक्र करते हुए वांगचुक ने इशारा किया कि यह परियोजना अरबपति अडानी के पास जाने की संभावना है, जिसका स्थानीय समुदाय पर असर पड़ सकता है.

कार्यकर्ता ने कहा, ‘हालांकि मैं निश्चित रूप से नहीं कह सकता, लेकिन इस क्षेत्र के विशेषज्ञों का कहना है कि यह परियोजना लगभग निश्चित रूप से अडानी के पास जाएगी, और सबसे बुरी बात यह है कि इससे हज़ारों चरवाहों का विस्थापन हो सकता है जो दुनिया के कुछ सबसे कीमती रेशे, जैसे पश्मीना, का उत्पादन करते हैं.’

वांगचुक ने दावा किया कि न तो जनप्रतिनिधि और न ही स्थानीय जनता भूमि हस्तांतरण के विवरण से अवगत है.

उन्होंने वीडियो में कहा, ‘नवनियुक्त उपराज्यपाल सत्ता के वफ़ादार समर्थक लगते हैं शायद वे मुझे गिरफ़्तार करने की इस अफ़वाह या साज़िश पर कार्रवाई करेंगे. मैं यह स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि जेल जाना मेरे लिए सम्मान और सौभाग्य की बात है. मैंने महात्मा गांधी के पदचिह्नों पर चलना शुरू किया है.’

भूख हड़ताल स्थल पर केडीए के सह-अध्यक्ष असगर अली करबलाई ने सांसद मोहम्मद हनीफ़ा सहित अन्य सदस्यों के साथ चेतावनी दी कि अगर स्थानीय अधिकारी उनके मेहमानों को भाग लेने से रोकने की कोशिश करेंगे तो इसके परिणाम भुगतने होंगे. यह विरोध प्रदर्शन शनिवार को शुरू हुआ और सोमवार शाम को समाप्त होगा.

शनिवार को विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए हनीफ़ा ने कहा कि लद्दाख के लोग अपनी मांगों के लिए शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन कर रहे हैं और केंद्र द्वारा नई बातचीत की तारीख़ तय करने में देरी करने की रणनीति के कारण उन्हें भूख हड़ताल पर जाने के लिए मजबूर होना पड़ा है.

मालूम हो कि लंबे समय से लद्दाख में नागरिक समाज समूह राज्य का दर्जा देने लद्दाख को छठी अनुसूची में शामिल करने, लद्दाख के स्थानीय लोगों के लिए प्रशासन में नौकरी आरक्षण नीति और लेह और करगिल जिलों के लिए एक संसदीय सीट की मांग कर रहे हैं.

अनुच्छेद 244 के तहत छठी अनुसूची आदिवासी आबादी को संवैधानिक सुरक्षा प्रदान करती है और उन्हें भूमि, सार्वजनिक स्वास्थ्य और कृषि पर कानून बनाने के लिए स्वायत्त विकास परिषद स्थापित करने की भी अनुमति देती है.

इससे पहले 2024 में सोनम वांगचुक ने 21 दिन ‘जलवायु अनशन’ किया था. इसके अलावा उन्होंने लद्दाख से दिल्ली तक पदयात्रा की थी.