डायमंड वर्कर्स यूनियन का दावा- अमेरिकी टैरिफ बढ़ने के बाद सौराष्ट्र में एक लाख श्रमिकों ने नौकरी गंवाईं

गुजरात डायमंड वर्कर्स यूनियन ने बताया है कि इस साल अप्रैल से अमेरिका में दस प्रतिशत बेस टैरिफ लागू होने के बाद से राज्य के सौराष्ट्र क्षेत्र में हीरे की कटाई और पॉलिशिंग में लगे करीब एक लाख कामगारों की नौकरियां चली गई हैं. उनके मुताबिक, भावनगर, अमरेली और जूनागढ़ में स्थित छोटी इकाइयां सबसे ज़्यादा प्रभावित हैं.

प्रतिकात्मक तस्वीर. (फोटो साभार: डिलन वानर/अनस्प्लैश)

नई दिल्ली: गुजरात डायमंड वर्कर्स यूनियन (डीडब्लूयू) के उपाध्यक्ष भावेश टैंक ने बताया है कि इस साल अप्रैल से अमेरिका में दस प्रतिशत बेस टैरिफ लागू होने के बाद से सौराष्ट्र क्षेत्र में हीरे की कटाई और पॉलिशिंग में लगे करीब एक लाख कामगारों की नौकरियां चली गई हैं.

इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार, टैंक ने कहा कि पिछले 10 दिनों में जब 25% टैरिफ दर लागू होने की कवायद चल रही थी और जब 50% टैरिफ दर लागू होने का खतरा मंडरा रहा है, तो नौकरियां गंवाने वालों की संख्या और ज़्यादा बढ़ गई है.

उनके मुताबिक, भावनगर, अमरेली और जूनागढ़ में स्थित छोटी इकाइयां सबसे ज़्यादा प्रभावित हुई हैं.

कई मीडिया रिपोर्ट्स में ये भी कहा गया है कि डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा भारतीय वस्तुओं पर अत्यधिक ऊंची टैरिफ दरों की घोषणा के बाद से अमेरिका से हीरे के ऑर्डर रोक दिए गए हैं या रद्द कर दिए गए हैं.

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, जेम्स एंड ज्वेलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (जीजेईपीसी) के आंकड़ों के अनुसार 2024 में अमेरिका के कुल हीरे के आयात में भारत का हिस्सा मात्रा के हिसाब से 68% और मूल्य के हिसाब से 42% (5.79 बिलियन डॉलर) था.

उल्लेखनीय है कि जीईजेपीसी पहले से ही निर्यात में गिरावट दर्ज की है. वित्त वर्ष 2025-26 (अप्रैल-जून) की पहली तिमाही की अपनी रिपोर्ट में संस्था ने कहा था, ‘कट और पॉलिश किए हुए हीरों का कुल सकल निर्यात 2837.29 मिलियन अमेरिकी डॉलर (24270.19 करोड़ रुपये) रहा, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि के 3671.33 मिलियन अमेरिकी डॉलर (30623.29 करोड़ रुपये) की तुलना में 22.72% (-20.74% रुपये प्रति माह) की गिरावट दर्शाता है.’

ऐसे में कुल निर्यात में 20% से अधिक की गिरावट से पूरे उद्योग पर असर पड़ना तय है, और डीडब्ल्यूयू ने इस बात पर प्रकाश डाला है कि कैसे कटिंग और पॉलिशिंग का काम कम हो रहा है.

प्रति माह 15,000-20,000 रुपये कमाने वाले कर्मचारियों की नौकरी जाने का खतरा

यूनियन के अनुसार, नौकरियां गंवाने वालों में वे कर्मचारी शामिल हैं, जो प्रति माह 15,000-20,000 रुपये कमाते हैं. हालांकि, इनमें से कुछ कामगार लैब में विकसित हीरा उद्योग में शामिल हो सकते हैं, लेकिन कुल मिलाकर उनका भविष्य अनिश्चित बना हुआ है.

जीईजेपीसी के अध्यक्ष किरीट भंसाली ने डीडब्ल्यू को बताया, ‘अमेरिका हमारा सबसे बड़ा बाजार है, जिसका निर्यात 10 अरब डॉलर से ज़्यादा है – जो हमारे उद्योग के कुल वैश्विक व्यापार का लगभग 30% है. इतने बड़े पैमाने पर एकमुश्त टैरिफ इस क्षेत्र के लिए बेहद विनाशकारी है.’

भंसाली ने आगे कहा, ‘कटे और पॉलिश किए हुए हीरों के मामले में भारत का आधा निर्यात अमेरिका को ही होता है. संशोधित टैरिफ वृद्धि से पूरा उद्योग ठप पड़ सकता है, जिससे मूल्य श्रृंखला के हर हिस्से पर भारी दबाव पड़ेगा – छोटे कामगारों से लेकर बड़े निर्माताओं तक.’

गौरतलब है कि अधिकांश भारतीय वस्तुओं पर वर्तमान में अमेरिका को निर्यात किए जाने वाले 25% टैरिफ का सामना करना पड़ रहा है. इसके साथ ही राष्ट्रपति ट्रंप ने इस पर अतिरिक्त 25% जुर्माना लगाने की घोषणा की है, जो 27 अगस्त से लागू होने वाला है, जिससे कुल टैरिफ बढ़कर 50% हो जाएगा.

मालूम हो कि हीरा उद्योग उन कई श्रम-प्रधान उद्योगों में से एक है, जिन्हें इस फैसले का खामियाजा भुगतना पड़ सकता है.