यूपी: विधानसभा में सीएम आदित्यनाथ की तारीफ़ पर सपा ने विधायक पूजा पाल को पार्टी से निकाला

समाजवादी पार्टी ने 15 अगस्त को अपनी विधायक पूजा पाल को पार्टी से निष्कासित कर दिया. बीते दिनों कौशांबी के चायल से विधायक पूजा पाल ने उनके पति की हत्या के आरोपी अतीक अहमद को 'मिट्टी में मिलाने' के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की असराहना की थी.

पूजा पाल. (फोटो साभार: फेसबुक)

नई दिल्ली: समाजवादी पार्टी (सपा) ने गुरुवार (15 अगस्त) को पार्टी की विधायक पूजा पाल को पार्टी से निष्कासित कर दिया. इससे कुछ ही घंटे पहले उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अपराध के प्रति ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ नीति की सार्वजनिक रूप से प्रशंसा की थी.

यह सपा द्वारा दो महीने से भी कम समय में बागी विधायकों के निष्कासन का चौथा मामला है.

विज़न डॉक्यूमेंट 2047 पर चल रही 24 घंटे की विधानसभा बहस के दौरान कौशांबी के चायल से विधायक पूजा पाल ने अपने पति की 2005 में हुई हत्या के मामले में न्याय दिलाने के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री की सराहना की.

सपा नेतृत्व द्वारा पहले भी प्रतिद्वंद्वी पार्टी की नीतियों की प्रशंसा करने के खिलाफ चेतावनी दिए जाने के बावजूद पूजा पाल ने कहा, ‘सब जानते हैं कि मेरे पति की हत्या किसने की. मुख्यमंत्री ने मेरी बात तब सुनी जब किसी और ने नहीं सुनी. उनकी ज़ीरो टॉलरेंस नीति के कारण अतीक अहमद जैसे अपराधी मारे गए. आज पूरा राज्य उन पर विश्वास की नज़र से देखता है.’

उन्होंने कहा, ‘मेरे पति के हत्यारे अतीक अहमद को मुख्यमंत्री ने मिट्टी में मिलाने का काम किया.’

सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उसी दिन एक पत्र जारी किया, जिसमें ‘पार्टी विरोधी गतिविधियों’ और ‘गंभीर अनुशासनहीनता’ का हवाला दिया गया.

पत्र में कहा गया, ‘आपने पार्टी विरोधी गतिविधियां की हैं और चेतावनी दिए जाने के बावजूद उन्हें रोकने से इनकार कर दिया है, जिससे पार्टी को काफी नुकसान हुआ है. आपके द्वारा किया गया कार्य पार्टी विरोधी है और अनुशासनहीनता का एक बड़ा उदाहरण है. इसलिए, आपको तत्काल प्रभाव से सपा से बर्खास्त किया जाता है.’

पत्र में उन्हें पार्टी की सभी बैठकों और कार्यक्रमों में भाग लेने से भी प्रतिबंधित कर दिया गया है.

इससे पहले पार्टी ने तीन अन्य बागी सपा विधायकों – अभय सिंह, राकेश प्रताप सिंह और मनोज पांडे – को फरवरी 2024 के राज्यसभा चुनावों के दौरान भाजपा समर्थित उम्मीदवारों के पक्ष में क्रॉस-वोटिंग करने के आरोप में 21 जून को निष्कासित कर दिया गया था.

हालांकि, उस समय संभवतः जातिगत कारणों से पाल निष्कासन से बच गईं थीं.

दिवंगत बसपा विधायक राजू पाल की पत्नी पूजा पाल लंबे समय से इलाहाबाद की एक प्रमुख राजनीतिक हस्ती रही हैं. जनवरी 2005 में अपनी शादी के कुछ ही दिनों बाद राजू पाल, जब बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे थे, पूर्व विधायक अतीक अहमद से जुड़े एक गैंगस्टर ने गोली मारकर हत्या कर दी थी.

पूजा पाल ने इसके तुरंत बाद बसपा के रास्ते राजनीति में प्रवेश किया, लेकिन अतीक के भाई अशरफ अहमद के खिलाफ इलाहाबाद पश्चिम उपचुनाव हार गईं. उन्होंने 2007 और 2012 में यह सीट बरकरार रखी, लेकिन 2017 में भाजपा के सिद्धार्थ नाथ सिंह से हार गईं.

2018 में भाजपा नेता केशव प्रसाद मौर्य के साथ कथित मुलाकात के बाद मायावती द्वारा बसपा से निकाले जाने के बाद पाल 2019 में सपा में शामिल हो गईं. उन्होंने 2022 के विधानसभा चुनावों में चायल सीट जीती.

आदित्यनाथ की प्रशंसा पहली बार नहीं

13 अगस्त को विधानसभा में हुई बहस के दौरान पाल द्वारा आदित्यनाथ की प्रशंसा करना पहली बार नहीं था जब उन्होंने पार्टी लाइन पार की थी. फरवरी 2024 में वह उन सात सपा विधायकों में शामिल थीं जिन्होंने राज्यसभा चुनाव में भाजपा उम्मीदवारों का समर्थन किया था. अंदरूनी नाराज़गी के बावजूद अखिलेश ने उस समय उन्हें पार्टी से निष्कासित नहीं किया.

राजनीतिक टिप्पणीकारों का कहना है कि यह फैसला जातिगत समीकरणों पर आधारित था. जैसा कि उत्कर्ष सिन्हा ने कहा, ‘जातीय समीकरणों के कारण 2024 में पाल द्वारा क्रॉस-वोटिंग को नज़रअंदाज़ कर दिया गया. अखिलेश पाल समुदाय को अपने पाले में रखना चाहते थे.’

वरिष्ठ सपा नेता उदयवीर सिंह ने निष्कासन का सार्वजनिक रूप से बचाव करते हुए कहा, ‘पूजा के शब्द और कार्य पिछले कई वर्षों से पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचा रहे हैं. हमने उन्हें पार्टी विरोधी रुख बदलने का मौका पहले ही दे दिया था क्योंकि वह एक कमज़ोर समुदाय से आती हैं… उन्होंने अपना रुख नहीं बदला और हमें उन्हें पार्टी से निकालने के लिए मजबूर होना पड़ा.’

सिंह ने आगे आरोप लगाया कि पाल शायद ‘डर’ या भाजपा के दबाव में ऐसा कर रही थीं.

उन्होंने कहा, ‘हमने उन्हें उनकी पसंद की सीट से टिकट दिया था – हमने उन्हें उन्नाव से भी चुनाव लड़ाने की योजना बनाई थी – लेकिन उन्होंने हमें धोखा दिया.’

उन्होंने आगे कहा कि पार्टी के अंदरूनी सूत्रों को संदेह है कि उन्हें ब्लैकमेल या प्रभावित किया गया होगा.

रवैए पर क़ायम पूजा पाल

निष्कासन के बाद भी अपनी बात पर अडिग पाल ने अपनी बात का जोरदार बचाव करते हुए कहा, ‘शायद आप इलाहाबाद की उन महिलाओं की बात नहीं सुन पाए जो मुझसे भी ज़्यादा परेशान थीं. लेकिन मैं उनकी आवाज़ हूं. मुझे विधायक चुनकर विधानसभा भेजा गया है. मैं उन माताओं-बहनों की आवाज़ हूं जिन्होंने अपने प्रियजनों को खोया है.’

उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि उनकी आलोचना सपा पर नहीं, बल्कि वर्षों से चले आ रहे अन्याय को उजागर करने के लिए थी. उन्होंने कहा, ‘मैं यह बात पहले दिन से ही कहती रही हूं, जब मैं पार्टी में थी. मैं आज भी अपने बयान पर कायम हूं. मैं पहले एक पीड़ित महिला थी, पहले एक पत्नी थी.’

उन्होंने अपने व्यक्तिगत दर्द- अपने पति को खो देने की बात कहते हुए तर्क दिया कि उनका सीएम को आभार व्यक्त करना उनकी पार्टी के साथ विश्वासघात नहीं है.

वरिष्ठ पत्रकार मुदित माथुर ने पाल के निष्कासन पर लिखा, ‘यह बहुत उम्मीद थी कि एक दिन अखिलेश उन्हें अपनी पार्टी से निकाल देंगे. उनका मानना है कि हर पार्टी को धोखा खाने वालों को निकालने का अधिकार है, लेकिन अखिलेश को उन्हें सीधे पार्टी से निकालने से पहले कारण बताओ नोटिस देना चाहिए था.’

माथुर ने इस बात पर जोर दिया कि आंतरिक अनुशासन को उचित प्रक्रिया से अलग नहीं रखा जाना चाहिए.

इसी तरह उत्कर्ष सिंह ने बताया कि सपा के पास अब पाल समुदाय से एक वैकल्पिक नेता – प्रदेश अध्यक्ष श्यामलाल पाल – है, जिससे पार्टी को एक महत्वपूर्ण वोट बैंक के छिटकने के डर के बिना कार्य करने की गुंजाइश मिल गई है.

वहीं, उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और भाजपा से जुड़े ब्रजेश पाठक ने सपा पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने आरोप लगाया, ‘पूरे सदन ने सर्वसम्मति से स्वीकार किया है कि समाजवादी पार्टी की नीति महिला विरोधी है. यह उनकी घटिया सोच को दर्शाता है.’

पूजा पाल का बचाव करते हुए उन्होंने कहा कि आदित्यनाथ के शासन के प्रति उनकी कृतज्ञता निष्कासन के लायक नहीं है.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.)