फिल्मकार आनंद पटवर्धन को मुंबई विश्वविद्यालय में प्रवेश से रोका गया

बीते महीने अभिनेता नसीरुद्दीन शाह का कार्यक्रम रद्द करने के बाद अब मुंबई विश्वविद्यालय में वरिष्ठ फिल्मकार आनंद पटवर्धन को परिसर में प्रवेश से वंचित किए जाने की ख़बर आई है. पटवर्धन ने कहा कि ऐसा क्यों किया गया, इसका कोई उचित कारण नहीं बताया गया. हालांकि, विश्वविद्यालय ने इस बात से इनकार किया कि पटवर्धन को विशेष रूप से प्रतिबंधित किया गया था.

(फोटो साभार: सोशल मीडिया/फेसबुक)

नई दिल्ली: पिछले महीने फरवरी की शुरुआत में जाने-माने अभिनेता नसीरुद्दीन शाह ने बताया था कि मुंबई यूनिवर्सिटी ने उन्हें एक उर्दू संबंधित कार्यक्रम में बुलाया था. लेकिन ऐन मौके पर उनको दिया न्योता वापस ले लिया गया. उन्होंने अपने इस अनुभव को अपमानजनक और निराशाजनक दोनों करार दिया था.

अब एक बार फिर मुंबई विश्वविद्यालय में सुर्खियोंं में है, क्योंकि वरिष्ठ फिल्मकार आनंद पटवर्धन की ओर से भी कुछ ऐसे ही आरोप सामने आए हैं, जिसमें उन्होंने खुद को विश्वविद्यालय में प्रवेश से वंचित करने की बात कही है.

हिंदु्स्तान टाइम्स की ख़बर के मुताबिक, बीते शनिवार (28 फरवरी) को वृत्तचित्र फिल्मकार आनंद पटवर्धन को मुंबई विश्वविद्यालय के कलीना परिसर के मुख्य द्वार पर रोक दिया गया, जब वे धरने पर बैठे एक पूर्व छात्र भदंत विमंसा का समर्थन करने वहां पहुंचे थे.

उल्लेखनीय है कि भंदत विमंसा, जिनका पूर्व नाम राजेश बलखंडे था, एक पूर्व शोधार्थी हैं, जिनका पीएचडी में प्रवेश 2023 में निर्धारित समय सीमा से अधिक समय लेने के कारण रद्द कर दिया गया था. वे वर्तमान में परिसर के अंदर धरना दे रहे हैं और पाली भाषा विभाग के लिए सरकारी अनुदान और लड़कों के छात्रावास के नवीनीकरण सहित अन्य मुद्दों की मांग कर रहे हैं.

मालूम हो कि आनंद पटवर्धन शासन-प्रशासन और राजनीतिक विषयों पर बात करने वाली फिल्मों के लिए मशहूर हैं. ऐसे में विश्वविद्यालय परिसर में उनके प्रवेश को वर्जित करने को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया देखने को मिली है.

यह घटना के संबंध में सामाजिक कार्यकर्ता लोकशाहिर संदेश गायकवाड़ ने सोशल मीडिया पर कहा कि इस घटनाक्रम से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार को लेकर चिंताएं पैदा होती हैं.

उन्होंने एक वरिष्ठ फिल्मकार को प्रवेश से वंचित किए जाने को ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ बताया और कहा कि विश्वविद्यालय को अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए.

अखबार से बात करते हुए आनंद पटवर्धन ने कहा कि उन्हें परिसर में प्रवेश से क्यों रोका गया, इसका कोई उचित कारण नहीं बताया गया. अंततः विश्वविद्यालय के गेट पर उनकी मुलाकात भदंत विमंसा से हुई, उन्होंने एकजुटता के प्रतीक के रूप में उन्हें एक गुलाब भेंट किया और उनके स्वास्थ्य के बारे में पूछा.

हालांकि, विश्वविद्यालय ने इस बात से इनकार किया कि पटवर्धन को विशेष रूप से प्रतिबंधित किया गया था.

एक आधिकारिक बयान में प्रशासन ने कहा है कि उन्हें पर्टवर्धन के प्रस्तावित दौरे की जानकारी नहीं थी और यदि प्रशासन को सूचित किया गया होता तो वह औपचारिक रूप से उनका स्वागत करते और अपना पक्ष स्पष्ट करते.

विश्वविद्यालय ने चल रहे विरोध प्रदर्शन को ‘अवैध’ और संभावित सुरक्षा खतरा बताते हुए कहा कि कलीना परिसर में 5,000 से अधिक स्नातकोत्तर छात्र अध्ययनरत हैं, जहां अंतरराष्ट्रीय छात्रों के आवास, संकाय सदस्यों के आवास और प्रशासनिक कार्यालय भी स्थित हैं. ऐसे में अवैध रूप से आयोजित इस धरने से उत्पन्न कानून-व्यवस्था संबंधी चिंताओं के कारण प्रवेश की अनुमति देने से पहले सभी संबंधित व्यक्तियों से पूछताछ की जा रही है.