नई दिल्ली: बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और बिहार विधानसभा के नेता विपक्ष तेजस्वी यादव ‘वोटर अधिकार यात्रा’ निकाल रहे हैं. ये यात्रा हाल ही में राहुल गांधी द्वारा लगाए गए ‘वोट चोरी’ और चुनाव आयोग पर सत्तारूढ़ दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ सांठगांठ के आरोपों से जुड़ी है.
हालांकि, राहुल गांधी के आरोपों को चुनाव आयोग ने भले ही ख़ारिज कर दिया हो, और मीडिया का एक वर्ग ये दावा भी कर रहा हो कि इस मुद्दे पर कांग्रेस को विपक्ष का साथ नहीं मिला, लेकिन वास्तव में इस मसले ने ने बिखरे हुए विपक्ष को एक मंच पर लाने का और लामबंद करने का काम किया है.
मालूम हो कि 24 जून को भारतीय चुनाव आयोग ने एक आदेश जारी कर बिहार के करीब आठ करोड़ मतदाताओं को मतदाता सूची में बने रहने के लिए 25 जुलाई तक ‘गणना फॉर्म’ भरकर जमा करने को कहा था. इसके बाद आयोग ने बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर)की प्रक्रिया शुरू की, जिसकी ड्राफ्ट सूची अगस्त के शुरुआत में आने के बाद विपक्षी दलों ने इसे संसद से सड़क तक एक बड़ा मुद्दा बनाया और विपक्ष एकजुट नज़र आया.

विपक्ष के तमाम नेताओं का सड़कों पर प्रदर्शन
संसद के मानसून सत्र के दौरान बीते 11 अगस्त को विपक्ष के तमाम नेताओं का हुजूम सड़कों पर नज़र आया. पुलिस ने भले ही चुनाव आयोग तक के इस मार्च को बीच में ही रोक दिया लेकिन विपक्ष ने अपनी ऊर्जा से दिखा दिया कि इस मुद्दे को लेकर लड़ाई बड़ी होने वाली है.
मालूम हो कि कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने 7 अगस्त को एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में आरोप लगाया था कि निर्वाचन आयोग द्वारा चुनावों के दौरान मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर धांधली की गई है.
उन्होंने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव और बेंगलुरु सेंट्रल लोकसभा क्षेत्र की महादेवपुरा विधानसभा सीट पर बड़े पैमाने पर वोट में गड़बड़ी के आरोप लगाए थे.
राहुल गांधी ने ये भी कहा था कि आयोग द्वारा मशीन द्वारा रीडेबल फ़ॉर्मेट में मतदाता सूची उपलब्ध कराने से इनकार करने के बाद विपक्ष को यह विश्वास हो गया है कि निर्वाचन आयोग ने महाराष्ट्र में चुनाव ‘वोट चोरी’ के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ मिलीभगत की है.
पहले भी लगाये हैं विपक्ष ने चुनाव आयोग पर सवाल
उल्लेखनीय है कि ये पहली बार नहीं है, जब वोटर लिस्ट में धांधली और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) को लेकर सवाल उठे हों, इससे पहले भी दिल्ली विधानसभा चुनाव से लेकर 2024 लोकसभा चुनाव और उससे पहले तमाम चुनावों में ये मुद्दा बार-बार उठता रहा है.
इस साल की शुरुआत में दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने आरोप लगाया था कि नई दिल्ली विधानसभा सीट पर बड़ी संख्या में फर्जी वोटरों को जोड़ा जा रहा है. इस संबंध में उन्होंने चुनाव आयोग से पत्र के माध्यम से शिकायत भी की थी.
इससे पहले दिसंबर 2024 में बीजू जनता दल (बीजद) ने ओडिशा में डाले गए मतों और मतगणना में अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए चुनाव आयोग का दरवाजा खटखटाया था, जहां 2024 में लोकसभा और विधानसभा के लिए एक साथ चुनाव हुए थे.
चुनाव आयोग से पार्टी को दो जवाब मिले, लेकिन मंगलवार (19 अगस्त) को आयोग के साथ एक बैठक के बाद बीजद ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग उनके सवालों के ‘जवाब देने में विफल रहा.’
बीते साल महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव को लेकर भी कांग्रेस के महाराष्ट्र नेतृत्व ने 29 नवंबर को निर्वाचन आयोग को एक ज्ञापन सौंपकर राज्य में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों में गड़बड़ी का आरोप लगाया था. इस ज्ञापन में चुनाव से पहले कथित तौर पर मनमाने ढंग से मतदाताओं को हटाने और जोड़ने के साथ ही मतदान के दिन शाम 5:30 बजे से रात्रि 11:30 बजे तक मतदान के आंकड़ों में तेज वृद्धि पर चिंता जताई गई थी.
इसी तरह पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा मतदाता पहचान पत्र (ईपीआईसी) कार्डों की नकल का मुद्दा उठाए जाने के एक महीने बाद मार्च में तृणमूल कांग्रेस ने चुनाव आयोग का रुख किया था. हालांकि, पार्टी के अनुसार यह मामला अभी तक अनसुलझा है.
इस संबंध में भाजपा ने भी चुनाव आयोग से मुलाकात की थी और पश्चिम बंगाल की मतदाता सूचियों में डुप्लीकेट ईपीआईसी नंबरों का मुद्दा उठाया था और ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी सरकार पर बिना दस्तावेज़ वाले बांग्लादेशी और रोहिंग्या लोगों को पनाह देने और उन्हें मतदाता सूचियों में शामिल करने का आरोप लगाया था.

भाजपा ने भी मतदाता सूचियों में भी हेराफेरी का मुद्दा उठाया था
आज भाजपा भले ही चुनाव आयोग के साथ खड़ी नजर आये, लेकिन इस पार्टी ने पश्चिम बंगाल के अलावा अन्य जगहों और लोकसभा चुनाव की मतदाता सूचियों में भी हेराफेरी का मुद्दा उठाया है.
भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने रायबरेली, वायनाड, डायमंड हार्बर और कन्नौज में मतदाता सूचियों में अनियमितताओं का आरोप लगाया और राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, अभिषेक बनर्जी और अखिलेश यादव से लोकसभा सांसद पद से इस्तीफा देने की मांग की.
हालांकि, चुनाव आयोग ने अभी तक अनुराग ठाकुर से हलफनामा नहीं मांगा है, और मुख्य चुनाव आयुक्त ने इस पर टिप्पणी करने से भी इनकार कर दिया है कि भाजपा सांसद से हलफनामा क्यों नहीं मांगा गया.
मालूम हो कि 2017 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के बाद इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) पर सवाल उठे थे.
2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि चुनाव आयोग ‘मॉडल कोड ऑफ़ कंडक्ट’ को सही से लागू नहीं कर रहा है.
साल 2009 के चुनाव परिणामों में कांग्रेस (यूपीए) की जीत के बाद वरिष्ठ भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी ने ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए थे.
इस मामले को लेकर 2010 में भाजपा नेता जीवीएल नरसिम्हा राव ने ईवीएम पर ‘डेमोक्रेसी एट रिस्क! कैन वी ट्रस्ट अवर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन्स?’ शीर्षक से किताब लिखी थी, जिसकी प्रस्तावना लालकृष्ण आडवाणी ने लिखी थी.
कुल मिलाकर ऐसा पहली बार नहीं है, जब चुनाव आयोग सवालों के घेरे में है. कई बार चुनावों के बाद कई दलों इस मुद्दे को उठाया है, लेकिन इस बार राहुल गांधी के ‘वोट चोरी’ के आरोप ने ठंडे पड़ चुके विपक्ष को एकजुट कर संघर्ष में झोंक दिया है.
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