बिहार में राहुल-तेजस्वी की ‘वोटर अधिकार यात्रा’: विपक्ष की नई शुरुआत

दरभंगा में 'वोटर अधिकार यात्रा' के दौरान राहुल गांधी ने भाजपा के 50 साल तक सत्ता में बने रहने वाले बयान की आलोचना की और ‘वोट चोरी’ का आरोप लगाया. वहीं जातिगत जनगणना और आरक्षण के मुद्दों को भी उठाया.

‘वोटर अधिकार यात्रा’ ने देश और राज्य की सियासत के बारे में लोगों को अलग तरह से सोचने पर मजबूर ज़रूर कर दिया है, और बात अब सिर्फ़ मताधिकार तक सीमित नहीं रही. (फोटो साभार: फेसबुक/@tejashwiyadav)

दरभंगा: बुधवार (27 अगस्त), बिहार में राहुल गांधी और तेजस्वी यादव के नेतृत्व वाली ‘वोटर अधिकार यात्रा’ का 10वां दिन. तय कार्यक्रम के अनुसार, दरभंगा के मनीगाछी प्रखंड के अंतर्गत नेशनल हाईवे-27 स्थित राजे टोल प्लाजा से 3:30 बजे महागठबंधन के क़ाफ़िला को दरभंगा में प्रवेश करना है.

ऐसे में शिद्दत की धूप में दोपहर के 2 बजे से ही राहुल-प्रियंका की एक झलक पाने को बेताब बच्चे, बुज़ुर्ग और नौजवानों की भीड़ हाईवे पर जमा होने लगी है.

राजद, वीआईपी और कांग्रेस कार्यकर्ता ‘वोट चोर-गद्दी छोड़’ का नारा लगा रहे हैं, भाकपा-माले के भी कुछ बुज़ुर्ग कार्यकर्ता किसी सिपाही की तरह यहां तैनात हैं.

पार्टी झंडा और बैनर-पोस्टर का सिलसिला दूर तक नज़र आ रहा है, लेकिन मुकेश सहनी की विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) अपने अलग ख़ेमे में भीड़ और नारेबाज़ी के मामले में गठबंधन की दूसरी पार्टियों पर सबक़त लेती नज़र आ रही है.

पार्टी कार्यकर्ता कहते हैं, ‘सब साथ हैं और हमारा लक्ष्य एक ही है लोकतंत्र की रक्षा. वोट हमारा अधिकार है और हम इसे किसी को छीनने नहीं देंगे…’

हालांकि, जब द वायर ने इस ख़ेमे को समझने की कोशिश की तो बताया गया कि मुकेश सहनी की डिप्टी सीएम पद की ‘दावेदारी और मांग’ के बाद इसको ‘प्रेशर पॉलिटिक्स’ की तरह ही देखा जाना चाहिए.

लोगों की मानें तो मुकेश सहनी का संदेश साफ़ है और वो कहीं न कहीं विशेष तौर पर राजद को इस ‘शक्ति प्रदर्शन’ के माध्यम से बताना चाहते हैं कि उन्हें न सिर्फ अधिक सीटें (60 सीटों की बात कही जा रही है) चाहिए, बल्कि डिप्टी सीएम के तौर पर सत्ता में बड़ी हिस्सेदारी भी चाहिए.

‘वोटर अधिकार यात्रा’ में विकासशील इंसान पार्टी के समर्थक. (रैली के सभी फोटो: फ़ैयाज़ अहमद वजीह)

राजे टोल प्लाजा पर इस अदृश्य तनाव के बीच महागठबंधन की पार्टियों में ख़ेमेबाज़ी के अलावा सबसे ज़्यादा नोटिस में आने वाली बात ये है कि राजद अपने गढ़ के इस प्रखंड में ‘वोटर अधिकार यात्रा’ के लिए लोगों को बड़े पैमाने पर घर से बाहर नहीं निकाल सकी है, जबकि वीआईपी उम्मीद के बरअक्स अपनी एकता का बढ़ चढ़कर मुज़ाहरा कर रही है.

ये आने वाले दिनों में साफ़ होगा कि महागठबंधन की पार्टियों में चुनाव से पहले सीएम फेस, डिप्टी सीएम की दावेदारी और सीट बटवारे को लेकर कैसी उठापटक होने वाली है?

पार्टी कार्यकर्ताओं से अलग कुछ लोग आपस में मैथिली में बातें कर रहें हैं, ‘मोदी लग एके टा हथियार बचल अछि, राशन दियौ आ जनता कें गुलाम बना क राखु. देश कें बर्बादीक कगार पर पहुंचा देने अछि. एखन वोटर लिस्ट सं नाम कटा रहल छथि, आ आगां की होएत, से कहब कठिन अछि…’

इनकी बातें जारी हैं;

‘…यदि नागरिक अपन अधिकार कें अनुदानक थैली सं बदलैत रहत, तं निश्चित अछि जे देश में अपन स्वाभिमान आ भविष्य दुनू गुमाएत. लोकतंत्रक जगह ‘राशनतंत्र’ ठाड़ भ’ जायत….’

(‘मोदी का एक ही हथियार है राशन दो और ग़ुलाम बनाकर रखो. देश को बर्बाद कर दिया, आज नाम काट रहा है कल जाने क्या करेगा… अगर नागरिक अपने अधिकारों का सौदा अनुदानों के थैलों के लिए करते रहेंगे, तो देश निश्चित रूप से अपनी गरिमा और भविष्य दोनों खो देगा. लोकतंत्र की जगह ‘राशनतंत्र’ ले लेगा.)

ऐसी बातों के बीच द वायर के एक सवाल के जवाब में राहुल गांधी की ‘यात्रा’ में शामिल होने पहुंचे अरुण दास कहते हैं, ‘इस यात्रा में लोगों को अपने लिए उम्मीद नज़र आ रही है, इसे बिहार चुनाव में बदलाव के माध्यम के तौर पर देखा जा रहा है. लोग त्रस्त हैं, इसलिए यात्रा इतनी सफल हो रही है, अब देख लीजिए बिहार में क्राइम कहां से कहां पहुंच गया है, महंगाई कहां चली गई. गैस सिलेंडर घर में ख़ाली पड़ा है…’

राजद अपने गढ़ के प्रखंड मनीगाछी में ‘वोटर अधिकार यात्रा’ के लिए लोगों को बड़े पैमाने पर घर से बाहर नहीं निकाल सकी.

दरअसल, इस ‘यात्रा’ को देखने आए लोग जहां बिहार में सरकार के बदलाव की बात कर रहे हैं, वहीं चुनाव आयोग के स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न (एसआईआर) के साथ ही जनता को हर तरह के अधिकारों से वंचित करने की कहानी भी एक दूसरे को सुना रहे हैं.

यूं देखा जाए तो इस ‘वोटर अधिकार यात्रा’ ने देश और राज्य की सियासत के बारे में लोगों को अलग तरह से सोचने पर मजबूर ज़रूर कर दिया है, और बात अब सिर्फ़ मताधिकार तक सीमित नहीं रही. शायद एसआईआर में गड़बड़ी के बहाने विपक्षी दलों की सड़कों की सियासत ने लोगों के दिल में जगह बना ली है.

बहरहाल, अब राजे टोल प्लाजा पर शाम के 6:21 होने को आए हैं, अचानक से गहमागहमी बढ़ गई है और आसमान चीरते नारों में राहुल-तेजस्वी का आगमन हो रहा है, अभी प्रियंका नज़र नहीं आ रही हैं…

नौजवान अपने प्रिय नेता से हाथ मिलाने के लिए दौड़े चले जा रहे हैं, और अपने स्मार्ट-फोन में किसी तरह से तस्वीर लेने में कामयाब होने के बाद प्रफुल्लित हुए जा रहे हैं.

गाड़ी धीरे-धीरे आगे बढ़ रही है, राहुल-तेजस्वी अपने चिरपरिचित अंदाज़ में हाथ हिला रहे हैं. ठीक पीछे पप्पू यादव की गाड़ी नज़र आ रही है, नौजवान उसी जोश-ओ-ख़रोश के साथ उनकी तरफ़ भी लपक रहे हैं. पूरा टोल प्लाजा नारों से गूंज रहा है…. ‘वोट चोर-गद्दी छोड़…’

क़ाफ़िला बढ़ रहा है, अगला पड़ाव सकरी है.

टोल प्लाजा से निकलते ही एहसास होता है कि जैसे हम कांग्रेस के गढ़ में हैं, बड़ी-बड़ी होर्डिंग्स और सिर्फ राहुल-प्रियंका और खरगे के बड़े-बड़े कटआउट मानो आसमान को छूने को आतुर हों.

यहां से ये यात्रा सिर्फ कांग्रेस और राहुल की यात्रा लग रही है.

इस तरफ़ औरतें भी बड़ी तादाद में मौजूद हैं. हालांकि शाम ढल चुकी है.

रैली में बुलडोज़र पर चढ़कर पहुंचे लोगों ने भी ध्यान खींचा.

दरअसल, सकरी की तरफ कारवां के साथ सड़क के दोनों तरफ़ नुमायां तौर पर एक थीम जैसा कुछ नज़र आ रहा है, अब चाहे मल्लिकार्जुन खरगे का विशालकाय कट-आउट हो या फिर राहुल-प्रियंका के कट-आउट.

यहां शायद ये संदेश देने की कोशिश नज़र आ रही है कि कांग्रेस अपने दशकों पुराने किले में न सिर्फ नई सांस के साथ जिंदा है बल्कि उसके युवा कार्यकर्ता भी सड़कों पर मुस्तैद हैं.

इस बारे में लोगों को टटोलने पर लगा कि लोग राहुल की सियासत को समझ रहे हैं और उनको अपने नेता के तौर पर क़ुबूल कर रहे हैं.

सकरी में उमड़े जनसैलाब के सामने तेजस्वी यादव, दीपंकर भट्टाचार्य, प्रियंका गांधी, राहुल गांधी और दूसरे नेताओं ने अपनी बात रख रहे हैं.

राहुल गांधी जहां भाजपा के 50 साल तक सत्ता में बने रहने वाले बयान की आलोचना कर रहे हैं और ‘वोट चोरी’ का आरोप लगा रहे हैं, वहीं जातिगत जनगणना और आरक्षण के मुद्दों पर भी लोगों को ख़ुद से कनेक्ट कर रहे हैं, जबकि प्रियंका ‘वोट चोर-गद्दी छोड़’ का ज़ोरदार नारा लगवा रही हैं. वो कह रही हैं,‘वोट आपकी पहचान है, आपकी नागरिकता का आधार है, अगर आप वोट चोरी होने देंगे तो आपकी कोई पहचान नहीं रहेगी, आपके सारे अधिकार छिन जाएंगे और आपकी नागरिकता छिन जाएगी…’

लोग बीच-बीच में अपने नारों से प्रियंका की बातों का समर्थन कर रहे हैं. वो कह रही हैं, ‘नरेंद्र मोदी ने लोकसभा चुनाव में कहा था कांग्रेस आपकी भैंस चुरा लेगी. लेकिन वो ख़ुद आपका वोट चुरा रहे हैं…’

सकरी में इस जनसैलाब के बीच कई जगहों पर ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन का पोस्टर उठाए कुछ नौजावान मांग करते नज़र आ रहे हैं कि ‘महागठबंधन में एआईएमआईएम को शामिल करो और साथ में चुनाव लड़ो.’ इन नौजावानों ने राहुल-प्रियंका के सामने भी अपना विरोध दर्ज करने की कोशिश की है.

विपक्ष की ‘वोटर अधिकार यात्रा’ में एआईएमआईएम को महागठबंधन में शामिल करने की मांग वाले पोस्टर नज़र आए.

इस बाबत पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आदिल हसन आज़ाद ने द वायर को फोन पर बताया, ‘बिहार में जहां भी राहुल जी कि यात्रा जा रही है, एआईएमआईएम के कार्यकर्ता और अवाम उनसे कह रही है. ये उनका अपना फैसला है, हमने प्रोजेक्ट नहीं किया है. ये अवाम की चाहत है, अवाम चाहती है कि एआईएमआईएम को भी गठबंधन में शामिल किया जाए, जब हम तेलंगाना में कांग्रेस के साथ काम कर सकते हैं तो बिहार में जब हमारी इतनी बड़ी आबादी है तो हमारी पार्टी से परहेज़ क्यों है. हम हर मुद्दे में आपके साथ रहते हैं तो फिर हमारे लिए ऐसी नकारात्मकता क्यों है.’

आज़ाद ने ये भी बताया कि, ‘हम अपनी तरफ से कोशिश कर चुके हैं, सबको पत्र लिख चुके हैं. लेकिन मुझे लगता है कि राजद नहीं चाहती है कि हम गठबंधन का हिस्सा बनें. कांग्रेस के साथ तो हम तेलंगाना में काम कर चुके हैं. राजद मुसलमानों और सीमांचल को हिस्सा नहीं देना चाहती. हमने कोई शर्त भी नहीं रखी और आपने भाजपा के साथ रहने वालों को भी अपने साथ ले लिया जबकि एआईएमआईएम तो क़यामत तक भाजपा के ख़िलाफ़ है, फिर हमसे इतना परहेज़ क्यों.’

वो अपील करते हैं, ‘हमारी आज भी कांग्रेस-राजद से यही अपील है कि मिलकर चुनाव लड़िए. आप सबक नहीं लेना चाहते तो क्या कहा जाए. हम अलग लड़ेगे तो जीत आपके हिस्स्से में भी नहीं आएगी. मिलकर नहीं लड़ने का मतलब है आप भाजपा का फ़ायदा करना चाहते हैं. महागठबंधन हमारे साथ आए मिथिलांचल-सीमांचल में भाजपा का खाता नहीं खुलेगा.’

ऐसी ही बातें कहते हुए राज्य में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान कहते हैं, ‘हमने घटक दल की तमाम पार्टियों से कहा कि सेक्युलर वोटों को बिखराव से रोका जाना चाहिए, और गठबंधन में हमारी पार्टी को शामिल किया जाना चाहिए. लेकिन इन लोगों ने हमारे प्रस्ताव को संजीदगी से नहीं लिया. अब पार्टी के हमदर्द लोग विरोध कर रहे हैं. हम वैचारिक तौर पर 5 साल इनके साथ रहे, हमारे चार एमएलए इन्होंने तोड़ लिए, इसके बाद भी हम इनकी हिमायत करते रहे. आज भी सीने पर पत्थर रखकर कहते हैं कि बिहार में सेकुलरिज्म कमज़ोर न पड़े इसलिए गठबंधन होना चाहिए. उसी का असर अवाम पर है. हम कोशिश कर चुके हैं अब यात्रा में लोग प्रोटेस्ट कर रहे हैं तो ‘नविश्ता-ए-दीवार’ इन लोगों को ख़ुद पढ़ना चाहिए.’

ऐसे में बड़ा सवाल है कि क्या एआईएमआईएम को महागठबंधन में शामिल न करके विपक्ष कोई ग़लती कर रहा है?

इसका जवाब भले ही फ़िलहाल स्पष्ट तौर पर न दिया जा सके, लेकिन ऐसा माना जा रहा है कि सीमांचल के अलावा अब मिथलांचल में भी पार्टी की सक्रियता काफ़ी बढ़ गई है. और इसका असर चुनावी नतीजों पर पड़ सकता है.

रैली में महिलाओं की भी मौजूदगी रही.

बहरहाल, राजे टोल प्लाजा से जीवछ घाट तक 19-20 किलोमीटर की यात्रा के दौरान जहां लोगों का हुजूम और उनकी उत्सुकता देखने लायक़ थी, वहीं इस छोटी सी यात्रा में राज्य की राजनीति के कई पहलू भी सामने आ रहे थे.

हालांकि, कांग्रेस के लिए नई ऊर्जा नज़र आई और ऐसी बातें भी सुनी गई कि अब कांग्रेस को बिहार में अपना खोया हुआ क़िला हासिल करने की कोशिश करनी चाहिए.

रैली के दौरान बुलडोज़र में बैठे लोग.

अब यात्रा अपने अंतिम पड़ाव में है, कारवां अदलपुर और मुरिया में सड़क किनारे उमड़े जनसैलाब से संवाद करता हुआ बढ़ रहा है, बच्चे, बुज़ुर्ग और औरतें के चेहरे उम्मीद के किसी चराग़ की तरह जल रहे हैं और जीवछ घाट उच्च विद्यालय के समीप 8:30 बजे के करीब ‘यात्रा’ के समापन से ठीक पहले बुलडोज़र से पुष्प की वर्षा का नज़ारा एक बार फिर नफ़रत की सियासत के ख़िलाफ़ एक बड़ा पैग़ाम दे रहा है, कोलतार की सड़कें यहां भी काली नहीं हैं…