पुलिस थानों से गवाही देने की अनुमति देने वाली अधिसूचना पर रोक के बाद वकीलों की हड़ताल ख़त्म

दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना द्वारा पारित अधिसूचना के तहत जांच अधिकारियों और अन्य गवाहों को पुलिस थानों से गवाही देने की अनुमति दी गई थी. दिल्ली के वकील पिछले एक सप्ताह से इसका विरोध कर रहे थे. उनका तर्क है कि इससे न्यायिक प्रक्रिया बाधित हो सकती है और मुकदमे की कार्यवाही की शुचिता प्रभावित हो सकती है.

दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना द्वारा जारी उस आदेश के खिलाफ हड़ताल के दौरान वकील नारे लगाते हुए, जिसमें पुलिस को थानों से अदालतों में वर्चुअल तरीके से गवाही देने की अनुमति दी गई थी. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी में वकीलों की एक सप्ताह से चली आ रही हड़ताल गुरुवार (28 अगस्त) को दिल्ली पुलिस के इस आश्वासन के बाद समाप्त हो गई कि पुलिस अधिकारियों को पुलिस थानों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए अदालतों में गवाही देने की अनुमति देने वाली अधिसूचना पर रोक लगा दी गई है.

पिछले हफ़्ते शहर भर के वकीलों ने हड़ताल शुरू की थी, जो बुधवार को और बढ़ गई. वे उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना द्वारा पारित उस अधिसूचना का विरोध कर रहे थे, जिसके तहत जांच अधिकारियों और अन्य गवाहों को पुलिस थानों से गवाही देने की अनुमति दी गई थी.

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, इस कदम का विरोध कर रहे वकीलों का तर्क था कि इससे न्यायिक प्रक्रिया बाधित हो सकती है और मुकदमे की कार्यवाही की शुचिता प्रभावित हो सकती है.

दिल्ली पुलिस आयुक्त सतीश गोलचा ने एक बयान में कहा, ‘सभी हितधारकों की बात सुनने के बाद उक्त अधिसूचना को जमीनी स्तर पर लागू किया जाएगा.’

रिपोर्ट में कहा गया है कि यह घोषणा बार एसोसिएशनों के सदस्यों द्वारा केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधिकारियों से मुलाकात के बाद की गई.

एक पुलिस प्रवक्ता ने बताया कि सभी हितधारकों के साथ विचार-विमर्श पूरा होने तक अधिसूचना स्थगित रहेगी. उन्होंने आगे कहा, ‘केंद्रीय गृह मंत्री इस मुद्दे पर खुले मन से चर्चा करने के लिए बार एसोसिएशनों के प्रतिनिधियों से मिलेंगे.’

रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली के सभी जिला न्यायालय बार एसोसिएशन ने क्रमशः 18 और 20 अगस्त को दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और उपराज्यपाल सक्सेना को पत्र लिखा है.

वकीलों की हड़ताल ने शहर भर की अदालती कार्यवाही को प्रभावित किया है और यहां तक कि अभियोजकों को भी सुनवाई में भाग लेने से रोका गया है.

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसलों में वकीलों की हड़ताल को अवैध और अनैतिक माना है क्योंकि ये न्याय में बाधा डालती हैं और लोगों की अदालतों तक पहुंच को प्रभावित करती हैं.