नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 11 अगस्त को नई दिल्ली के प्रमुख मार्ग, बाबा खड़क सिंह मार्ग पर सांसदों के लिए एक नए आवासीय परिसर का उद्घाटन किया. खबरों में बताया गया है कि इस आवासीय परिसर में चार टावर हैं, जिनका नाम चार भारतीय नदियों के नाम पर रखा जाएगा, प्रत्येक टावर 25 मंजिला और इसमें सांसदों के लिए कुल 184 फ्लैट हैं.
द मिंट ने कहा, ‘ये फ्लैट आत्मनिर्भर बनाने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं, खासकर उन सांसदों के लिए जो लुटियंस दिल्ली में बंगलों की चाहत रखते हैं.’
प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी) ने 10 अगस्त को जारी एक प्रेस नोट में कहा था कि 5,000 वर्ग फुट के इन फ्लैटों में ‘आधुनिक सुविधाओं की पूरी श्रृंखला’ और हाई-स्पीड लिफ्टों के साथ उनके कार्यालय के साथ-साथ निवास के लिए भी जगह होगी.
पीआईबी ने कहा, ‘सांसदों के लिए पर्याप्त आवास की कमी के कारण इस परियोजना का विकास आवश्यक हो गया था. भूमि की सीमित उपलब्धता के कारण भूमि उपयोग को अनुकूल बनाने और रखरखाव लागत को कम करने के उद्देश्य से वर्टिकल हाउसिंग विकास पर निरंतर ज़ोर दिया गया है.’
हालांकि, सरकारी प्रेस विज्ञप्ति में इन फ्लैटों की लागत और किस फर्म को ठेका दिया गया है, इसका उल्लेख नहीं किया गया, लेकिन केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय द्वारा 13 अगस्त को सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत दिए गए जवाब में कहा गया है कि यह परियोजना 477 करोड़ 55 लाख रुपये से भी अधिक की भारी लागत से पूरी हुई है – यानी सटीक रूप से 4,77,55,88,965 रुपये.
आरटीआई आवेदक अजय बासुदेव बोस ने द वायर के साथ मंत्रालय की जानकारी साझा करते हुए कहा, ‘प्रत्येक फ्लैट पर मंत्रालय को 2,59,54,287 रुपये का खर्च आया होगा.’
मध्य दिल्ली के एक प्रमुख स्थान पर 2.59 करोड़ रुपये में 5,000 वर्ग फुट का फ्लैट खरीदना कोई आश्चर्य की बात नहीं होनी चाहिए; वह भी तब, जब इस बात पर ध्यान न दिया जाए कि यह प्रमुख अचल संपत्ति निर्माण कंपनी को सरकार से मुफ्त में मिली थी.
आरटीआई के जवाब के अनुसार, केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) के लिए इन टावरों का निर्माण कार्य करने वाली फर्म सैम इंडिया एलएलपी है.
सैम इंडिया एलएलपी का विवरण
सैम इंडिया एलएलपी की वेबसाइट पर एक नज़र डालने से पता चलता है कि कंपनी ने केंद्र सरकार की कई परियोजनाओं के लिए अनुबंध हासिल किए हैं.
इसमें 418.60 करोड़ रुपये की लागत से एक्वा लाइन दिल्ली मेट्रो स्टेशन; 171 करोड़ रुपये की लागत से नोएडा के सेक्टर 50 में दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) स्टाफ क्वार्टर; 755 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से 2020 में मैजेंटा लाइन पर डीएमआरसी के अशोक विहार एक्सटेशन कार्य; 256 करोड़ रुपये की लागत से त्यागराज दिल्ली सीपीडब्ल्यूडी; इसके अलावा 71 करोड़ रुपये की लागत से मुंबई में केंद्र सरकार के उद्यम, भारतीय निर्यात ऋण गारंटी निगम का निर्माण; 327.70 करोड़ रुपये की लागत से गुड़गांव में सरकारी स्वामित्व वाले पंजाब नेशनल बैंक के लिए एक डेटा सेंटर और मुंबई मेट्रो रेल कॉरपोरेशन के लिए एक डिपो-सह-कार्यशाला का निर्माण शामिल है.
2007 में शुरू होने पर इसका नाम सैम (इंडिया) इन्फ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड था, लेकिन बाद में इसका नाम बदलकर सैम (इंडिया) एलएलपी कर दिया गया. इसकी वेबसाइट के अनुसार, दिसंबर 2020 में कंपनी को इसके अध्यक्ष और नामित साझेदार मदन लाल के ‘नियंत्रण में’ लाया गया.
सैम इन्फ्रा ने रोहिणी स्थित दिल्ली प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के निर्माण का दिल्ली सरकार का ठेका भी हासिल किया था.
इसी अगस्त में कंपनी की सहयोगी कंपनी सैम इंडिया बिल्टवेल प्राइवेट लिमिटेड को युगयुगीन भारत भूमिगत मेट्रो स्टेशन के निर्माण के लिए डीएमआरसी का ठेका भी मिला जाओ, जो चरण 5ए परियोजना के तहत 9.9 किलोमीटर लंबे इंद्रप्रस्थ-आरके आश्रम मार्ग कॉरिडोर पर बनेगा.
बिजनेस रिसर्च प्लेटफॉर्म ज़ौबा कॉर्प के अनुसार, मदन लाल 2020 में इसके पूर्णकालिक निदेशक थे.
गुजरात कनेक्शन
मदन लाल और उनके परिवार से जुड़ी कंपनियों पर गौर करने पर पता चलता है कि उनके बेटे शुभम गर्ग और नितिन गर्ग, गर्ग रियल्टी ग्रुप नाम से एक और निर्माण कंपनी चलाते हैं. इसी वेबसाइट पर मदन लाल का पूरा नाम मदन लाल गर्ग जान पाते हैं.
वेबसाइट पर बताया गया है कि गर्ग रियल्टी ग्रुप की शुरुआत भी मदन लाल ने 2007 में गर्ग प्रॉपर्टीज़ के नाम से की थी.
जुलाई में गुड़गांव स्थित गर्ग रियल्टी ग्रुप ने प्रधानमंत्री मोदी के गृह राज्य गुजरात में उनके ड्रीम प्रोजेक्ट, धोलेरा परियोजना पर अगले तीन वर्षों में 400 करोड़ रुपये खर्च करने का वादा किया था.
खबरों के अनुसार, निर्माण कंपनी ने ‘इस क्षेत्र (गुजरात में) में 20-22 एकड़ ज़मीन में पहले ही निवेश कर दिया है और इस नई पूंजी के साथ धोलेरा में औद्योगिक, वाणिज्यिक और आवासीय बुनियादी ढांचे की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए अतिरिक्त ज़मीन हासिल करने की योजना बना रही है.’
केंद्र सरकार द्वारा पहली स्मार्ट सिटी और पहली योजनाबद्ध ग्रीनफील्ड सिटी के रूप में प्रस्तुत धोलेरा स्पेशल इन्वेस्टमेंट रिज़न (एसआईआर) को केंद्र में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा ‘वैश्विक निवेश केंद्र’ के रूप में प्रचारित किया जा रहा है, जिसमें गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में मोदी के अपने राज्य को ‘औद्योगिक महाशक्ति’ में बदलने के सपने को ध्यान में रखा गया है.
इसलिए कोई आश्चर्य नहीं कि धोलेरा स्मार्ट सिटी वेबसाइट पर एक पूरा पृष्ठ ‘नरेंद्र मोदी के लिए धोलेरा परियोजना क्यों महत्वपूर्ण है’ पर समर्पित है. पिछले कुछ वर्षों में हज़ारों करोड़ रुपये की केंद्रीय निधि धोलेरा के निर्माण के लिए समर्पित की गई है.
इसी जुलाई में पीआईबी ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा था कि भारत और जापान के बीच साझेदारी ‘धोलेरा में सेमी-कंडक्टर और स्मार्ट सिटी निवेश पर ध्यान केंद्रित करते हुए आगे बढ़ रही है.’
खबरों के अनुसार, धोलेरा में निवेश की ताजा घोषणा के अलावा गर्ग रियल्टी समूह ने ‘गुजरात में तीन (अन्य) परियोजनाएं भी क्रियान्वित की थीं, यानी पिपली-फेडारा रोड पर ऑर्किड गार्डन, रतनपुर में सुक्कून रिट्रीट और कासिंदरा में सुक्कून सिटी.’
