नई दिल्ली: अमेरिका की संघीय अपील अदालत ने शुक्रवार (29 अगस्त) को फैसला सुनाया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से लगाए गए ज़्यादातर टैरिफ, जो कई व्यापारिक साझेदारों को प्रभावित कर रहे हैं, अवैध हैं.
द हिंदू की खबर के मुताबिक, अदालत का यह फै़सला 14 अक्तूबर तक लागू नहीं होगा, ताकि सरकार को सुप्रीम कोर्ट से इस मामले पर सुनवाई की अपील करने का समय मिल सके.
उल्लेखनीय है कि 7-4 के फै़सले में अमेरिका की फेडरल सर्किट अपीलीय अदालत ने ट्रंप सरकार का यह तर्क ख़ारिज कर दिया कि ये टैरिफ आपातकालीन आर्थिक शक्तियों के कानून के तहत लगाए गए थे.
अदालत ने ट्रंप के इस कदम को ‘कानून के ख़िलाफ़’ और ‘अमान्य’ करार दिया है.
मालूम हो कि इस फ़ैसले से कानूनी टकराव की स्थिति पैदा हो सकती है, जिससे ट्रंप की विदेश और आर्थिक नीति की योजनाएं प्रभावित हो सकती हैं.
इससे यूरोपीय संघ जैसे प्रमुख व्यापारिक साझेदारों के साथ ट्रंप द्वारा किए गए समझौतों पर संदेह पैदा हो सकता है.
मालूम हो कि जनवरी में राष्ट्रपति पद पर लौटने के बाद से ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्ति अधिनियम (IEEPA) लागू करके लगभग सभी अमेरिकी व्यापारिक साझेदारों पर 10% आधारभूत और दर्जनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए उच्च दरों के साथ टैरिफ लगाए हैं.
शुक्रवार को आए अदालत के फैसले में कहा गया है कि ‘यह कानून राष्ट्रपति को घोषित राष्ट्रीय आपातकाल के जवाब में कई कदम उठाने का महत्वपूर्ण अधिकार देता है, लेकिन इनमें से किसी भी कार्रवाई में स्पष्ट रूप से टैरिफ, शुल्क या इसी तरह की कार्रवाई करने या कर लगाने का अधिकार शामिल नहीं है.’
ज्ञात हो कि इससे पहले अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय व्यापार न्यायालय ने मई में अपने एक फैसले में कहा था कि ट्रंप ने व्यापक वैश्विक शुल्क लगाकर अपने अधिकार का अतिक्रमण किया है.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, वॉशिंगटन डीसी स्थित संघीय सर्किट कोर्ट ऑफ अपील्स का यह फैसला दो सेट के टैरिफ पर लागू होता है. एक तो अप्रैल में शुरू की गई रिसिप्रोकल टैरिफ और दूसरा फरवरी में चीन, कनाडा और मैक्सिको पर लगाए गए टैरिफ.
यह फैसला स्टील और एल्युमिनियम आयात पर ट्रंप द्वारा अलग-अलग कानूनों के तहत लगाए गए अन्य टैरिफ को प्रभावित नहीं करता.
ट्रंप ने अदालत के फैसले की आलोचना की, कहा- अंत में जीतेंगे
ट्रंप ने अदालत के इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कही है. उन्होंने ट्रुथ सोशल पर लिखा, ‘सभी टैरिफ अभी भी लागू हैं. आज एक बेहद पक्षपाती अपीलीय अदालत ने ग़लत तरीके से कहा कि हमारे टैरिफ हटाए जाने चाहिए, लेकिन उन्हें पता है कि आख़िर में अमेरिका ही जीतेगा.’
गौरतलब है कि डोनाल्ड ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल में टैरिफ को विदेश नीति का अहम हथियार बनाया है. उनका मानना है कि इससे व्यापारिक साझेदार देशों पर दबाव डाला जा सकता है और नए समझौते किए जा सकते हैं.
हालांकि, इन टैरिफ की वजह से जहां उनकी सरकार को कुछ आर्थिक रियायतें मिलीं, वहीं वैश्विक वित्तीय बाजार में अनिश्चितता भी बढ़ी हैं. इस टैरिफ की वजह से अमेरिका की भारत समेत कई देशों से तकरार भी बढ़ी है.
फिलहाल, भारत पर अमेरिका द्वारा कुल 50% टैरिफ लगाया जा रहा है. ये टैरिफ नई दिल्ली पर रूस से तेल खरीदने को लेकर दंडात्मक तौर पर लगाया गया है.
इस संबंध में भारतीय विदेश मंत्रालय का कहना है कि भारत और अमेरिका के बीच लगातार विचार-विमर्श जारी है.
