सीआईसी पद के लिए 80 से अधिक लोगों ने आवेदन किया, सालभर से आठ आयुक्त पद नहीं भर सका डीओपीटी

मुख्य सूचना आयुक्त हीरालाल समारिया इसी महीने सेवानिवृत्त होने वाले हैं, जिससे यह पद रिक्त हो जाएगा. कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) को मुख्य सूचना आयुक्त के पद के लिए 83 आवेदन प्राप्त हुए हैं. वर्तमान में सीआईसी में सूचना आयुक्तों के 10 स्वीकृत पदों में से आठ रिक्त हैं.

केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) में स्वीकृत 10 सूचना आयुक्तों (आईसी) के पदों में से आठ रिक्त हैं, जिन्हें पिछले एक साल से भी ज्यादा समय से भरा नहीं गया है.. (इलस्ट्रेशन: द वायर)

नई दिल्ली: कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) को मुख्य सूचना आयुक्त के पद के लिए 83 आवेदन प्राप्त हुए हैं. यह जानकारी पारदर्शिता अभियान चलाने वाले कमोडोर लोकेश बत्रा (सेवानिवृत्त) द्वारा दायर एक सूचना के अधिकार (आरटीआई) आवेदन से मिली है.

ज्ञात हो कि वर्तमान मुख्य सूचना आयुक्त हीरालाल समारिया इसी महीने सेवानिवृत्त होने वाले हैं, जिससे यह पद रिक्त हो जाएगा. यह ऐसे समय में हो रहा है जब पहले से ही केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) में सूचना आयुक्तों (आईसी) के 10 स्वीकृत पदों में से आठ रिक्त हैं.

डीओपीटी द्वारा आरटीआई के जवाब में कहा गया है, ‘सीआईसी में मुख्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति से संबंधित विज्ञापन संख्या 4/1/2025-आईआर II दिनांक 21.05.2025 के जवाब में इस विभाग को कुल 83 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिसमें आवेदन प्राप्त करने की अंतिम तिथि बढ़ाकर 30.06.2025 कर दी गई है.’

कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग ने इस पद के लिए मई 2025 में आवेदन आमंत्रित किए थे और आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 20 जून थी. हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, बाद में इसे 30 जून, 2025 तक बढ़ा दिया गया था.

सूचना आयोग में वर्तमान में केवल तीन अधिकारी कार्यरत हैं- समारिया और सूचना आयुक्त आनंदी रामलिंगम और विनोद कुमार तिवारी.

सूचना आयुक्तों के पदों को भरने की प्रक्रिया अगस्त 2024 में शुरू हुई थी और उस वर्ष अक्टूबर तक कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग को 161 आवेदन प्राप्त हुए थे.

द वायर ने जुलाई में बताया था कि यह प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है.

नेशनल कैंपेन फॉर पीपुल्स राइट (एनसीपीआरआई) ने पिछले साल बताया था कि केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) आठ रिक्तियों के साथ काम कर रहा है, जबकि उसके पास लगभग 23,000 अपीलें या शिकायतें लंबित हैं. एनसीपीआरआई ने कहा था कि यह संख्या ‘लगातार बढ़ रही है.’