नई दिल्ली: विवादों से घिरे राजस्थान लोक सेवा आयोग (आरपीएससी) की सदस्य मंजू शर्मा ने आरपीएससी से इस्तीफा दे दिया है.
ज्ञात हो कि हाल ही में राजस्थान हाईकोर्ट ने पेपर लीक के आरोप पर 2021 की सब-इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा रद्द करते हुए उनके और अन्य सदस्यों के खिलाफ आलोचनात्मक टिप्पणी की थी.
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े को सोमवार को लिखे अपने पत्र में शर्मा ने कहा, ‘मैंने अपना पूरा कामकाजी और निजी जीवन पूरी पारदर्शिता और ईमानदारी से काम करते हुए बिताया है, लेकिन हाल ही में एक भर्ती प्रक्रिया में उठे विवाद के कारण मेरी व्यक्तिगत प्रतिष्ठा और पूरे आयोग की गरिमा को ठेस पहुंची है.’
उन्होंने लिखा, ‘किसी भी पुलिस संस्थान या किसी भी जांच एजेंसी में मेरे खिलाफ किसी भी तरह की कोई जांच लंबित नहीं है, न ही मुझे कभी किसी मामले में आरोपी माना गया है.’
शर्मा ने कहा, ‘फिर भी, सार्वजनिक जीवन में शुचिता के पक्षधर होने और आयोग की गरिमा, निष्पक्षता और पारदर्शिता को सर्वोपरि मानते हुए मैं राजस्थान लोक सेवा आयोग के सदस्य पद से स्वेच्छा से अपना इस्तीफा दे रही हूं.’
हाईकोर्ट ने कहा था कि उन्होंने और अन्य ने परीक्षा की शुचिता से समझौता किया है. उल्लेखनीय है कि वे आम आदमी पार्टी के पूर्व सदस्य और कवि कुमार विश्वास की पत्नी हैं.
कोर्ट ने नाम लेते हुए कई अधिकारियों को ठहराया था ज़िम्मेदार
बता दें कि हाईकोर्ट ने 28 अगस्त के अपने आदेश में कहा, ‘आरपीएससी के सदस्य बाबू लाल कटारा, रामूराम रायका, मंजू शर्मा, संगीता आर्य, जसवंत राठी और अध्यक्ष संजय श्रोतिया ने प्रश्नपत्रों के लीक होने और साक्षात्कार प्रक्रिया में पूर्वाग्रह पैदा करने में अपनी सक्रिय भागीदारी या इसकी जानकारी के माध्यम से परीक्षा की शुचिता से व्यवस्थित और बड़े पैमाने पर समझौता किया.’
एक अन्य टिप्पणी में हाईकोर्ट ने मंजू शर्मा, संगीता आर्य और जसवंत राठी सहित आयोग के कई अन्य सदस्यों की सक्रिय मिलीभगत और संलिप्तता को चिंताजनक बताया था.
आरोप-पत्र के अनुसार, इन सदस्यों को आयोग के सदस्यों के बीच निजी लाभ के लिए होने वाले लेन-देन और गड़बड़ियों की पूरी जानकारी थी.
अदालत ने यह भी कहा कि पूर्व आरपीएससी सदस्य रामूराम रायका ने भी ‘अपने बच्चों के साक्षात्कारों के संबंध में सदस्य मंजू शर्मा, संगीता आर्य और जसवंत राठी के साथ बातचीत की थी. इन सदस्यों की भागीदारी आरपीएससी के भीतर व्यवस्थित भ्रष्टाचार का संकेत देती है, जिससे साक्षात्कार और लिखित परीक्षा – दोनों ही चरणों में भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता से समझौता हुआ है.’
शर्मा के पास पीएचडी और एमए (भूगोल) की डिग्री है. इससे पहले वह भरतपुर के सरकारी एमएसजे पीजी कॉलेज में एसोसिएट प्रोफेसर थीं.
उनके इस्तीफे की तरह ही अक्टूबर 2020 में उनकी नियुक्ति भी विवादों में रही थी उस समय अशोक गहलोत सरकार की कांग्रेस के कुछ लोगों ने शर्मा की नियुक्ति के लिए आलोचना की थी, क्योंकि उनके पति कुमार विश्वास, जो आम आदमी पार्टी के संस्थापक सदस्य हैं, कांग्रेस पार्टी और उसके नेतृत्व के कट्टर आलोचक थे और उन्होंने 2014 में अमेठी में राहुल गांधी के खिलाफ चुनाव भी लड़ा था, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था.
आरपीएससी सदस्यों की नियुक्ति छह साल के लिए होती है, इसलिए शर्मा का कार्यकाल अक्टूबर 2026 तक रहता.
