इज़रायल का ग़ाज़ा शहर पर हमला तेज़, दूसरी सबसे ऊंची इमारत गिराई

इज़रायली सेना ने ग़ाज़ा शहर में एक ऊंची इमारत को ध्वस्त कर दिया है. पिछले दो दिनों में यह दूसरा बड़ा टावर है जिस पर इज़रायल की सेना द्वारा बमबारी की गई है. इसराइल डिफ़ेंस फ़ोर्सेज़ (आईडीएफ़) ने कहा कि हमास सुसी टावर का इस्तेमाल कर रहा था. हालांकि हमास ने इस दावे को ख़ारिज किया है.

इज़रायल का ग़ाज़ा पर हमला. (फोटो साभार: सोशल मीडिया)

नई दिल्ली: इज़रायली सेना ने ग़ाज़ा शहर में एक ऊंची इमारत को ध्वस्त कर दिया है. पिछले दो दिनों में यह दूसरा बड़ा टावर है जिस पर इज़रायल की सेना द्वारा बमबारी की गई है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, इज़रायल ने फिलिस्तीन के निवासियों को यह चेतावनी दी है कि वे दक्षिण की ओर चले जाएं, क्योंकि सेना शहर पर कब्ज़ा करने के लिए इस क्षेत्र में और आगे बढ़ रही है.

इज़रायल के रक्षा मंत्री इज़रायल काट्ज़ ने इस घटना की पुष्टि करते हुए इमारत के ढहने का एक वीडियो सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट किया.

मालूम हो कि तेल अवीव का इज़रायल रक्षा बल (आईडीएफ) प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू द्वारा सेना को इस क्षेत्र पर कब्ज़ा करने का आदेश दिए जाने के बाद से कई हफ़्तों से उत्तरी शहर के उपनगरों पर अपना आक्रमण जारी रखे हुए हैं.

आईडीएफ ने अपने हमले का बचाव करते हुए कहा कि अब नष्ट हो चुके सुसी टावर का इस्तेमाल हमास के उग्रवादी कर रहे थे.

हालांकि, ग़ाज़ा स्थित उग्रवादी समूह ने इस दावे का खंडन किया है. यह तुरंत स्पष्ट नहीं हो पाया है कि हमले में कोई हताहत हुआ है या नहीं.

उल्लेखनीय है कि शनिवार को इस हमले से पहले, इज़रायल की सेना ने क्षेत्र में पर्चे गिराए थे, जिनमें फिलिस्तीनियों से यह क्षेत्र छोड़कर दक्षिण की ओर चले जाने को कहा गया था, जिसे इज़रायल मानवीय क्षेत्र कहता है.

नेतन्याहू का मानना ​​है कि ग़ाज़ा शहर हमास आतंकवादियों का केंद्र है और फिलिस्तीनी इस्लामी आतंकवादियों को हराने के लिए इस पर कब्जा करना आवश्यक है, जिन्होंने अक्टूबर 2023 में तेल अवीव पर हमला कर इस क्षेत्र में युद्ध को जन्म दिया था.

दक्षिणी क्षेत्र की ओर जाने की चेतावनी

हालांकि, आईडीएफ फिलिस्तीनियों से अल-मवासी – खान यूनिस और समुद्र तट के बीच के क्षेत्र में जाने के लिए कह रहा है, जिसे लेकर संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि अल-मवासी क्षेत्र में टेंट और शिविर भीड़भाड़ वाले और असुरक्षित हैं और दक्षिणी क्षेत्र के अस्पताल अत्यधिक व्यस्त हैं.

इज़रायली सैन्य प्रवक्ता अविचाय अद्राई ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा कि निवासियों को ग़ाज़ा शहर छोड़कर अल-मवासी चले जाना चाहिए, जो दक्षिणी ग़ाज़ा में खान यूनिस का एक निर्दिष्ट तटीय क्षेत्र है.

अद्राई ने कहा कि अल-मवासी जाने वालों को भोजन, चिकित्सा देखभाल और आश्रय मिलेगा क्योंकि यह निर्दिष्ट क्षेत्र एक ‘मानवीय क्षेत्र’ है.

हालांकि, रिपोर्टों में दावा किया गया है कि मंगलवार को अल-मवासी में पानी के लिए कतार में खड़े पांच बच्चों की मौत हो गई.

गौरतलब है कि इज़रायल और गाज़ा के बीच संघर्ष अक्टूबर, 2023 को हमास के नेतृत्व वाले उग्रवादियों द्वारा दक्षिणी इज़रायल पर किए गए हमले के बाद शुरू हुआ था, जिसमें लगभग 1,200 लोग मारे गए थे और 251 बंधक बना लिए गए थे. तब से इज़रायल की सैन्य प्रतिक्रिया ने ग़ाज़ा के अधिकांश हिस्से को बंजर भूमि में बदल दिया है.

फ़िलिस्तीनी अधिकारियों के अनुसार, 60,000 से ज़्यादा फ़िलिस्तीनी मारे गए हैं.

बीते महीने अगस्त में संयुक्त राष्ट्र और सहायता एजेंसियों के एकीकृत खाद्य सुरक्षा चरण वर्गीकरण (आईपीसी) पैनल द्वारा आधिकारिक मान्यता के माध्यम से ग़ाज़ा में मानवीय क्षति की भयावहता को रेखांकित किया गया.

एक कड़ी चेतावनी मेंआईपीसी ने घोषणा की थी कि ‘ग़ाज़ा पट्टी में वर्तमान में अकाल की सबसे बदतर स्थिति उत्पन्न हो रही है’ और आगे ‘मानवीय पीड़ा’ को रोकने के लिए युद्धविराम का आह्वान किया था.