श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर के डोडा में बुधवार (10 सितंबर) को कड़ा कर्फ्यू लगा दिया गया, जहां कुछ जगहों पर छिटपुट विरोध प्रदर्शन हुए. वहीं आम आदमी पार्टी (आप) नेता मेहराजुद्दीन मलिक की हिरासत के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शनों को रोकने के लिए पड़ोसी किश्तवाड़ जिले में भी मोबाइल इंटरनेट पर प्रतिबंध लगा दिया गया है.
जम्मू क्षेत्र में चिनाब घाटी के दोनों जिलों के कुछ हिस्सों से विरोध प्रदर्शन की खबरें आईं, जहां अधिकारियों ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के तहत लोगों की आवाजाही पर प्रतिबंध बढ़ा दिए हैं. ये प्रतिबंध मंगलवार को लगाए गए थे, क्योंकि एक दिन पहले मलिक की सख्त जनसुरक्षा अधिनियम (पीएसए) के तहत हिरासत के खिलाफ व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए थे.
डोडा में बुधवार को लगातार दूसरे दिन मोबाइल इंटरनेट पर प्रतिबंध जारी रहा. द वायर से फोन पर बात करने वाले स्थानीय लोगों ने बताया कि बुधवार सुबह अधिकारियों ने मुख्य डोडा शहर की सभी सड़कों और गलियों को कांटों वाले तार और बैरिकेड्स लगाकर सील कर दिया था, जिन पर दंगा-रोधी उपकरणों से लैस सुरक्षाकर्मी तैनात थे.
डोडा के बाहरी इलाकों में आप नेता के समर्थकों को विरोध प्रदर्शन करने से रोकने के लिए प्रमुख चौराहों और मुख्य सड़कों पर सुरक्षा बल तैनात किए गए थे.
यह ऐतिहासिक शहर, जो आमतौर पर लोगों से गुलज़ार रहता है, बुधवार को वीरान-सा दिखाई दिया, जहां सभी दुकानें, शैक्षणिक संस्थान, बैंक और सरकारी कार्यालय बंद रहे, जबकि सार्वजनिक और निजी परिवहन सड़कों से नदारद रहे.
डोडा के एक निवासी ने, जो अपना नाम नहीं बताना चाहते थे, फोन पर बताया, ‘मुख्य शहर के सभी प्रवेश द्वार कल रात सील कर दिए गए थे और निवासियों को बाहर आने की अनुमति नहीं है. बुधवार को सुरक्षाकर्मियों को लेकर और बसें शहर में आईं. स्थिति बहुत तनावपूर्ण है.’
नाम न छापने की शर्त पर एक स्थानीय पत्रकार ने कहा, ‘ऐसा लग रहा है कि 2019 की कश्मीर की पुनरावृत्ति हो रही है.’ पूरे ज़िले में कड़े प्रतिबंध लागू हैं और मंगलवार से मीडिया को भी घटनाक्रम को कवर करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है.
2019 में अनुच्छेद 370 को हटाए जाने के बाद कई हफ़्तों तक कश्मीर में संचार व्यवस्था ठप रही और कर्फ्यू भी लगा रहा.
बीएनएसएस की धारा 163 के तहत डोडा जिला प्रशासन ने चार या उससे अधिक लोगों के एकत्र होने, हथियार या धारदार हथियार लेकर चलने और भड़काऊ भाषणों/नारों/हाव-भावों पर प्रतिबंध लगा दिया है जो शांति और सद्भाव को बाधित कर सकते हैं.

अतिरिक्त उप-मजिस्ट्रेट अनिल कुमार ठाकुर द्वारा मंगलवार को जारी किए गए सार्वजनिक आवागमन को प्रतिबंधित करने के आदेश में डोडा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को ‘इसका अक्षरशः पालन सुनिश्चित करने’ का निर्देश दिया गया है.
इसमें कहा गया है, ‘इस आदेश का कोई भी उल्लंघन कानून की संबंधित धाराओं के तहत दंडात्मक कार्रवाई को आमंत्रित करेगा.’
ज्ञात हो कि बीएनएसएस की धारा 223, बीएनएसएस की धारा 163 के तहत उल्लंघनों के लिए दंड को कवर करती है और यह मजिस्ट्रेट को उल्लंघनों की लिखित शिकायतों की जांच करने और यदि शिकायत किसी सरकारी अधिकारी द्वारा की जाती है, तो आरोपी को सुने बिना एफआईआर दर्ज करने का आदेश देने के व्यापक अधिकार प्रदान करती है.
हालांकि, कर्फ्यू जैसे प्रतिबंधों के बावजूद जेल में बंद आप नेता के समर्थकों ने डोडा के गंडोह इलाके में विरोध प्रदर्शन किया और बाद में सुरक्षा बलों के साथ उनकी झड़प हुई.
मुख्य डोडा शहर में मलिक के समर्थकों ने भी इसी तरह का विरोध प्रदर्शन किया. स्थानीय लोगों ने बताया कि पहाड़ी ज़िले में भारी संख्या में तैनात सुरक्षाकर्मियों ने प्रदर्शनकारियों पर लाठियां बरसाईं, जिससे उन्हें तितर-बितर होना पड़ा. यह तुरंत पता नहीं चल पाया है कि झड़पों में कोई घायल हुआ है या नहीं.
द वायर के संवाददाता द्वारा देखे गए बुधवार के एक वीडियो में डोडा के भलेसा इलाके में मलिक के समर्थन में एक मौन धरना प्रदर्शन दिखाई दे रहा है. कुछ देर बाद एक पुलिस जिप्सी इलाके में पहुंचती है और प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर होने पर मजबूर करती है. बाद में मलिक की महिला समर्थकों के एक समूह को महिला पुलिसकर्मियों द्वारा वैन में ठूंसते हुए देखा जा सकता है.
डोडा के एक स्थानीय निवासी ने दावा किया कि विरोध प्रदर्शन को रोकने के लिए जिले में कई दर्जन लोगों को हिरासत में लिया गया है.
इस मामले पर टिप्पणी के लिए डोडा के डिप्टी कमिश्नर हरविंदर सिंह से बार-बार कोशिश करने के बावजूद संपर्क नहीं हो सका.
वहीं, किश्तवाड़ से सटे इलाके में बुधवार को मलिक के समर्थन में कई दर्जन प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रीय ध्वज लहराते हुए चटरू इलाके में मार्च निकाला. ‘नहीं चलेगी, नहीं चलेगी, गुंडागर्दी नहीं चलेगी’ और ‘गलियों से बाज़ारों से, इंकलाब आएगा’ जैसे नारे लगाते हुए प्रदर्शनकारियों ने आप नेता की तत्काल रिहाई की मांग की.
किश्तवाड़ के उपायुक्त पंकज कुमार शर्मा ने कहा कि चटरू में प्रदर्शनकारियों को पुलिसकर्मियों ने समझाया और फिर वे शांतिपूर्वक तितर-बितर हो गए. हालांकि, उन्होंने मोबाइल इंटरनेट पर प्रतिबंध की बात से इनकार किया.
उन्होंने द वायर को बताया, ‘ईंधन की कमी के कारण कुछ टेलीकॉम टावर प्रभावित हुए हैं, जिसके कारण मोबाइल इंटरनेट प्रभावित हुआ है.’
‘चिनाब घाटी की स्थिति के लिए उपराज्यपाल ज़िम्मेदार’
बारामुला में पत्रकारों से बात करते हुए सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने चिनाब घाटी की मौजूदा स्थिति के लिए जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा को ज़िम्मेदार ठहराया.
अब्दुल्ला ने कहा, ‘पुलिस प्रशासन उपराज्यपाल के अधीन है. वह प्रभारी हैं और अगर वहां कुछ भी अप्रिय होता है तो वही ज़िम्मेदार होंगे.’
वहीं, श्रीनगर में पत्रकारों से बात करते हुए विपक्षी पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की अध्यक्ष महबूबा मुफ़्ती ने मलिक की रिहाई की मांग करते हुए आरोप लगाया कि उनकी हिरासत हज़रतबल दरगाह में राष्ट्रीय प्रतीक को लेकर छिड़े विवाद से जनता का ध्यान भटकाने की एक साजिश है.
उन्होंने कहा, ‘जनता का ध्यान भटकाने के लिए उनकी (मलिक की) बलि चढ़ा दी गई. अपने निर्वाचन क्षेत्र के मुद्दों के समाधान की मांग कर रहे एक जनप्रतिनिधि को पीएसए के तहत गिरफ़्तार करना लोकतंत्र को ख़त्म कर देगा.’
इस बीच, आप नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह मंगलवार को पार्टी के अन्य नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ जम्मू पहुंचे. सिंह ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया जिसमें उन्होंने भारतीय जनता पार्टी पर आप प्रमुख अरविंद केजरीवाल सहित पार्टी के शीर्ष नेताओं पर बार-बार झूठे मामले दर्ज करके उनकी पार्टी को ‘कुचलने’ का आरोप लगाया.
उन्होंने मलिक के बारे में कहा, ‘यह गैरकानूनी और असंवैधानिक है कि अपने निर्वाचन क्षेत्र के लिए अस्पताल की मांग करने वाले एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि को जनता के लिए खतरा बताया गया और उन पर पीएसए के तहत मामला दर्ज किया गया, जिसका इस्तेमाल आतंकवादियों के खिलाफ किया जाता है. हम इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे.’ उन्होंने आरोप लगाया कि उनके पीएसए डोजियर में लगाए गए आरोप राजनीति से प्रेरित हैं.
सिंह ने भाजपा पर ‘सस्ती राजनीति’ करने का आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी की कानूनी टीम मलिक की हिरासत को अदालत में चुनौती देगी.
उन्होंने कहा, ‘मेहराज अपने लोगों के लिए लड़ रहे थे. जम्मू-कश्मीर के इतिहास में किसी निर्वाचित विधायक पर कभी भी पीएसए के तहत मामला दर्ज नहीं किया गया. हमारे पार्टी प्रमुख और अन्य नेताओं के खिलाफ भी इसी तरह के हथकंडे अपनाए गए हैं, जिन पर झूठे आरोप लगाए गए हैं, लेकिन हम चुप नहीं बैठेंगे.’
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