नई दिल्ली: नेपाल में तनावपूर्ण हालात के बीच सेना के मोर्चा संभालने के बाद पुलिस ने काठमांडू घाटी में धीरे-धीरे अपनी गतिविधियां फिर से शुरू कर दी है. द हिंदू के अनुसार, नेपाल पुलिस ने जानकारी दी है कि विरोध प्रदर्शनों में अब तक मरने वालों की संख्या 51 हो गई है.
पुलिस प्रवक्ता बिनोद घिमिरे ने एएफपी को बताया कि ‘इस हफ़्ते अब तक विरोध प्रदर्शनों में 51 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें कम से कम 21 प्रदर्शनकारी और तीन पुलिसकर्मी शामिल हैं.’ इसके अलावा अराजकता के दौरान देश भर के कई जेलों से भागे 12,500 से ज़्यादा कैदी अभी भी फरार हैं.
सामान्य हो रहे हैं हालात
द टेलीग्राफ की रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारियों ने शुक्रवार (12 सितंबर) को बताया कि इस सप्ताह के शुरू में हुए हिंसक सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान जिन पुलिस थानों और चौकियों में तोड़फोड़ की गई थी या आग लगा दी गई थी, वे धीरे-धीरे फिर से सक्रिय हो रहे हैं.
काठमांडू पुलिस कार्यालय ने बताया कि ज़ेन-ज़ी के नेतृत्व वाले प्रदर्शनों में क्षतिग्रस्त हुए थाने, चौकियां और यूनिट्स धीरे-धीरे फिर से खुल रही हैं और नेपाल पुलिस तथा सशस्त्र पुलिस बल के जवान घाटी की सड़कों और चौकियों के आसपास फिर से दिखाई देने लगे हैं.
मालूम हो कि प्रदर्शन के दौरान घाटी के दर्जनों पुलिस थानों में तोड़फोड़ की गई थी और उन्हें नुकसान पहुंचाया गया था.
हालांकि, नुकसान इसमें कितने पुलिस थानों को नुकसान पहुंचा था, इसकी सटीक संख्या की पुष्टि अभी बाकी है.
इस संबंध में माई रिपब्लिका समाचार पोर्टल ने रानीपोखरी स्थित काठमांडू घाटी पुलिस कार्यालय के प्रवक्ता एसएसपी शेखर खनल नेके हवाले से कहा, ‘ऐसी घटनाओं का सटीक डेटा अभी उपलब्ध नहीं है.’
खनल ने कहा कि पुलिसकर्मी अपनी चौकियों पर लौट रहे हैं और उपलब्ध सुविधाओं के साथ अपना काम फिर से शुरू कर रहे हैं.
उन्होंने कहा कि स्थानीय लोग घाटी के कई इलाकों में तोड़फोड़ किए गए पुलिस थानों के पुनर्निर्माण में भी मदद कर रहे हैं.
उन्होंने आगे बताया कि सामुदायिक नेताओं ने भी जनता से मरम्मत और सफाई के काम में मदद करने का आग्रह किया है.
उल्लेखनीय है कि प्रदर्शनकारियों के हमले के बाद कई पुलिसकर्मियों ने सेना की बैरकों में शरण ली थी. बाद में नेपाली सेना ने व्यवस्था बहाल करने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा की ज़िम्मेदारी संभाली.
सुशीला कार्की संभाल सकती हैं अंतरिम सरकार की कमान
चुनाव होने तक नेपाल की अंतरिम सरकार में प्रधानमंत्री पद की कमान देश की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की संभाल सकती है. उनके नाम पर लगभग सहमति बन गई है. भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त बयान देने वाली कार्की ने वाराणसी (उत्तर प्रदेश) के बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से राजनीतिक विज्ञान में एमए की डिग्री ली है.
बता दें, मंगलवार को तेज़ और हिंसक होते विरोध प्रदर्शनों के बीच केपी शर्मा ओली ने अपने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दिया था. इससे पहले कैबिनेट के कई और मंत्रियों ने का भी इस्तीफ़ा सामने आया था.
हालांकि, सोशल मीडिया पर प्रतिबंध हटाने और प्रधानमंत्री के इस्तीफ़े के बावजूद नेपाल में हिंसा शांत नहीं हुई और मंगलवार को प्रदर्शनकारियों ने सरकारी इमारतों में आग लगा दी, जिनमें सिंह दरबार, प्रधानमंत्री कार्यालय, सुप्रीम कोर्ट और राष्ट्रपति आवास के कुछ हिस्से, साथ ही राजनीतिक नेताओं के घर भी शामिल थे.
सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो भी प्रसारित हुए, जिनमें प्रदर्शनकारियों को नेपाली कांग्रेस के नेता और चार बार प्रधानमंत्री रहे शेर बहादुर देउबा और उनकी पत्नी, विदेश मंत्री आरज़ू राणा देउबा से मारपीट करते हुए देखा गया.
इसके परिणामस्वरूप नेपाली सेना ने मंगलवार शाम को घोषणा की थी कि वह स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कर्मियों को तैनात करेगी.
इसके बाद सेना ने राष्ट्रव्यापी कर्फ्यू की घोषणा की और अपराधिक कृत्यों से निपटने के लिए कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी, जिसके बाद नेपाल के हालात में थोड़ी स्थिरता देखने को मिली.
नेपाल में स्थिरता लाने के लिए फिलहाल राष्ट्रपति, प्रदर्शनकारियों के प्रतिनिधि, अंतरिम प्रशासन का नेतृत्व करने वाले संभावित प्रमुख व्यक्तियों और सेना के बीच बातचीत जारी है.
