सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी रिपोर्ट के बाद वनतारा को क्लीन चिट दी, कहा- कोई गड़बड़ी नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने 15 सितंबर को गुजरात के जामनगर में रिलायंस समूह के स्वामित्व वाले विवादास्पद 'वन्यजीव रिजर्व' वनतारा को कई पहलुओं पर क्लीन चिट देते हुए कहा कि एसआईटी रिपोर्ट पढ़ी और पाया कि जानवरों का अधिग्रहण 'नियामक अनुपालन में' किया गया था.

फाइल फोटो-वनतारा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (15 सितंबर) को वनतारा को कई पहलुओं पर क्लीन चिट देते हुए कहा कि उसके द्वारा नियुक्त विशेष जांच दल (एसआईटी) द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट के अनुसार, रिलायंस के स्वामित्व वाले गुजरात के जामनगर स्थित चिड़ियाघर-सह-बचाव-पुनर्वास केंद्र द्वारा पशु अधिग्रहण ‘नियामक अनुपालन’ के अनुसार किया गया था.

लाइव लॉ की एक रिपोर्ट के अनुसार, मामले की सुनवाई करने वाली सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने यह भी कहा कि वे ‘मामले को बंद’ कर रहे हैं और रिपोर्ट को स्वीकार कर रहे हैं.

‘नियामक अनुपालन के अनुसार’

उल्लेखनीय है कि शीर्ष अदालत को 14 अगस्त को दो याचिकाएं मिलीं थीं, जिनमें वनतारा की जांच की मांग की गई थी. इन याचिकाओं के जवाब में 25 अगस्त को चार सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया था.

आरोप है कि वनतारा अपने संग्रह के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अवैध रूप से पकड़े गए वन्यजीवों को हासिल करता है. इसके अलावा मनी लॉन्ड्रिंग समेत अन्य आरोप भी लगाए गए थे.

इनमें से एक याचिका में 2020 से वनतारा के संचालन की जांच करने का आग्रह किया गया था, जिसमें वन्य जीव-जंतुओं और वनस्पतियों की लुप्तप्राय प्रजातियों के अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर कन्वेंशन (सीआईटीईएस) के तहत उसके परमिटों का सत्यापन भी शामिल था, जिसके कारण कई महाद्वीपों से सैकड़ों विदेशी प्रजातियों का आयात संभव हुआ.

कई खोजी समाचार रिपोर्ट्स में आरोप लगाया गया है कि वनतारा द्वारा विदेशी वन्यजीवों की खरीद ने दुनिया भर में अवैध वन्यजीव व्यापार को बढ़ावा दिया होगा.

खबरों के अनुसार, एसआईटी ने 4 से 6 सितंबर तक वनतारा का दौरा किया और स्थलीय निरीक्षण किया वनतारा में एसआईटी ने कथित तौर पर केंद्र के मुख्य वित्तीय अधिकारी, निदेशक और वरिष्ठ अधिकारियों से भी मुलाकात की और पशु स्थानांतरण, वित्त पोषण, पशु चिकित्सा देखभाल और कानूनी अनुमतियों से संबंधित दस्तावेजों की जांच की.

इन रिपोर्ट्स के अनुसार, एसआईटी ने वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1973, चिड़ियाघर के नियमों और अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों के अनुपालन की पुष्टि के लिए बाड़ों, सुविधाओं और चिकित्सा बुनियादी ढांचे का भी निरीक्षण किया. इसके बाद कथित तौर पर वनतारा को 200 प्रश्नों वाली एक प्रश्नावली भेजी गई.

एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट दाखिल की और 12 सितंबर शुक्रवार को सर्वोच्च न्यायालय को सौंप दी.

लाइव लॉ के अनुसार, सोमवार को जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस पीबी वराले की पीठ – जिसने रिट याचिकाओं पर सुनवाई की थी, ने कहा कि रिपोर्ट पढ़ी और पाया कि जानवरों का अधिग्रहण ‘नियामक अनुपालन में’ किया गया था.

‘मामला बंद’

द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, जब पीठ ने संकेत दिया कि वह एसआईटी की रिपोर्ट को आदेश का हिस्सा बनाएगी, तो गुजरात राज्य की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि शीर्ष अदालत को इसे संलग्न करने की आवश्यकता नहीं है.

वनतारा का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने मेहता का समर्थन करते हुए चिंता व्यक्त की कि रिपोर्ट में ‘व्यावसायिक रूप से गोपनीय जानकारी’ हो सकती है.

पीठ ने सहमति जताते हुए कहा कि वह अपने आदेश में एसआईटी रिपोर्ट का सारांश शामिल करने पर विचार करेगी.

लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, अदालत ने कहा, ‘हम मामले को बंद कर रहे हैं और रिपोर्ट स्वीकार कर रहे हैं. हम किसी को भी इस तरह की आपत्तियां उठाने की अनुमति नहीं देंगे… हम समिति की रिपोर्ट से संतुष्ट हैं… अब, हमारे पास एक स्वतंत्र समिति की रिपोर्ट है, उन्होंने हर चीज़ का अध्ययन किया है, उन्होंने विशेषज्ञों की मदद ली है. उन्होंने जो भी प्रस्तुत किया है, हम उसी के अनुसार कार्य करेंगे. और सभी अधिकारी सिफारिशों और सुझावों के आधार पर कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र होंगे. आप भी बाध्य हैं, हम किसी को भी बार-बार सवाल उठाने की अनुमति नहीं देंगे.’

वनतारा के ख़िलाफ़ केस बंद करने पर जयराम रमेश का कटाक्ष: ‘काश, सभी मामले इतनी जल्दी निपट जाते’

एसआईटी की क्लीन चिट के बाद सुप्रीम कोर्ट द्वारा वनतारा के खिलाफ मामला बंद करने के एक दिन बाद कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने मंगलवार (16 सितंबर) को कहा कि काश, सभी मामलों का निपटारा इतनी जल्दी और स्पष्ट रूप से होता.

कांग्रेस महासचिव और पूर्व पर्यावरण मंत्री ने कहा कि भारतीय न्यायिक प्रणाली, जो लंबे विलंब के लिए जाना जाता है, जब चाहे तब सबसे तेज़ गति से काम करती है.

उन्होंने कहा, ’25 अगस्त, 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने जामनगर में रिलायंस फाउंडेशन द्वारा स्थापित वन्यजीव बचाव एवं पुनर्वास केंद्र वनतारा के मामलों की एसआईटी द्वारा जांच का आदेश दिया था. चार प्रतिष्ठित सदस्यों वाली एसआईटी को 12 सितंबर, 2025 तक अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया था.’

उन्होंने कहा कि एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट एक ‘सीलबंद लिफाफे’ में प्रस्तुत की और 15 सितंबर, 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने इसकी सिफारिशों को स्वीकार कर लिया और मामले को बंद कर दिया, जो 7 अगस्त, 2025 को दायर एक जनहित याचिका से शुरू हुआ था.

रमेश ने कहा, ‘काश, सभी मामलों को इतनी शीघ्रता और स्पष्टता से निपटाया जाता – बेशक, इस रहस्यमय ‘सीलबंद लिफाफे’ के चक्कर के बिना!’