उत्तराखंड: चमोली में बादल फटा, देहरादून और कई इलाकों में बाढ़-भूस्खलन में कम से कम 17 लोगों की मौत

उत्तराखंड के चमोली ज़िले में बुधवार देर रात बादल फटने के साथ ही कई ज़िलों में भूस्खलन की सूचना है. ग्राम कुंतरी लगाफाली, कुंतरी लगा सरपाणी और धूर्मा गांव में भारी मलबा आने से बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है.

उत्तराखंड में भारी बरिश और भूस्खलन से तबाही. (फोटो साभार: सोशल मीडिया)

नई दिल्ली: उत्तराखंड के चमोली ज़िले में बुधवार (17 सितंबर) देर रात बादल फटने के साथ ही कई जिलों में भूस्खलन की सूचना है. ग्राम कुंतरी लगाफाली, कुंतरी लगा सरपाणी और धूर्मा गांव में भारी मलबा आने से बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है.

इस संबंध में चमोली के ज़िलाधिकारी संदीप तिवारी ने मीडिया को बताया, ‘बीती रात नंदानगर क्षेत्र में हुई बारिश से पांच अलग-अलग जगहों में नुक़सान हुआ है. अभी हमारे पास दस लोगों के लापता होने की सूचना है और कई लोग घायल भी हुए हैं.’

डीएम ने कहा कि कई जगह सड़कें ध्वस्त हो गई हैं, जिससे राहत टीमों को पहुंचने में समय लग रहा है.

सोशल मीडिया मंच एक्स पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि वे निरंतर प्रशासन से संपर्क में हैं और स्वयं स्थिति की गहन निगरानी कर रहे हैं.

इससे पहले राज्य में जाते हुए मानसून ने खासकर राजधानी देहरादून में भारी तबाही मचाई है. यहां बादल फटने और लगातार भारी बारिश की घटनाओं में कम से कम 17 लोगों की जान चली गई है और 13 लोग लापता हैं.

न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, सोमवार (15 सितंबर) रात से शुरू हुई इस विनाशकारी बारिश में कई सड़कें, पुल और घर बह गए हैं. इसके अलावा नदियां उफान पर हैं.

राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल के सूत्रों के अनुसार,राज्य में स्थिति गंभीर बनी हुई है.

इस संबंध में एसडीआरएफ के एक अधिकारी ने अखबार से कहा, ‘विभिन्न स्थानों पर नदियों में बह जाने या मलबे में दब जाने से सत्रह लोगों की मौत हो गई है, जबकि 13 से ज़्यादा लोग लापता हैं.’

अधिकारी के अनुसार, मौथ नदी से दो पुराने शव भी बरामद किए गए हैं, हालांकि उनका वर्तमान आपदा से संबंध अभी तक स्थापित नहीं हो पाया है.

फिलहाल प्रभावित इलाकों में बचाव अभियान जारी है. जिला प्रशासन ने मंगलवार शाम तक आधिकारिक तौर पर 13 लोगों की मौत, तीन के घायल होने और 13 लोगों के लापता होने की पुष्टि की है.

मालूम हो कि सहस्रधारा और मालदेवता क्षेत्र इस आपदा से सबसे ज़्यादा प्रभावित हुए हैं. रिस्पना और बिंदाल जैसी नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, जिससे कई बस्तियां जलमग्न हो गई हैं और घरों में मलबा भर गया है. कई दुकानें और होटल भी पानी के तेज़ बहाव में बह गए हैं..

सहस्त्रधारा के करलीगाड़ इलाके में तेज़ बहाव वाली मिट्टी और मलबे ने आठ दुकानों को बहा दिया और होटलों को क्षतिग्रस्त कर दिया, जिससे दो लोग लापता हो गए.

डीआईटी कॉलेज के पास ग्रीन वैली पीजी में एक छात्र की दीवार गिरने से मौत हो गई, जिसके बाद में एसडीआरएफ ने उसका शव बरामद किया.

रिपोर्ट्स से पता चलता है कि उफनती आसन नदी में 13 लोग बह गए, जिनमें से पांच के शव बरामद हुए हैं. टपकेश्वर के शिखर फॉल में चार लोगों के लापता होने की आशंका है. वहीं, मसूरी के झड़ीपानी टोल प्लाजा पर भूस्खलन में एक मजदूर की मौत हो गई.

भारी बारिश और भूस्खलन के चलते संपर्क बुरी तरह प्रभावित

भारी बारिश और भूस्खलन के चलते संपर्क बुरी तरह प्रभावित हुआ है. देहरादून-पांवटा राष्ट्रीय राजमार्ग पर ‘नंदा की चौकी’ के पास पुल बह गया, जिससे यातायात बाधित हो गया, और मसूरी-देहरादून मार्ग व्यापक भूस्खलन के कारण कई स्थानों पर बंद है.

देहरादून के पौंधा स्थित देवभूमि संस्थान परिसर में लगभग 200 छात्र जलभराव में फंसे हुए हैं,एसडीआरएफ की टीमें यहां बचाव अभियान में जुटी हैं.

एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमें रात भर प्रभावित स्थानों पर तैनात रहीं, निवासियों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया और लापता लोगों की तलाश और राहत कार्यों के लिए भारी मशीनरी तैनात की.

इस संबंध में एसडीआरएफ कमांडेंट अर्पण यदुवंशी ने अखबार को बताया, ‘घटनाओं की सूचना मिलने पर एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमें रातोंरात घटनास्थल पर पहुंच गईं. प्रभावित इलाकों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है. राहत और बचाव कार्य के लिए जेसीबी समेत भारी मशीनरी तैनात की गई है. लापता लोगों की तलाश युद्धस्तर पर जारी है.’

आपदा की गंभीर परिस्थितियों को देखते हुए देहरादून के जिलाधिकारी सविन बंसल ने सभी स्कूलों (कक्षा 12 तक) और आंगनवाड़ी केंद्रों में छुट्टी घोषित कर दी है, और एसडीआरएफ और राहत दल हाई अलर्ट पर हैं.

देहरादून के आईटी पार्क इलाके में जलभराव

देहरादून के आईटी पार्क इलाके में जलभराव की खबर है, जहां कई दफ्तरों में पानी घुस गया और लोग फंस गए हैं.

स्थानीय निवासी ऋतिक शर्मा ने अखबार कहा, ‘मैं सुबह 5:30 बजे से यहां फंसा हुआ हूं. यहां बहुत पानी है. यहां कार कल रात से फंसी हुई है और पानी में डूबी हुई है. दफ्तरों और बेसमेंट में पानी घुस गया है.’

गौरतलब है कि इस साल वर्षा से उत्पन्न आपदा ने देहरादून ज़िले में संपत्ति को भी भारी नुकसान पहुंचाया है, जिसमें 13 पुल, 10 पुलिया, 2 घर, 31 दीवारें, 21 सड़कें, 7 पेयजल योजनाएं और 24 रिटेनिंग वॉल शामिल हैं.

आधिकारिक तौर पर इस साल अप्रैल से उत्तराखंड में प्राकृतिक आपदाओं ने 87 लोगों की जान ले ली है, 131 घायल हुए हैं और 98 लोग अभी भी लापता हैं.