नई दिल्ली: अमेरिकी अभियोजकों ने अदालत में आरोप लगाया है कि भारत के पूर्व रॉ अधिकारी विकास यादव ने वादा किया था कि वे निखिल गुप्ता को हथियार उपलब्ध कराएंगे और यहां तक कि भारत से हथियार ले जाने के लिए एक विमान की अनुमति (क्लीयरेंस) भी दिलवा देंगे, ताकि गुप्ता उन हथियारों को उस शख्स को बेच सके जिसे वह एक तस्कर समझ रहा था. बदले में वही शख्स गुप्ता की मदद करता ताकि वह न्यूयॉर्क में एक सिख अलगाववादी की हत्या के लिए सुपारी किलर (भाड़े का हत्यारा) रख सके.
यह आरोप 22 सितंबर को अमेरिकी सरकार द्वारा न्यूयॉर्क की एक संघीय अदालत में दाखिल एक दस्तावेज़ में सामने आया है.
द वायर ने इस दस्तावेज़ को देखा है. यह दस्तावेज़ एक ‘मोशन इन लिमिने’ है – यह एक तरह का मुक़दमे से पहले का अनुरोध होता है जिसमें वकील जज से कहते हैं कि मुकदमे की शुरुआत से पहले तय कर दिया जाए कि जूरी को कौन-सा सबूत दिखाया जा सकता है और कौन-सा नहीं.
ज्ञात हो कि 52 वर्षीय निखिल गुप्ता पर आरोप है कि उसने सिख अलगाववादी गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की साजिश रचने की कोशिश की. पन्नू, अमेरिकी-कनाडाई नागरिक हैं और सिख्स फॉर जस्टिस नामक संगठन का जनरल काउंसल है. यह संगठन भारत में संगठन प्रतिबंधित है. गुप्ता पर मुकदमा 3 नवंबर से शुरू होना तय है.
अमेरिकी अभियोजकों ने सबसे पहले नवंबर 2023 में निखिल गुप्ता पर पन्नू की हत्या की साजिश रचने का आरोप लगाया था. उनका कहना था कि गुप्ता ने यह साजिश भारत सरकार के एक अधिकारी के आदेश पर रची थी, जिसे दस्तावेज़ों में सिर्फ ‘CC-1’ के नाम से पहचाना गया है.
इसके तीन हफ्ते बाद, 18 दिसंबर को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने विकास यादव को एक अलग मामले (अपहरण और रंगदारी) में गिरफ्तार कर लिया. यादव ने चार महीने तिहाड़ जेल में बिताए और फिर अप्रैल 2024 में उन्हें जमानत मिल गई. तब से अब तक उनका ठिकाना स्पष्ट नहीं है.
अक्टूबर 2024 में अमेरिकी अधिकारियों ने दूसरा ‘सुपरसिडिंग इंडिक्टमेंट’ (नया अभियोग पत्र) सार्वजनिक किया, जिसमें ‘CC-1’ की पहचान विकास यादव के रूप में की गई. दस्तावेज़ में उन्हें प्रधानमंत्री कार्यालय के अधीन कैबिनेट सचिवालय के एक अधिकारी के तौर पर बताया गया. जनवरी 2025 में भारत सरकार की एक उच्चस्तरीय समिति ने परोक्ष रूप से उनकी भूमिका को स्वीकार करते हुए उनके ख़िलाफ़ ‘क़ानूनी कार्रवाई’ की सिफारिश की.
अमेरिकी अभियोजकों की ताज़ा अर्जी (मोशन) के अनुसार, गुप्ता ऐसे व्यक्ति के साथ संबंध मज़बूत कर रहा था जिसे वह मादक पदार्थों (ड्रग्स) का तस्कर समझ रहा था. लेकिन हकीकत में वह व्यक्ति गुप्त रूप से अमेरिकी कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए काम कर रहा था.
अभियोजकों ने कहा, ‘पूरी साजिश के दौरान, जब वे पीड़ित की हत्या के लिए सुपारी देने पर बात कर रहे थे, उसी समय गुप्ता और सीएस (गोपनीय सूत्र) के बीच ड्रग और हथियारों की डील पर भी बातचीत चल रही थी. गुप्ता प्राग गया, जहां उसे गिरफ्तार किया गया. उसकी यात्रा का एक मक़सद सीएस से मिलना और इस सौदे को अंतिम रूप देना भी था.’
खबरों के मुताबिक, गुप्ता हथियारों की सप्लाई पाने के लिए यादव के पास गया था, जिन्हें वह बाद में ड्रग्स के बदले में देने वाला था.
‘हत्या के बाद मिलने थे हथियार’
22 जून 2023 के वॉट्सऐप मैसेज में यादव ने कथित तौर पर वादा किया कि वह ‘असॉल्ट राइफल और पिस्तौल’ उपलब्ध कराएंगे और यहां तक कि भारत से हथियार ले जाने के लिए एक विमान की क्लीयरेंस की व्यवस्था भी कर देंगे.
26 जून को गुप्ता ने यादव से दोबारा संपर्क किया और ‘टॉइज़’ (जिसे अभियोजक हथियारों के लिए इस्तेमाल किया गया एक कोड बताते हैं) के बारे में जानकारी मांगी. अभियोजकों का कहना है कि यादव ने फिर जवाब दिया कि वह हथियार तभी उपलब्ध करा पाएंगे जब हत्या का काम पूरा हो जाएगा.
अमेरिकी अभियोजकों ने दलील दी कि ये बातचीत दिखाती है कि यादव का कथित समर्थन पन्नू की हत्या पर निर्भर था. यानी हथियार उपलब्ध कराने की पेशकश सीधे हत्या की सुपारी वाली साजिश से जुड़ी हुई थी.
अभियोजक पहले के अभियोग पत्रों (indictments) में दावा कर चुके हैं कि गुप्ता और यादव केवल न्यूयॉर्क वाली साजिश तक सीमित नहीं थे, बल्कि उन्होंने अन्य संभावित हत्याओं पर भी चर्चा की थी. ताज़ा दस्तावेज़ में कहा गया है कि कम से कम एक और निशाना कैलिफ़ोर्निया में और एक अन्य भारतीय उपमहाद्वीप में था.
‘हैरान कर देने वाली समानता’
अभियोजक के जज को लिखे पत्र के अनुसार, ‘मई 2023 से, जब यादव ने गुप्ता से कहा था कि ‘मेरा नाम अमन सेव करो,’ तब से यादव ने वॉट्सऐप पर गुप्ता को बताया कि कई ‘टारगेट’ हैं, जिनमें न्यूयॉर्क वाला, एक कैलिफ़ोर्निया में और पते का ज़िक्र करते हुए कम से कम एक नेपाल या पाकिस्तान में है.’
नेपाल से जुड़ी बातचीत में यादव ने गुप्ता को टारगेट का ठिकाना दिया ताकि वह इसे सुपारी हत्यारों तक पहुंचा सके. गुप्ता उन्हें ‘सैनिक’ कहकर संबोधित करता था. 8 मई को गुप्ता ने यादव को लिखा कि लोग (नेपाल) पहुंच चुके हैं और टारगेट को ढूंढ रहे हैं.’ यादव ने गुप्ता पर दबाव डाला कि उन्हें ज़्यादा भुगतान किया जाए और कहा कि यह काम ‘जरूरी’ है. एक संदेश में यादव ने निर्देश दिया: ‘अगर उन्होंने सचमुच टारगेट पकड़ लिया है… तो उसे मार दें. नहीं तो हमें दूसरा मौका नहीं मिलेगा.’
अभियोजकों ने दलील दी कि ‘यादव और गुप्ता की नेपाल टास्क से जुड़ी बातचीत न्यूयॉर्क टास्क की बातचीत से काफी मिलती-जुलती थी,’ और उन्होंने नेपाल प्लॉट का वर्णन ‘हैरान कर देने वाली समानता’ वाला बताया, जो पन्नू योजना के समान था.
दस्तावेज़ में आगे गुप्ता के ड्रग और हथियार तस्करी के लंबे इतिहास का ज़िक्र है. अभियोजकों का आरोप है कि उसने सबसे पहले 2013 में मिले सरकार के गोपनीय स्रोत के साथ हेरोइन और हथियारों पर चर्चा की.
आगे बताया गया है कि 2017 में गुप्ता ने सीएस से कहा कि क्यूबा में $25,000 इकट्ठा करने के लिए कोरियर की व्यवस्था करें, और बताया कि वह पहले वहां गया था और $10,000 बिना डिक्लेयर किए बाहर ले आया था. बाद में उसने दावा किया कि उसका ‘मुख्य व्यवसाय’ पैसा भेजने का था. उसने गर्व से बताया कि वह क्यूबा से लॉस एंजेलेस तक $20 मिलियन के क्रेडिट कार्ड अपने पैरों से टेप लगाकर लाया, और $50 मिलियन इक्वाडोर से पनामा भेजे. अन्य संदेशों में उसने रोमानिया में $30,000-40,000 की पेमेंट की व्यवस्था करने में मदद मांगी.
जीमेल और अन्य रिकॉर्ड
एक महत्वपूर्ण खुलासा अक्टूबर 2023 में जारी किए गए सर्च वारंट के जवाब में गूगल से मिला. इस वारंट के तहत दो जीमेल खातों – onlybutt095@gmail.com और vikas0yadav@gmail.com के सब्सक्राइबर रिकॉर्ड, एक्सेस लॉग, रिकवरी कॉन्टैक्ट और सेवा उपयोग विवरण प्राप्त किए गए.

ये रिकॉर्ड दिखाते हैं कि दोनों अकाउंट्स में लॉग इन करने के लिए एक ही भारतीय आईपी पता इस्तेमाल हुआ. पहला खाता उस फोन नंबर से जुड़ा था, जिसका उपयोग गुप्ता के साथ वॉट्सऐप चैट में ‘अमानत’ नाम से किया गया था, जबकि दूसरा खाता यादव के नाम पर सब्सक्राइब किया गया था.
अभियोजकों के अनुसार, इन खातों की सामग्री में यादव की पहचान से जुड़ा सामग्री भी शामिल है.
– 2016 के ईमेल में एक व्यक्ति की तस्वीरें थीं जो यूनिफ़ॉर्म में था और जिस पर ‘Vikas Yadav’ का नाम टैग था.
– एक अन्य तस्वीर में वह व्यक्ति विमान के सामने खड़ा था, जिस पर ‘INDIAN’ शब्द साफ़ दिखाई दे रहा था.
– अन्य ईमेल में ‘Vikash Yadav’ नाम का पासपोर्ट स्कैन अटैच किया गया था.
– 2012 के एक संदेश में रिसर्च एंड एनालिसिस विंग में डायरेक्ट एंट्री के लिए असिस्टेंट कमांडेंट्स को आवेदन करने के लिए एक भर्ती सर्कुलर था, जिसमें इस पद को कैबिनेट सचिवालय का हिस्सा बताया गया था.

अमेरिकी सरकार ने जून 2023 का एक चेक (देश) पुलिस रिकॉर्ड भी दाखिल किया है. इस रिकॉर्ड में गुप्ता के प्राग में गिरफ्तार होने पर, उनके पास से मिले दो आईफोन और एक सैमसंग फोन भी शामिल है, जो चेक पुलिस ने अमेरिकी सरकार को सौंपा था. अभियोजकों का तर्क है कि चूंकि गुप्ता ने इस रिकॉर्ड पर साइन किया है, इसे ‘अडॉप्टिव एडमिशन’ माना जाना चाहिए और मुकदमे में उनके खिलाफ इस्तेमाल किया जा सकता है.

अलग से, अभियोजकों ने कहा कि ‘onlybutt095’ अकाउंट से मार्च 2023 का एक ईमेल, जिसका शीर्षक था ‘Photo from Amanat’, में क्रेडिट कार्ड और वेबसाइट की तस्वीरें अटैच थीं. उनका दावा है कि यह ईमेल गुप्ता के उपनाम ‘अमानत’ को इस अकाउंट से जोड़ने में मदद करता है.

गुप्ता के वकील ने बचाव में क्या कहा?
गुप्ता के वकीलों ने अपनी ओर से एक आवेदन दाखिल किया है, जिसमें उन्होंने जज से अपील की है कि इस कंटेंट का बड़ा हिस्सा मुकदमे से बाहर रखा जाए. उनका तर्क है कि टैक्स रिटर्न, कैबिनेट सचिवालय के वेतन पर्चे और रॉ भर्ती नोटिस का गुप्ता के हत्या की साजिश में शामिल होने से कोई संबंध नहीं है, और इससे जूरी के सामने यह गलत धारणा बन सकती है कि भारतीय खुफिया एजेंसी इस योजना के पीछे थी, जबकि इसका कोई सीधा सबूत नहीं है.
बचाव पक्ष ने सरकार की उस योजना का भी विरोध किया है जिसमें यूके स्थित अकादमिक निताशा कौल को भारतीय राजनीति और खुफिया मामलों पर विशेषज्ञ गवाह के तौर पर बुलाया जाना था.
उनका कहना है कि उनकी गवाही स्वतंत्र विशेषज्ञता नहीं, बल्कि राजनीतिक टिप्पणी है. इसके अलावा, उन्होंने हत्या किए गए कनाडाई सिख नेता हरदीप सिंह निज्जर का प्रस्तावित वीडियो दिखाने का भी विरोध किया, यह तर्क देते हुए कि इससे जूरी भावनात्मक रूप से प्रभावित होगी, जबकि गुप्ता के कार्यों से इसका कोई संबंध नहीं है.
इसके अलावा, गुप्ता के वकीलों ने चेक फोन सौंपने के रिकॉर्ड की अदालती स्वीकार्यता पर सवाल उठाया, यह कहते हुए कि अमेरिकी अधिकारियों ने प्राग के साथ म्यूचुअल लीगल असिस्टेंस ट्रिटी (MLAT) के तहत सही प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया.
गुप्ता के बचाव को पहले के सुनवाई में कई झटके भी लगे हैं. 17 सितंबर को जज विक्टर मारेरो ने फैसला सुनाया कि अमेरिकी अभियोजक कुछ गोपनीय दस्तावेज़ (classified documents) को क्लासिफाइड इन्फॉर्मेशन प्रोसीजर्स एक्ट (CIPA) के तहत छुपा सकते हैं. जज ने सरकार की दलील स्वीकार की कि खुलासा करने से राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा पैदा हो सकता है और कहा कि गुप्ता के पास पहले से ही समान स्तर की गैर-गोपनीय जानकारी उपलब्ध थी.
26 अगस्त को उसी जज ने गुप्ता की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें उन्होंने प्राग में अपनी गिरफ्तारी से संबंधित अमेरिकी ड्रग एनफोर्समेंट एडमिनिस्ट्रेशन (डीईए) और चेक पुलिस के बीच की बातचीत प्राप्त करने की मांग की थी. बचाव पक्ष के वकीलों ने तर्क दिया था कि यूरोप में डीईए अटैचेज़ गिरफ्तारी में सक्रिय भागीदार थे, लेकिन अदालत ने पाया कि उन्होंने केवल लॉजिस्टिक सहायता की थी और ऐसा कोई काम नहीं किया जिससे रिकॉर्ड्स तैयार हुए हों.
इस साल की शुरुआत में, गुप्ता के वकील ने एक मनी लॉन्ड्रिंग आरोप को रद्द करने की कोशिश की, जिसे एक सुपरसिडिंग इंडिक्टमेंट में जोड़ा गया था. उनका तर्क था कि यह आरोप उस समय मंजूर नहीं था जब उन्हें प्राग से प्रत्यर्पित किया गया था. अदालत ने इस आरोप को कायम रहने की अनुमति दी.
बचाव पक्ष ने गुप्ता के फोन से प्राप्त सबूतों की स्वीकृति पर भी चुनौती दी, यह कहते हुए कि अमेरिकी और चेक अधिकारी मिलकर कार्य किए लेकिन उन्होंने गुप्ता को अपने अधिकारों के बारे में सही तरीके से नहीं बताया. इस तर्क को जज ने स्वीकार नहीं किया.
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