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देवीरूपा मित्रा

भारत द्वारा अफ़ग़ान नागरिकों को आपातकालीन वीज़ा देने में देरी करना निराशाजनक: राजदूत

भारत में अफ़ग़ानिस्तान के राजदूत फ़रीद मामुनड्ज़े ने कहा कि यह बेहद दुखद है कि जब कठिन वक़्त में अफ़ग़ान नागरिकों को भारतीय मदद की ज़रूरत थी, तो उनकी मदद नहीं की गई. अब तक भारत ने अफ़ग़ानिस्तान से 669 लोगों को निकाला है, जिसमें 448 भारतीय और 206 अफ़ग़ान नागरिक हैं.

संभावित सर्विलांस के निशाने पर थे दुनियाभर के चौदह नेता

पेगासस प्रोजेक्ट: एनएसओ ग्रुप के ग्राहक देशों द्वारा इस्तेमाल किए गए फोन नंबरों का लीक डेटा बताता है कि कम से कम एक शाही परिवार प्रमुख और वर्तमान में कार्यरत तीन राष्ट्रपतियों व तीन प्रधानमंत्रियों को पेगासस स्पायवेयर के ज़रिये होने वाली संभावित हैकिंग के लिए चुना गया था.

भारत के लिए महत्वपूर्ण मुद्दों पर क्या होगा बाइडेन प्रशासन का रुख़

जो बाइडेन के नेतृत्व में नए अमेरिकी प्रशासन से भारत को व्यापार, प्रवासी और बड़े सामरिक मुद्दों पर एक सकारात्मक रुख़ की उम्मीद रहेगी.

श्रीलंका के 20वें संविधान संशोधन के प्रभावों को लेकर भारत क्यों चिंतित है

श्रीलंकाई सरकार 20वां संविधान संशोधन लाकर 19वें संविधान संशोधन द्वारा राष्ट्रपति की शक्तियों पर नियंत्रण लगाने वाले प्रावधानों को ख़त्म करने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रही है. भारत की चिंता नया संशोधन नहीं बल्कि 1987 का द्विपक्षीय समझौता है, जो बदली हुई राजनीतिक परिस्थितियों में ख़तरे में पड़ सकता है.

हिंसक झड़प के बाद चीन ने दशकों में पहली बार गलवान घाटी पर संप्रभुता का दावा किया

भारत ने गलवान को हमेशा से उस क्षेत्र के बतौर देखा है, जहां लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल को लेकर कोई विवाद ही नहीं रहा.

‘चीन के अड़ियल रवैये का कारण उसकी नई अर्थव्यवस्था और मिलिट्री क्षमता है’

द वायर ने भारत और चीन के बीच चल रहे तनाव पर पूर्व विदेश सचिव और चीन में भारतीय राजदूत रहीं निरूपमा राव से बातचीत की.

क्या सिक्किम बॉर्डर पर भारत-चीन विवाद की असली वजह भूटान है?

चीन और भारत की सभी सरकारें ये स्वीकार करती आई हैं कि सिक्किम क्षेत्र में दोनों देशों के मध्य सीमा-निर्धारण हो चुका है.

ईरान में रूहानी बनाम रईसी: एक तरफ उदारीकरण, दूसरी तरफ ‘जिहादी मैनेजमेंट’

एक तरफ ईरान पश्चिमी एशिया में विरोधी सुन्नी अरब देशों और इस्राइल से घिरा हुआ नजर आ रहा है, तो दूसरी तरफ वह अमेरिकी ट्रंप प्रशासन के निशाने पर भी है. इस निर्णायक मोड़ पर बिना किसी अड़चन के नयी सरकार का गठन ईरान की स्थिरता के लिए बेहद जरूरी है. ईरान से द वायर संवाददाता देवीरूपा मित्रा की रिपोर्ट.