बंगाल एसआईआर: चुनाव आयोग राज्य के बाहर काम करने वाले प्रवासी पेशेवरों की जांच करेगा

पश्चिम बंगाल की मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) जब आगामी अक्तूबर महीने में शुरू होगा, तो राज्य के बाहर काम करने वाले लोगों, जिनमें प्रवासी श्रमिकों का एक बड़ा समूह भी शामिल है, को गणना फॉर्म भरते समय यह घोषणा करनी होगी कि वे कहीं और मतदाता के रूप में पंजीकृत नहीं हैं.

बताया गया है कि दूसरे राज्यों में काम करने वाले लोग गणना फॉर्म को स्कैन करके भरकर ऑनलाइन जमा कर सकते हैं. लेकिन उन्हें यह घोषणा करनी होगी कि उनके काम करने की जगह पर उनका नाम मतदाता के तौर पर पंजीकृत नहीं है. (प्रतीकात्मक फोटो: निर्वाचन आयोग)

नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) जब आगामी अक्तूबर महीने में शुरू होगा, तो राज्य के बाहर काम करने वाले लोगों, जिनमें प्रवासी श्रमिकों का एक बड़ा समूह भी शामिल है, को गणना फॉर्म भरते समय यह घोषणा करनी होगी कि वे कहीं और मतदाता के रूप में पंजीकृत नहीं हैं.

द टेलीग्राफ की खबर के मुताबिक, भारत निर्वाचन आयोग के एक सूत्र ने बताया, ‘अन्य राज्यों में काम करने वाले लोगों को, अगर वे बंगाल की मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराना चाहते हैं, तो उन्हें एक घोषणापत्र पर हस्ताक्षर करना होगा कि जिन राज्यों में वे काम करते हैं, वहां उनका नाम मतदाता के रूप में पंजीकृत नहीं है. ऐसा यह सुनिश्चित करने के लिए किया जा रहा है कि कोई भी व्यक्ति एक से ज़्यादा जगहों पर मतदाता के रूप में पंजीकृत न हो.’

सूत्रों ने यह भी बताया कि बाहरी कामगारों को गणना फॉर्म ऑनलाइन भरने की अनुमति दी जाएगी क्योंकि उनके लिए राज्य में आकर यह प्रक्रिया पूरी करना मुश्किल होगा. बताया गया है कि बंगाल में गणना फॉर्म मतदाताओं के घरों पर वितरित किए जाएंगे.

एक अन्य सूत्र के अनुसार, ‘बिहार की तरह ही पश्चिम बंगाल में भी एक क्यूआर स्कैनर जैसी व्यवस्था भी हो सकती है. दूसरे राज्यों में काम करने वाले लोग गणना फॉर्म को स्कैन करके भरकर ऑनलाइन जमा कर सकते हैं. लेकिन उन्हें यह घोषणा करनी होगी कि उनके काम करने की जगह पर उनका नाम मतदाता के तौर पर पंजीकृत नहीं है.’

सूत्रों ने अखबार को बताया कि प्रवासी मज़दूरों को अतिरिक्त दस्तावेज़ जमा करने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी.

इस संबंध में एक सूत्र ने कहा, ‘अगर उनके या उनके माता-पिता के नाम 2002 की मतदाता सूची में हैं, तो वे अपना ईपीआईसी (एपिक) नंबर और उस भाग संख्या का उल्लेख करके गणना फ़ॉर्म जमा कर सकते हैं, जहां वे 2002 की मतदाता सूची के अनुसार मतदाता थे. लेकिन अगर उनका नाम 2002 की सूची में नहीं है, लेकिन उनके माता-पिता का नाम है, तो उन्हें अपने माता-पिता का विवरण देना होगा और आधार सहित चुनाव आयोग द्वारा सूचीबद्ध 12 पहचान पत्रों में से कोई भी एक, गणना फ़ॉर्म के साथ संलग्न करना होगा.’

ज़िला प्रशासनों से बाहरी कामगारों की सूची तैयार करने को कहा गया है

सूत्र ने आगे कहा, ‘चुनाव आयोग यह घोषणा करेगा कि राज्य के बाहर काम करने वालों को अपने गणना फॉर्म के साथ क्या जमा करना होगा, अगर एसआईआर शुरू होने से पहले न तो उनका और न ही उनके माता-पिता का नाम 2002 की मतदाता सूची में आता है.’

इस संबंध में चुनाव आयोग ने ज़िलाधिकारियों से बाहरी कामगारों की सूची तैयार करने को कहा है.

एक सूत्र के मुताबिक, ‘चुनाव आयोग एसआईआर शुरू होने से पहले राज्य के बाहर काम करने वाले सभी बंगाल निवासियों से संपर्क करेगा. चुनाव आयोग लक्षित कामगारों को गणना फॉर्म भरने की प्रक्रिया की जानकारी देने के लिए एक व्यापक अभियान चलाएगा. इस अभियान के अलावा, ज़िला अधिकारी राज्य में रहने वाले कामगारों के परिजनों से संपर्क करके उन्हें इस प्रक्रिया से अवगत कराएंगे.’

शुरुआती अनुमानों के अनुसार, ज़िला अधिकारियों ने चुनाव आयोग को सूचित किया है कि प्रवासी मज़दूरों की कुल संख्या लगभग 22 लाख हो सकती है. वहीं, कुछ अधिकारियों का कहना है कि यह संख्या और भी ज़्यादा हो सकती है, क्योंकि राज्य कोविड-19 महामारी के दौरान लगभग 40 लाख प्रवासी मज़दूरों को अन्य राज्यों से बंगाल वापस लाया था.

चुनाव आयोग के एक अधिकारी ने कहा, ‘इस संख्या में कमी आने की संभावना बहुत कम है. चूंकि राज्य महामारी के बाद रोज़गार के अवसर पैदा करने में विफल रहा है, इसलिए पिछले कुछ वर्षों में यह संख्या बढ़ने की पूरी संभावना है. इस संबंध में ज़िलाधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे एसआईआर के पूरी तरह शुरू होने से पहले प्रवासी मज़दूरों की पूरी जानकारी के साथ एक सूची तैयार करें.’

सूत्रों ने बताया कि विवाद से बचने के लिए चुनाव आयोग एसआईआर के दौरान बंगाल में प्रवासी कामगारों के नाम दर्ज करने को लेकर सतर्क है.

अगर बंगाल के बाहर काम करने वालों को एसआईआर के दौरान ठीक से शामिल नहीं किया जाता है, तो बड़ी संख्या में नाम हटाए जा सकते हैं, जिससे चुनाव आयोग के सूत्रों का मानना ​​है कि अनावश्यक विवाद पैदा हो सकता है.

सूत्रों ने बताया कि चूंकि बंगाल की मतदाता सूची में मृत और स्थानांतरित मतदाताओं के मौजूद होने की संभावना है, इसलिए माना जा रहा है कि कई नाम वैसे भी काटे जाएंगे.

इस संबंध में चुनाव आयोग के एक अधिकारी ने कहा, ‘अगर प्रवासियों को एसआईआर के दौरान ठीक से शामिल नहीं किया जाता है, तो हटाए गए मतदाताओं की संख्या बहुत बड़ी हो जाएगी. इससे चुनाव आयोग की आलोचना निश्चित रूप से हो सकती है.’