साहित्य अकादेमी के सचिव की बर्ख़ास्तगी की मांग को लेकर पटना में विरोध प्रदर्शन

पटना में साहित्य अकादेमी के ‘उन्मेष 2025’ साहित्य उत्सव के उद्घाटन पर लेखकों और संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया. सचिव डॉ. के. श्रीनिवास राव पर यौन उत्पीड़न के आरोपों को लेकर बर्ख़ास्तगी की मांग उठी. प्रदर्शनकारियों ने साहित्यिक उत्सव के बहिष्कार की अपील की.

साहित्य अकादेमी के सचिव की बर्खास्तगी की मांग को लेकर पटना में हुआ विरोध प्रदर्शन. (फोटो: स्पेशल अरेंजमेंट)

नई दिल्ली: बिहार की राजधानी पटना में कल, 25 सितंबर 2025 को साहित्य अकादेमी द्वारा आयोजित ‘उन्मेष: अंतरराष्ट्रीय साहित्य उत्सव’ के उद्घाटन सत्र के दौरान जोरदार विरोध प्रदर्शन हुआ.

जलेस (जनवादी लेखक संघ), जसम (जन संस्कृति मंच), प्रलेस (प्रगतिशील लेखक संघ), अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला एसोसिएशन (एपवा) सहित कई संगठनों के कार्यकर्ताओं, लेखकों, पत्रकारों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों ने ज्ञान भवन (सम्राट अशोक कनवेंशन केंद्र) के प्रवेश द्वार पर बैनर और पोस्टर लेकर साहित्य अकादेमी के सचिव डॉ. के. श्रीनिवास राव के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोपों को लेकर तीखा विरोध किया.

सचिव को तत्काल बर्ख़ास्त करने की मांग

साहित्य अकादेमी के चार दिवसीय सम्मेलन का बहिष्कार करने के लिए सुबह से ही प्रदर्शनकारी ज्ञान भवन के बाहर एकत्रित होने लगे थे. पुलिस द्वारा उन्हें सभा स्थल से हटाने का प्रयास किया गया, लेकिन प्रदर्शनकारी डटे रहे और अपना प्रतिरोध जारी रखा.

(फोटो: स्पेशल अरेंजमेंट)

प्रदर्शनकारियों ने पर्चे वितरित करते हुए लेखकों और आमजन से अपील की कि वे साहित्य अकादेमी के इस आयोजन का बहिष्कार करें और न्याय के पक्ष में खड़े हों.

प्रदर्शनकारी संगठनों की तीन प्रमुख मांगें हैं:

  • साहित्य अकादेमी के सचिव डॉ. के. श्रीनिवास राव को तत्काल बर्ख़ास्त किया जाए
  • पीड़िता को सुरक्षित कार्यस्थल उपलब्ध कराया जाए
  • यौन उत्पीड़न जैसे गंभीर मामलों में जवाबदेही तय की जाए
(फोटो: स्पेशल अरेंजमेंट)

क्या है इस विवाद की पृष्ठभूमि?

19 सितंबर, 2025 को द वायर हिंदी ने ख़बर प्रकाशित की थी कि साहित्य अकादेमी ने यौन उत्पीड़न की शिकायत करने वाली महिला कर्मचारी का साथ देने के बजाय उन्हें ‘काम में खराब प्रदर्शन’ के नाम पर नौकरी से निकाल दिया था.

इस ख़बर के प्रकाशित होने के बाद से सचिव को पद से हटाने मांग शुरू हो गई थी.

दिल्ली हाईकोर्ट ने 28 अगस्त 2025 के अपने फैसले में इस बर्ख़ास्तगी को अवैध और ‘बदले की कार्रवाई’ मानते हुए महिला को उनके पद पर दुबारा बहाल करने का आदेश दिया है. साथ ही अदालत ने लोकल कंप्लेंट्स कमेटी (एलसीसी) को सचिव के खिलाफ जांच करने का निर्देश दिया है.

अदालत ने टिप्पणी की, ‘यदि अकादेमी, एक प्रमुख सांस्कृतिक संस्थान के रूप में, कानून द्वारा अपेक्षित खुलेपन और जिम्मेदारी के साथ कार्य करती तो वर्तमान विवाद से बचा जा सकता था.’

यौन उत्पीड़न का मामला

2019 में साहित्य अकादेमी की एक महिला कर्मचारी ने सचिव डॉ. के. श्रीनिवास राव पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज की थी. आरोप है कि फरवरी 2018 में उनकी नियुक्ति के तुरंत बाद सचिव ने उनका यौन उत्पीड़न शुरू कर दिया था.

महिला ने 7 नवंबर 2019 को अकादेमी के अध्यक्ष को ईमेल कर मामले की जानकारी दी, लेकिन अध्यक्ष और आईसीसी के सदस्यों ने उन पर शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया. अंततः 29 नवंबर 2019 को महिला ने एलसीसी में औपचारिक शिकायत दर्ज की.

(फोटो: अंकित राज/द वायर हिंदी)

व्यापक विरोध और बहिष्कार की अपील

मामले के सामने आने के बाद हिंदी जगत में व्यापक आक्रोश देखा गया है. करीब 250 हस्ताक्षर के साथ एक अपील जारी की गई, जिसमें अशोक वाजपेयी, वीरेंद्र यादव, पंकज बिष्ट, कात्यायनी, विष्णु नागर, अनीता भारती, आनंद स्वरूप वर्मा, असद जैदी, रणेंद्र, कौशल किशोर, मनोज कुमार सिंह, अमिता शीरीन, शम्सुल इस्लाम, भाषा सिंह, सीमा आज़ाद जैसे लेखकों, साहित्यकारों और कार्यकर्ता शामिल हैं.

अपील में लिखा है, ‘हम भारत सरकार से अपील करते हैं कि वह साहित्य अकादेमी, दिल्ली के सचिव के श्रीनिवास राव को, उनकी ही अधीनस्थ महिला कर्मचारी द्वारा लगाये गये सतत यौन उत्पीड़न के आरोप को संज्ञान में लेते हुए तत्काल प्रभाव से निलंबित करे, साथ ही आरोपी का हर क़दम पर साथ देने तथा पीड़िता को डराने धमकाने और आरोप वापस लेने के लिए दबाव बनाने की अकादेमी के अध्यक्ष माधव कौशिक की अनुचित कोशिश को गंभीर कदाचार मानते हुए उस पर जांच बैठाए।’

अपील में साहित्य में ‘साहित्यकारों’ और ‘अन्य लोकतांत्रिक चेतना सम्पन्न’ लोगों से आग्रह किया गया है कि इस हालात में अकादेमी के साथ सहयोग न करें।

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अपील की प्रति.

वरिष्ठ साहित्यकार वीरेंद्र यादव ने सोशल मीडिया पर लिखा, ‘यौन उत्पीड़न के आरोपी साहित्य अकादेमी के सचिव के खिलाफ़ लेखकों और संस्कृतिकर्मियों की अपील. जो लेखक साथी पटना के ‘उन्मेष’ कार्यक्रम में शामिल होने के लिए अपनी पूर्व सहमति दे चुके हैं, वे अपने निर्णय पर पुनर्विचार कर अपने प्रतिरोध को दर्ज करें.’

जनवादी लेखक संघ का प्रस्ताव

जनवादी लेखक संघ ने अपने 11वें राष्ट्रीय सम्मेलन (19-21 सितंबर, बांदा) में एक प्रस्ताव पारित कर सचिव के तत्काल निलंबन की मांग की.

संगठन ने कहा:

यह शर्मनाक है कि हमारे देश की केंद्रीय साहित्यिक संस्था के सचिव यौन उत्पीड़न के आरोपी हैं और अदालत का फैसला पीड़िता के पक्ष में आने के बावजूद लगातार पद पर बने हुए हैं. …अदालत के इस फ़ैसले के बाद उनका पद पर बने रहना हर दृष्टि से अनुचित ही नहीं, शर्मनाक है. जनवादी लेखक संघ का यह ग्यारहवां राष्ट्रीय सम्मेलन सचिव पद से के. श्रीनिवास राव के तत्काल प्रभाव से निलंबन की मांग करता है और लेखकों से अपील करता है कि उनका निलंबन न होने की सूरत में अकादेमी के सभी कार्यक्रमों का बहिष्कार करें.

महिला संगठनों की प्रतिक्रिया

बिहार महिला समाज ने एक कड़ा बयान जारी कर सचिव राव को तुरंत हटाने की मांग की है. संगठन की अध्यक्ष निवेदिता झा ने कहा, ‘यह शर्मनाक है कि साहित्य अकादेमी ने पीड़िता का साथ देने के बजाय उसकी नौकरी समाप्त कर दी थी. इतने गंभीर आरोपों के बावजूद राव का पद पर बने रहना ‘बलात्कार संस्कृति’ को संरक्षण देना है.’

सरकारी सम्मान का विवाद

दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले से मात्र 5 दिन पहले, 23 अगस्त 2025 को बिहार सरकार के राजभाषा विभाग ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की उपस्थिति में सचिव को ‘बाबू गंगा शरण सिंह पुरस्कार’ से सम्मानित किया था. यह एक लाख रुपये और प्रशस्ति पत्र के साथ दिया गया.

बिहार सरकार के राजभाषा विभाग ने सचिव को यह पुरस्कार ‘हिंदी भाषा और साहित्य में उनके उत्कृष्ट योगदान’ के लिए दिया है.

जन संस्कृति मंच ने इस पुरस्कार को वापस लेने की मांग की है.

पटना में उन्मेष 

बिहार सरकार के सहयोग से साहित्य अकादेमी द्वारा आयोजित चार दिवसीय उत्सव (25-28 सितंबर) पटना के ज्ञान भवन में हो रहा है. इसमें देश-विदेश के 500 से ज्यादा लेखक शामिल हो रहे हैं, जो 90 से अधिक सत्रों में 100 से ज्यादा भाषाओं का प्रतिनिधित्व करेंगे.

उत्सव का उद्घाटन बिहार के राज्यपाल आरिफ़ मोहम्मद खान ने किया. आयोजन का उद्देश्य वैश्विक साहित्यिक संवाद और सांस्कृतिक साझेदारी को बढ़ावा देना है.