योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया बयानों व आयोजनों के ज़रिये ‘अखंड भारत’ की अवधारणा को नए सिरे से सार्वजनिक किया जा रहा है. इतिहासकार इसे तथ्यहीन और राजनीतिक नारा बताते हैं, जो हिंदुत्व की वैचारिक परियोजना, इतिहास की पुनर्व्याख्या और धार्मिक राष्ट्रवाद से गहराई से जुड़ा है.
‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद भारत सरकार ने 32 देशों में सात बहुदलीय प्रतिनिधिमंडल भेजने पर 13 करोड़ रुपये से अधिक ख़र्च किए. लेकिन सवाल यह है कि क्या इस महंगे कूटनीतिक अभियान से भारत को कोई ठोस अंतरराष्ट्रीय समर्थन या रणनीतिक लाभ मिला?
सरकार ने ई20 पेट्रोल के प्रचार पर करदाताओं का पैसा ख़र्च किया है या नहीं- इस बारे में आरटीआई के ज़रिये जानकारी मांगी गई, पर सरकार ने स्पष्ट जवाब नहीं दिया. सरकारी तेल कंपनियों ने एक ही तरह के सवालों पर अलग जवाब दिए. जहां भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने ‘व्यावसायिक गोपनीयता’ का हवाला देकर जानकारी नहीं दी, वहीं इंडियन ऑयल ने कहा कि ‘मांगी गई जानकारी काल्पनिक प्रकृति की है.’
छत्तीसगढ़ सरकार ने स्थापना दिवस के प्रचार पर क़रीब 6 करोड़ 90 लाख रुपये ख़र्च किए, जबकि राज्य के स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालयों का वार्षिक फंड लगभग 64 प्रतिशत घटा दिया गया है. स्कूलों के सामने बिजली बिल चुकाने समेत बुनियादी ज़रूरतें पूरी करने का संकट खड़ा हो गया है.
विश्व हिंदू परिषद ने ‘सांस्कृतिक सजगता’ के नाम पर हिंदुओं से क्रिसमस न मनाने की अपील की है. क़ानून के जानकारों का कहना है कि यह धार्मिक स्वतंत्रता और संविधान की प्रस्तावना में निहित बंधुत्व के सिद्धांत के विरुद्ध है.
भारतीय फिल्म एवं टेलीविज़न संस्थान (एफटीआईआई), ईटानगर का पहला बैच अधूरे कैंपस, बुनियादी ढांचे की कमी और प्रशासनिक अव्यवस्था के खिलाफ तीसरी बार शैक्षणिक हड़ताल पर है. छात्रों का कहना है कि संस्थान वादों पर खरा नहीं उतरा और वे तब तक कक्षाओं में नहीं लौटेंगे, जब तक सभी आवश्यक शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई जातीं.
नेशनल कैम्पेन कमेटी फॉर इरेडिकेशन ऑफ बॉन्डेड लेबर द्वारा जारी नई रिपोर्ट बताती है कि भारत में बंधुआ मज़दूरी आज भी गहराई से जाति आधारित शोषण पर टिकी है. रिपोर्ट बताती है कि बचाए गए 950 बंधुआ मज़दूरों में एक भी सवर्ण समुदाय से नहीं था. इसी तरह 80% मामलों में एफआईआर तक दर्ज नहीं हुई. पुनर्वास, मुआवजा और क़ानूनी कार्रवाई- तीनों मोर्चों पर हालात बेहद ख़राब हैं.
कांग्रेस की विफलता को इस तरह देखिए कि पार्टी ने इस साल दलित नेता राजेश कुमार को बिहार का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया था, पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी दलित हैं. ये दोनों मिलकर बिहार के दलित समुदाय को अपनी ओर ला सकते थे, लेकिन पार्टी का चुनाव प्रचार पूरी तरह राहुल गांधी के इर्द-गिर्द घूमता रहा.
जेएनयू छात्र संघ में वाम एकता की जीत के बाद महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय में नारे लगाने वाले दस छात्रों को छात्रावास से निलंबित कर दिया गया है. प्रशासन के अनुसार इन विद्यार्थियों ने 'सॉरी-सॉरी सावरकर, आरएसएस का छोटा बंदर, भाग नरेंद्र भाग नरेंद्र' नारे लगाए थे, जबकि छात्रों ने कहा उन्होंने 'बाल नरेंद्र-बाल नरेंद्र' कहा था.
जामिया मिल्लिया इस्लामिया के 105वें स्थापना दिवस समारोह को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. छात्र संगठनों ने 'म्यूज़िक एंड डांस परफॉर्मेंस- अखंड भारत', ‘संस्कृत क़व्वाली’ और दिल्ली पुलिस के गायन कार्यक्रम पर आपत्ति जताई है. उनका कहना है कि ये आयोजन जामिया की धर्मनिरपेक्ष और समावेशी परंपरा के ख़िलाफ़ हैं.
विश्व हिंदू परिषद ने छठ पूजा के मौके पर ‘जिहादी-मुक्त दिल्ली’ अभियान के तहत ‘सनातन प्रतिष्ठा’ स्टिकर जारी किया है. संगठन का दावा है कि यह ‘शुद्ध पूजा सामग्री’ के लिए है, लेकिन यह मुसलमान व्यापारियों के आर्थिक बहिष्कार की एक और रणनीति दिखाई देती है.
विश्व हिंदू परिषद के एक कार्यक्रम में भाजपा सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने दिल्ली का नाम बदलकर ‘इंद्रप्रस्थ’ करने का संकल्प लिया. उन्होंने पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन और इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का नाम भी बदलने की घोषणा की, इसे सांस्कृतिक स्वाभिमान की पुनर्स्थापना बताया.
जनजातीय कार्य मंत्रालय की संस्था ने सभी एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों को छात्रों में ‘हिंदी भाषा के प्रति रुचि’ जगाने का निर्देश दिया है. परिपत्र में कहा गया है कि हिंदी सिखाने की ज़िम्मेदारी सभी शिक्षकों की होगी.
पूर्व जज एस. मुरलीधर ने प्रो. जीएन साईबाबा मेमोरियल लेक्चर में कहा कि आरएसएस विभाजनकारी एजेंडा और भ्रामक इतिहास पढ़ा रहा है. उन्होंने शिक्षा में युवाओं के दिमाग पर कब्ज़ा, संस्थागत हस्तक्षेप और अकादमिक स्वतंत्रता पर सवाल उठाए, और साईबाबा के केस के माध्यम से न्यायपालिका की कार्यप्रणाली पर चिंता जताई.
सुप्रीम कोर्ट में देश के मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई पर जूता फेंकने की कोशिश महज़ एक सनकी हरकत नहीं, बल्कि हफ्तों से चल रहे दक्षिणपंथी अभियान का नतीजा मालूम पड़ता है. अजीत भारती जैसे हिंदू दक्षिणपंथी यूट्यूब क्रिएटर और अन्य लगातार सीजेआई गवई के ख़िलाफ़ नफ़रत फैला रहे थे.