सुप्रीम कोर्ट ने ‘मुठभेड़’ में मारे गए शीर्ष माओवादी नेता के शव को सुरक्षित रखने का निर्देश दिया

सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ पुलिस को नारायणपुर जिले में कथित फर्जी मुठभेड़ में मारे गए शीर्ष माओवादी नेता काटा रामचंद्र रेड्डी के शव को सुरक्षित रखने का निर्देश दिया है. उनके बेटे राजा चंद्र ने याचिका में अनुरोध किया है कि इस मामले की जांच स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए, जिसमें छत्तीसगढ़ के अधिकारी शामिल न हों.

(प्रतीकात्मक तस्वीर: पीटीआई फाइल)

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (26 सितंबर) को छत्तीसगढ़ पुलिस को नारायणपुर जिले में कथित फर्जी मुठभेड़ में मारे गए शीर्ष माओवादी नेता काटा रामचंद्र रेड्डी के शव को सुरक्षित रखने का निर्देश दिया.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस एजी मसीह की पीठ ने कहा कि जब तक फर्जी मुठभेड़ और यातना का आरोप लगाने वाली याचिका पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट द्वारा निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक शव को दफनाया या दाह संस्कार न किया जाए.

पीठ ने निर्देश दिया, ‘जब तक हाईकोर्ट याचिका पर फैसला नहीं सुना देता, तब तक शव का अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा.’ साथ ही अदालत ने हाईकोर्ट से दुर्गा पूजा की छुट्टियों के बाद दोबारा खुलने पर याचिका पर विचार करने का अनुरोध किया.

पीठ ने कहा कि वह इस वक्त सभी दलीलों को खुला छोड़ रही है और मामले के गुण-दोष पर कोई राय नहीं दे रही है.

मालूम हो कि याचिकाकर्ता मृतक रामचंद्र रेड्डी के बेटे राजा चंद्र की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कॉलिन गोंजाल्विस ने दलील दी कि उनके पिता को कथित तौर पर प्रताड़ित किया गया और फर्जी मुठभेड़ में उनकी हत्या कर दी गई तथा पुलिस शव को ठिकाने लगाने की कोशिश कर रही है.

राज्य पुलिस की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि मुठभेड़ में दो लोग मारे गए थे और याचिकाकर्ता के पिता पर सात राज्यों ने 7 करोड़ रुपये का इनाम रखा था.

उन्होंने पीठ को बताया कि इसी मुठभेड़ में मारे गए एक माओवादी का शव उसके परिवार को दे दिया गया और उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया, जबकि याचिकाकर्ता के पिता का शव अस्पताल में है.

सॉलिसिटर जनरल मेहता ने कहा कि पोस्टमार्टम वीडियो रिकॉर्डिंग के तहत किया गया था और पुलिस पर कोई दुर्भावना का आरोप नहीं लगाया जा सकता.

पीठ ने कहा कि याचिका में अनुरोध किया गया है कि कथित फर्जी मुठभेड़ मामले की जांच स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए, और उसमें छत्तीसगढ़ के अधिकारी शामिल न हों. साथ ही, नए सिरे से पोस्टमार्टम कराने का अनुरोध किया गया है.

पीठ ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन मामले को तत्काल सूचीबद्ध नहीं किया जा सका, क्योंकि इसमें कुछ समय लगना था, इसलिए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया.

याचिकाकर्ता राजा चंद्रा, जो हैदराबाद स्थित नालसार विधि विश्वविद्यालय में शोधकर्ता रहे हैं, ने छत्तीसगढ़ सरकार को अपने पिता के शव को सरकारी मुर्दाघर में सुरक्षित रखने, पोस्टमार्टम करने और सीबीआई से उनके पिता की मृत्यु/हत्या की जांच करने का निर्देश देने का अनुरोध किया है. यह जांच छत्तीसगढ़ के बाहर के अधिकारियों द्वारा करवाई जाए.

ज्ञात हो कि 22 सितंबर को अबूझमाड़ के जंगलों में पुलिस ने दो शीर्ष माओवादी नेताओं को कथित मुठभेड़ में मारने का दावा किया था. उनकी पहचान कोसा दादा उर्फ ​​कडारी सत्यनारायण रेड्डी (67) और राजू दादा उर्फ ​​काटा रामचंद्र रेड्डी (63) के रूप में की थी. वे दोनों तेलंगाना के अविभाजित करीमनगर ज़िले से थे.

वहीं, दंडकारण्य स्पेशल ज़ोनल कमेटी (डीकेएसजेडसी) ने इन दोनों को फर्जी मुठभेड़ में मारने का आरोप लगाया है.

डीकेएसजेडसी ने 23 सितंबर को एक बयान जारी कर कहा कि कडारी सत्यनारायण रेड्डी और रामचंद्र रेड्डी पिछले कुछ समय से पार्टी के गुरिल्ला दस्तों के साथ जंगल में काम नहीं कर रहे थे.

इसमें कहा गया है, ‘उन्हें 11 सितंबर के बाद रायपुर शहर या कहीं और से एक साथ या अलग-अलग निहत्थे उठाया गया और अबूझमाड़ ले जाया गया जहां उनकी हत्या कर दी गई. 21 सितंबर को इलाके में एक योजनाबद्ध अभियान शुरू किया गया ताकि एक बड़ी मुठभेड़ दिखाकर इसमें इनके मारे जाने की खबर दी जा सके.’

कौन थे काटा रामचंद्र रेड्डी

तेलंगाना के करीमनगर जिले के तीगलाकुंटापल्ली में जन्मे काता रामचंद्र रेड्डी ने 19 साल की उम्र में एक स्थानीय स्कूल में शिक्षक के रूप में अपने करिअर की शुरुआत की थी. बताया जाता है कि उन्होंने बाद में महाराष्ट्र के नांदेड़ से वकालत की पढ़ाई की थी. उसके बाद छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के बिलासपुर में वकील के रूप में भी काम किया था. कहा जाता है कि उस दौरान वे माओवादी पार्टी की गतिविधियों में शामिल रहे थे.

वर्ष 2008 से वह भूमिगत हो गए थे, जब उनकी पत्नी शांतिप्रिया उर्फ मालती को कुछ अन्य लोगों के साथ पुलिस ने रायपुर गिरफ्तार कर लिया था. उन्होंने पहले ‘गुडसा उसेंडी’ और बाद में ‘विकल्प’ के नामों से दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी के आधिकारिक प्रवक्ता के रूप में भी काम किया था.

वर्ष 2019 में दंडकारण्य कमेटी के सचिव रावुला श्रीनिवास उर्फ रामन्ना की बीमारी से मौत के बाद रामचंद्र रेड्डी उर्फ राजू दादा दण्यकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी के सचिव बने थे. बताया जाता है कि उसी बीच वे केंद्रीय कमेटी का सदस्य भी बने.

उनकी पत्नी शांतिप्रिया 8 साल की सजा काटकर जेल से रिहा होने के बाद से हैदराबाद में रह रही हैं. उनकी एक बेटी स्नेहा चंद्र और एक बेटा राजा चंद्र हैं.