नई दिल्ली: राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की ताजा वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, देश भर में 2023 में अनुसूचित जनजातियों (एसटी) के खिलाफ अपराधों में 28.8% और साइबर अपराधों में 31.2% की खतरनाक वृद्धि दर्ज की गई है.
ये आंकड़े मणिपुर में जातीय हिंसा के प्रभाव की एक बेहद गंभीर तस्वीर पेश करते हैं. अकेले राज्य में अनुसूचित जनजातियों के खिलाफ अपराध के 3,399 मामले दर्ज किए गए, जो 2022 में दर्ज केवल एक मामले की तुलना में काफी अधिक है.
एनसीआरबी की रिपोर्ट में विस्तार से बताया गया है कि मणिपुर में इन घटनाओं में आगजनी के 1,051 मामले, डकैती के 260 मामले और आदिवासी समुदायों को निशाना बनाकर धमकाने या अवैध भूमि अधिग्रहण के 193 मामले शामिल हैं.
राष्ट्रीय स्तर पर, अनुसूचित जनजातियों के खिलाफ दर्ज मामलों की कुल संख्या पिछले वर्ष के 10,064 से बढ़कर 12,960 हो गई. दूसरी ओर, अनुसूचित जातियों (एससी) के खिलाफ दर्ज अपराधों में केवल 0.4% की मामूली वृद्धि देखी गई, जिनकी कुल संख्या 2022 में 57,582 से बढ़कर 2023 में 57,789 हो गई.
इस बीच, डिजिटल क्षेत्र आपराधिक गतिविधियों का सक्रिय मोर्चा बन गया है. रिपोर्ट में 2023 में 86,420 साइबर अपराध के मामलों का ज़िक्र किया गया है, जो 2022 के 65,893 मामलों से काफ़ी ज़्यादा है और पांच साल पहले 2018 में दर्ज मामलों (27,248) की संख्या से तीन गुना से भी ज़्यादा है.
ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी सबसे प्रमुख कारण रही, जिसकी कुल घटनाओं में 59,526 यानी लगभग 69% की वृद्धि हुई. जबरन वसूली (4,526 मामले) और यौन शोषण (4,199 मामले) अन्य प्रमुख कारण थे. साइबर अपराधों की सबसे अधिक संख्या तेलंगाना (10,303), कर्नाटक (8,829) और उत्तर प्रदेश (8,236) में दर्ज की गई.
एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार, विदेशियों के खिलाफ अपराधों में 24% की वृद्धि हुई है और देश भर में 238 मामले दर्ज किए गए हैं. विदेशी नागरिकों के लिए नई दिल्ली सबसे असुरक्षित महानगरीय क्षेत्र रहा, जहां ऐसे 63 मामले दर्ज किए गए, जो कुल मामलों का एक-चौथाई से भी ज़्यादा है.
