श्रीनगर: लद्दाख निवासी और जेल में बंद जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के प्रशंसक, जो संवैधानिक सुरक्षा उपायों और लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए चल रहे आंदोलन का हिस्सा थे, ने कथित तौर पर मंगलवार (30 सितंबर) को आत्महत्या कर ली.
इस संबंध में लद्दाख बौद्ध संघ (एलबीए) ने गुरुवार (2 अक्टूबर) को जानकारी दी, जिसमें बताया गया कि चांगथांग के स्किटमांग गांव के निवासी और एलबीए की आम परिषद के सदस्य स्टैनज़िन दोरजे (Stanzin Dorjay), जिन्हें उनके मित्रों और शुभचिंतकों ने लद्दाख में चल रहे आंदोलन में एक ‘जुनूनी योद्धा’ बताया था, ने मंगलवार को कथित तौर पर आत्महत्या कर ली है.
इस मामले को लेकर एलबीए अध्यक्ष चेरिंग दोरजे लकरूक ने कहा, ‘वह हमारे आंदोलन से जुड़े थे. वह सोनम वांगचुक के प्रशंसक थे. मुझे यह इसलिए पता है क्योंकि मैंने उन्हें 24 सितंबर को देखा था. वह युवाओं (प्रदर्शनकारियों) के साथ बाहर जाना चाहते थे, लेकिन मैंने उन्हें ऐसा न करने की सलाह दी थी.’
लकरूक ने बताया कि दोरजे, जिनकी उम्र लगभग 30 साल बताई जा रही है, के दो बच्चे हैं, जो स्कूल जाते हैं. उनका छोटा भाई सेना के लद्दाख स्काउट्स में है, जबकि बड़ा भाई केंद्रीय बौद्ध अध्ययन संस्थान में सहायक प्रोफेसर है.
‘लेह हिंसा के बाद दोरजे अवसाद में थे’
अपने भाइयों के हवाले से लकरूक ने कहा कि 24 सितंबर की घटनाओं के बाद दोरजे अवसाद में आ गए थे, जब लद्दाख की राजधानी लेह में हिंसा भड़कने के बाद सुरक्षा बलों ने करगिल युद्ध के एक पूर्व सैनिक सहित चार नागरिक प्रदर्शनकारियों की गोली मारकर हत्या कर दी थी.
हालांकि, दोरजे ने अपनी जान कैसे दी, इसका फौरन तौर पर पता नहीं चल पाया है.
इस संबंध में लेह एपेक्स बॉडी (एलएबी) के अध्यक्ष लकरूक ने कहा, ‘ऐसा लगता है कि यह 24 सितंबर की घटनाओं से जुड़ा है. शायद उन्हें जो हुआ वह अच्छा नहीं लगा, जिसके कारण उन्होंने आत्महत्या कर ली.’
उल्लेखनीय है कि दोरजे लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग के मुखर समर्थक के रूप में जाने जाते थे. वे संवैधानिक सुरक्षा उपायों और लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए चल रहे आंदोलन के बीच जान गंवाने वाले पांचवे व्यक्ति हैं.
मालूम हो कि लेह हिंसा के दौरान पिछले हफ़्ते गोलीबारी में गंभीर रूप से घायल हुईं एक महिला दिल्ली के एम्स में ज़िंदगी और मौत के बीच जूझ रही हैं.
चांगथांग में केंद्र सरकार की सौर पार्क योजना
बताया जा रहा है कि दोरजे का मूल क्षेत्र, चांगथांग, पूर्वी लद्दाख में एक ऊंचा पठार है, जिसका नाम चांगपा नस्ल की बकरियों के नाम पर रखा गया है, जिनकी ऊन का उपयोग विश्व प्रसिद्ध पश्मीना शॉल बनाने में किया जाता है.
केंद्र सरकार ने लद्दाख में एक सौर पार्क की योजना बनाई है, जो ऊंचाई पर स्थित चांगथांग वन्यजीव अभयारण्य में स्थित है. कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह पार्क चांगपा जनजाति पर नकारात्मक प्रभाव डालेगा, जिनके चरागाह हाल के वर्षों में चीनी घुसपैठ के कारण सिकुड़ गए हैं.
हालांकि, द वायर तत्काल रूप से यह पुष्टि नहीं कर सका कि दोरजे का चांगपा जनजाति से कोई संबंध था या नहीं. लेकिन एलएबी के सह-अध्यक्ष लकरूक ने कहा कि वे इस ‘संघर्ष’ में शामिल थे.
मालूम हो कि एलएबी, करगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (केडीए) के साथ मिलकर लद्दाख में आंदोलन का नेतृत्व कर रहा है. यह आंदोलन क्षेत्र को छठी अनुसूची में शामिल करने, राज्य का दर्जा, संसद में दो सीटें और स्थानीय लोगों के लिए 100% नौकरी में आरक्षण की मांग को लेकर किया जा रहा है.
दोनों समूहों ने 24 सितंबर की हिंसा के लिए स्थानीय प्रशासन, पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल को जिम्मेदार ठहराते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय के साथ अनौपचारिक बातचीत से अपने हाथ खींच लिए हैं.
प्रदर्शनकारियों को रिहा करने की मांग
उन्होंने सरकार से हिंसा के सिलसिले में गिरफ्तार किए गए सभी प्रदर्शनकारियों को रिहा करने और उनके खिलाफ सभी मामले वापस लेने की भी मांग की है.
इस बीच दोनों संगठनों ने गुरुवार को लद्दाख प्रशासन द्वारा 24 सितंबर की हिंसा की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश को खारिज कर दिया.
लकरूक ने कहा, ‘हम इस जांच समिति को अस्वीकार करते हैं. हमने सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश से न्यायिक जांच की मांग की है.’
केडीए नेता सज्जाद हुसैन ने कहा, ‘हम इस जांच को सिरे से खारिज करते हैं, जो एक बेतुका मामला लगता है. हमने सर्वोच्च न्यायालय के किसी वर्तमान न्यायाधीश से न्यायिक जांच की मांग की है. सरकार को लद्दाखियों को नासमझ नहीं समझना चाहिए.’
बता दें कि जांच अधिकारी नियुक्त किए गए उप-विभागीय मजिस्ट्रेट नुबरा मुकुल बेनीवाल द्वारा जारी एक सार्वजनिक नोटिस में, ‘घटना के बारे में जानकारी रखने वाले या मौखिक साक्ष्य/लिखित बयान/भौतिक साक्ष्य (फ़ोटो या वीडियो रिकॉर्डिंग) देने के इच्छुक/इच्छुक लोगों’ को 4 से 18 अक्टूबर तक सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे के बीच लेह के उपायुक्त कार्यालय में उपस्थित होने के लिए आमंत्रित किया गया है.
जनहित में जारी इस नोटिस में लिखा है, ‘सभी संबंधित पक्षों से अनुरोध है कि वे निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित करने में अपना सहयोग प्रदान करें.’
(अगर आप किसी ऐसे व्यक्ति को जानते हैं– दोस्त या परिजन– जो मानसिक रूप से परेशान हैं और आत्महत्या का जोखिम है, तो कृपया उनसे संपर्क करें. सुसाइड प्रिवेंशन इंडिया फाउंडेशन के पास उन फोन नंबरों की एक सूची है जिन पर कॉल करके वे गोपनीयता से बात कर सकते हैं. टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज द्वारा संचालित परामर्श सेवा, आईकॉल ने देश भर के चिकित्सकों/थेरेपिस्ट की एक क्राउडसोर्स्ड सूची तैयार की है. आप उन्हें नज़दीकी अस्पताल भी ले जा सकते हैं.)
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