नई दिल्ली: मद्रास हाईकोर्ट ने शुक्रवार (3 सितंबर) को तमिलनाडु के करूर में तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) के नेतृत्व, जिसमें इसके संस्थापक, अभिनेता से राजनेता बने विजय भी शामिल हैं, की करूर भगदड़ स्थल से ‘भागने’ के लिए कड़ी आलोचना की.
मालूम हो कि यह भगदड़ 27 सितंबर को टीवीके की एक रैली में हुई थी, जिसमें 41 लोगों की जान चली गई थी.
बार एंड बेंच की खबर के मुताबिक, जस्टिस एन. सेंथिलकुमार ने कहा कि आदर्श रूप से टीवीके को भगदड़ जैसी स्थिति से निपटने के लिए तत्काल बचाव और सहायता के प्रयास करने चाहिए थे.
उन्होंने कहा, ‘…यह वास्तव में दुखद है कि श्री विजय, नेता और उनकी राजनीतिक पार्टी के सदस्य, जिन्होंने बैठक का आयोजन किया था, घटनास्थल से भाग गए… यह न्यायालय श्री विजय, कार्यक्रम के आयोजकों और राजनीतिक पार्टी के सदस्यों के दुर्घटना के तुरंत बाद घटनास्थल से भाग जाने के आचरण की कड़ी निंदा करता है.’
न्यायालय ने आगे कहा कि घटना पर खेद प्रकट करने के लिए टीवीके द्वारा कोई ‘ज़िम्मेदारी’ नहीं दिखाई गई, जो मानव जीवन और सार्वजनिक जवाबदेही के प्रति उनकी उपेक्षा को दर्शाता है.
उल्लेखनीय है कि विजय ने 30 सितंबर को एक्स पर एक वीडियो बयान अपलोड किया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि उन्हें इस घटना से बहुत दुख हुआ है और उन्होंने राज्य सरकार से टीवीके कार्यकर्ताओं से कोई ‘बदला’ न लेने का आग्रह किया था.
हालांकि, अपने आदेश में जस्टिस कुमार ने इस बात पर सख्त टिप्पणी की कि करूर रैली का आयोजन करने वाले टीवीके के नेतृत्व और सदस्यों को भगदड़ वाली जगह से जाते हुए देखा गया, जब यह भयानक हादसा घटित हुआ.
‘न तो कोई पश्चाताप है, न ही कोई ज़िम्मेदारी, और न ही खेद का कोई भाव’
अदालत ने कहा, ‘हैरानी की बात यह है कि कार्यक्रम के आयोजक, जिनमें राजनीतिक दल के नेता भी शामिल थे, अपने कार्यकर्ताओं, अनुयायियों और प्रशंसकों को छोड़कर कार्यक्रम स्थल से फरार हो गए. न तो कोई पश्चाताप है, न ही कोई ज़िम्मेदारी, और न ही खेद का कोई भाव.’
इसमें यह भी सवाल उठाया गया कि राज्य ने भगदड़ वाली जगह पर हुई दो दुर्घटनाओं के संबंध में अभी तक आपराधिक मामले क्यों नहीं दर्ज किए हैं, जिनमें कथित तौर पर विजय को ले जा रही बस से टक्कर का भी एक मामला शामिल है.
अदालत ने कहा, ‘फुटेज (सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो फुटेज) में साफ तौर पर दिख रहा है कि दुर्घटना में दो मोटरसाइकिलें शामिल थीं और बस का ड्राइवर दुर्घटना देखकर मौके से फरार हो गया… दोनों ही मामलों में प्रतिवादी पुलिस ने हिट एंड रन के अपराध में कोई एफआईआर दर्ज नहीं की है… यह अदालत कार्रवाई करने में अधिकारियों की विफलता पर गहरी चिंता और दुख व्यक्त करती है. पीड़ित पक्षों की ओर से औपचारिक शिकायत न होने पर भी, राज्य का यह कर्तव्य है कि वह स्वतः संज्ञान लेते हुए एफआईआर दर्ज करे और यह सुनिश्चित करे कि आरोपी कानून के अनुसार मुकदमे का सामना करे.’
जस्टिस सेंथिलकुमार ने आगे कहा कि इस मामले में राज्य सरकार की जांच ठीक नहीं है. उन्होंने कहा, ‘यह न्यायालय उक्त (राज्य सरकार की) जांच की प्रगति या स्वतंत्रता से संतुष्ट नहीं है.’
इसके बाद न्यायालय ने भगदड़ की विशेष जांच दल (एसआईटी) द्वारा जांच का आदेश दिया, हालांकि यह उन निर्देशों में से एक नहीं था जो वादी ने न्यायालय में मांगे थे.
वादी, पीएच दिनेश ने रोड शो के दौरान पालन किए जाने वाले सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू करने के निर्देश देने की मांग की थी.
न्यायालय ने कहा, ‘यद्यपि वर्तमान रिट याचिका में अपील सीमित है, फिर भी असाधारण परिस्थितियों के कारण रिट याचिका का दायरा बढ़ा दिया गया है, जिसके लिए असाधारण उपाय आवश्यक हैं. यह न्यायालय अपनी आंखें बंद नहीं कर सकता, मूकदर्शक नहीं बना रह सकता और अपनी संवैधानिक ज़िम्मेदारियों से पीछे नहीं हट सकता.’
गौरतलब है कि इस घटना की जांच के लिए गठित एसआईटी का नेतृत्व पुलिस महानिरीक्षक (उत्तरी क्षेत्र) असरा गर्ग करेंगे. टीम के अन्य सदस्य विमला (आईपीएस), पुलिस अधीक्षक, नमक्कल और श्यामलादेवी, पुलिस अधीक्षक, सीएससीआईडी हैं. न्यायालय ने आगे कहा कि गर्ग द्वारा आवश्यकतानुसार टीम में अतिरिक्त सदस्यों को शामिल किया जा सकता है.
इसमें आगे कहा गया है, ‘राज्य सरकार को एसआईटी के प्रभावी कामकाज के लिए पूर्ण सहयोग और सभी आवश्यक सुविधाएं प्रदान करने का निर्देश दिया जाता है… घटनास्थल पर उपलब्ध सभी सीसीटीवी फुटेज, विशेष रूप से राजनीतिक दल के नेता को ले जा रही बस के अंदर और बाहर के सीसीटीवी फुटेज जब्त किए जाएं. हिट एंड रन में शामिल उक्त बस को भी जब्त किया जाए.’
