यूक्रेन की सेना का दावा- रूसी सेना में काम करने वाले भारतीय नागरिक ने सरेंडर किया

यूक्रेन की सेना ने बताया कि रूसी सेना में शामिल हुए एक भारतीय नागरिक ने तीन दिन अग्रिम मोर्चे पर बिताने के बाद यूक्रेनी सैनिकों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है. उनकी पहचान गुजरात के मोरबी निवासी 22 वर्षीय मजोती साहिल मोहम्मद हुसैन के रूप में हुई है. वे एक विश्वविद्यालय में पढ़ाई करने के लिए रूस गए थे.

/
यूक्रेनी सेना द्वारा जारी एक वीडियो में गुजरात के मोरबी निवासी माजोती साहिल मोहम्मद हुसैन.

नई दिल्ली: यूक्रेन की सेना ने मंगलवार (7 अक्टूबर) को बताया कि रूसी सेना में शामिल हुए एक भारतीय नागरिक ने तीन दिन अग्रिम मोर्चे (फ्रंटलाइन) पर बिताने के बाद यूक्रेनी सैनिकों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है.

नई दिल्ली स्थित आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि कीव स्थित भारतीय दूतावास इस सूचना की पुष्टि कर रहा है. सूत्रों ने कहा, ‘इस संबंध में अभी तक यूक्रेनी पक्ष से कोई औपचारिक सूचना नहीं मिली है.’

अपने आधिकारिक टेलीग्राम चैनल पर यूक्रेन की 63वीं मैकेनाइज्ड ब्रिगेड ने ‘एक 22 वर्षीय… भारतीय को बंदी बना लिया गया है!’ शीर्षक से एक वीडियो पोस्ट किया.

हालांकि, कई भारतीय नागरिकों को अनुबंध पर रूसी सेना में भर्ती किया गया है और अग्रिम मोर्चे पर उनकी हत्या भी की गई है, लेकिन किसी भारतीय नागरिक को यूक्रेनी हिरासत में लिए जाने का यह पहला ज्ञात मामला है.

वीडियो में उनकी पहचान गुजरात के मोरबी निवासी 22 वर्षीय मजोती साहिल मोहम्मद हुसैन के रूप में हुई है. वह एक विश्वविद्यालय में पढ़ाई करने के लिए रूस गए थे, लेकिन बाद में उन्हें नशीली दवाओं से संबंधित आरोपों में दोषी ठहराया गया.

कीव इंडिपेंडेंट के अनुसार, रूसी भाषा के वीडियो में उन्होंने कहा, ‘मैं जेल में नहीं रहना चाहता था, इसलिए मैंने ‘विशेष सैन्य अभियान’ के लिए एक अनुबंध पर हस्ताक्षर किए. लेकिन मैं वहां से बाहर निकलना चाहता था.’

हुसैन ने कहा कि 1 अक्टूबर को अग्रिम मोर्चे पर भेजे जाने से पहले उन्हें केवल 16 दिनों का प्रशिक्षण मिला था. उन्होंने दावा किया कि अपने कमांडर के साथ विवाद के बाद उन्होंने सरेंडर करने का फैसला किया. उन्होंने आगे कहा कि वह 63वीं मैकेनाइज्ड ब्रिगेड से लगभग दो-तीन किलोमीटर दूर एक यूक्रेनी खाई में पहुंचे. उन्होंने आगे कहा, ‘मैंने तुरंत अपनी राइफल नीचे रख दी और कहा कि मैं लड़ना नहीं चाहता. मुझे मदद की ज़रूरत है.’

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें रूसी पक्ष द्वारा वादा किया गया वेतन कभी नहीं दिया गया और कहा कि वह रूस लौटने के बजाय यूक्रेन में ही रहना पसंद करेंगे. उन्होंने कहा, ‘वहां कुछ नहीं है, कुछ भी नहीं. मैं तो यहीं जेल जाना पसंद करूंगा.’

उल्लेखनीय है कि फरवरी में भारत सरकार ने संसद को बताया था कि उसे यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद रूसी सेना में शामिल हुए 127 भारतीयों के बारे में पता है. अब तक 12 लोगों की मौत हो चुकी है, 18 लापता हैं और बाकी रिहा होने के बाद वापस आ गए हैं.

पिछले महीने द वायर ने बताया था कि गैर-युद्धक नौकरियों के झूठे वादों के झांसे में आकर हाल ही में और भी भारतीय रूसी सेना में शामिल हुए हैं.

भारतीय अधिकारियों ने कहा है कि नई दिल्ली ने मास्को से बार-बार भारतीय नागरिकों की भर्ती बंद करने का अनुरोध किया है.

भारतीय नागरिक के आत्मसमर्पण की यह खबर उसी दिन सामने आई जिस दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को उनके 73वें जन्मदिन की बधाई देने के लिए फोन किया था. रूसी नेता दिसंबर में वार्षिक द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन के लिए भारत आएंगे.