सीजेआई पर हमला: सुप्रीम कोर्ट वकील ने अटॉर्नी जनरल से आपराधिक अवमानना केस दर्ज करने की अनुमति मांगी

अधिवक्ता सुभाष चंद्रन के.आर. ने अटॉर्नी जनरल से उस अधिवक्ता के खिलाफ़ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की अनुमति मांगी है, जिसने सुप्रीम कोर्ट में भारत के मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई पर जूता फेंकने की कोशिश की थी. कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट अधिनियम, 1971 की धारा 15 के तहत अवमानना केस के लिए अटॉर्नी जनरल से अनुमति लेना आवश्यक है.

(इलस्ट्रेशन: द वायर)

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट के एक वकील ने भारत के अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी को पत्र लिखकर उस अधिवक्ता के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की अनुमति मांगी है, जिसने 6 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) बीआर गवई पर जूता फेंकने की कोशिश की थी. 

लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, अधिवक्ता सुभाष चंद्रन के. आर. ने अटॉर्नी जनरल से यह अनुमति इसलिए मांगी है, क्योंकि कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट अधिनियम, 1971 की धारा 15 के तहत अवमानना की कार्यवाही शुरू करने के लिए अटॉर्नी जनरल की अनुमति आवश्यक है.

चंद्रन ने अपने पत्र में कहा है कि राकेश किशोर द्वारा मुख्य न्यायाधीश पर हमला करना और ‘सनातन धर्म का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान’ का नारा लगाना न्याय के प्रशासन में गंभीर हस्तक्षेप है और सर्वोच्च न्यायालय की गरिमा को ठेस पहुंचाता है.

इस बीच, हिंदुत्व समर्थक समूहों द्वारा सीजेआई पर ऑनलाइन हमलों के बीच आरोपी राकेश किशोर ने अपने कदम का बचाव करते हुए कहा, ‘मुझे कोई पछतावा नहीं है. मैंने सही किया. मुझे पता था कि मुझे जेल जाना पड़ेगा, वहां कष्ट होगा, लेकिन यह सब भगवान के नाम पर किया है. भगवान ही मुझे यह करने के लिए प्रेरित कर रहे थे.’

चंद्रन ने अपने पत्र में लिखा है कि ‘अवमानना का यह कृत्य सर्वोच्च न्यायालय की प्रतिष्ठा और अधिकार पर चोट करता है और भारतीय संविधान की भावना के विपरीत है.’ 

यह अटॉर्नी जनरल के समक्ष इस मामले में दायर दूसरी याचिका है. इससे एक दिन पहले एक अन्य याचिका में कथावाचक अनिरुद्धाचार्य (उर्फ़ अनिरुद्ध राम तिवारी) और यूट्यूबर अजीत भारती के खिलाफ भी अवमानना की कार्रवाई की अनुमति मांगी गई थी. दोनों पर इस हमले को भड़काने का आरोप है.

द वायर हिंदी की रिपोर्ट के अनुसार, हमले से पहले ही सीजेआई गवई की टिप्पणियों को लेकर हिंदुत्व समर्थक सोशल मीडिया अकाउंट्स के ज़रिए संगठित नफ़रत अभियान चलाया जा रहा था. द वायर की एक अन्य रिपोर्ट में बताया गया है कि सरकार के उच्चतम पद पर बैठे लोगों, खासतौर पर पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा इस हमले की निंदा किए जाने के बावजूद ऐसे हमले जारी हैं.

यह विवाद मध्य प्रदेश के खजुराहो में भगवान विष्णु की एक मूर्ति की पुनर्स्थापना को लेकर दायर जनहित याचिका की सुनवाई के बाद शुरू हुआ था. उस याचिका को खारिज करते हुए सीजेआई गवई ने कहा था, ‘जाइए, खुद भगवान से कहिए कि कुछ करें. अगर आप भगवान विष्णु के सच्चे भक्त हैं, तो प्रार्थना कीजिए और ध्यान लगाइए.’