हमास और इज़रायल ने ट्रंप की शांति योजना के पहले चरण पर सहमति जताई

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि इज़रायल और हमास ने उनके द्वारा प्रस्तावित गाज़ा के लिए ‘शांति’ योजना के पहले चरण पर हस्ताक्षर करने के लिए सहमति बना ली है. एमनेस्टी इंटरनेशनल ने इस ‘शांति’ योजना को लेकर कहा है कि किसी भी युद्धविराम समझौते का आधार यह होना चाहिए कि इज़रायल द्वारा फ़िलिस्तीनियों के नरसंहार को पूरी तरह समाप्त किया जाए.

8 अक्तूबर 2025 को दक्षिणी इज़रायल से दिखाई देता हुआ दृश्य: इज़रायली सैन्य हमले के बाद गाज़ा पट्टी के उत्तरी हिस्से से उठता धुआं. (फोटो: एपी/पीटीआई)

नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि इज़रायल और हमास ने उनके द्वारा प्रस्तावित गाज़ा के लिए ‘शांति’ योजना के पहले चरण पर हस्ताक्षर करने के लिए सहमति बना ली है. 

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा, ‘इसका मतलब है कि सभी बंधकों को बहुत जल्द रिहा किया जाएगा और इज़रायल अपनी सेना को एक तय रेखा तक वापस बुलाएगा. यह एक मज़बूत, टिकाऊ और स्थायी शांति की दिशा में पहला कदम होगा.’ 

उन्होंने आगे लिखा, ‘हम क़तर, मिस्र और तुर्की के मध्यस्थों का धन्यवाद करते हैं, जिन्होंने हमारे साथ मिलकर इस ऐतिहासिक और अभूतपूर्व घटना को संभव बनाया. धन्य हैं वे जो शांति लाते हैं.’ 

ख़बरों के मुताबिक, इस समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर गुरुवार (9 अक्टूबर) को मिस्र में होने वाले हैं. गाज़ा में इस घोषणा को लेकर उत्सव का माहौल तो है, लेकिन लोगों में अभी अविश्वास है और वे सतर्कता बरत रहे हैं. 

गाज़ा के निवासी सामेर जूदेह ने एएफपी से कहा, ‘सच कहूं तो जब मैंने यह ख़बर सुनी तो खुद को रोक नहीं पाया. खुशी के आंसू रोया. दो सालों की बमबारी, आतंक, तबाही, अपमान और हर पल मौत के डर के बाद यह उम्मीद की किरण है.’ 

गाज़ा के स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा 7 अक्तूबर 2025 को जारी आंकड़ों के मुताबिक, वहां अब तक 20,179 बच्चे मारे जा चुके हैं, 12 लाख से अधिक लोग खाने के संकट का सामना कर रहे हैं और 58,554 बच्चे अनाथ हो गए हैं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस समझौते का स्वागत किया है. उन्होंने एक्स पर लिखा कि यह ‘इज़रायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू के मज़बूत नेतृत्व का भी प्रतिबिंब’ है.

मोदी ने कहा, ‘हम आशा करते हैं कि बंधकों की रिहाई और गाज़ा के लोगों को मानवीय सहायता मिलने से उन्हें राहत मिलेगी और यह स्थायी शांति का मार्ग प्रशस्त करेगा.’ 

गौरतलब है कि इस साल की शुरुआत में संयुक्त राष्ट्र के तीन-चौथाई से अधिक सदस्य देशों ने गाज़ा में तत्काल युद्धविराम, हमास द्वारा बंधकों की रिहाई और मानवीय सहायता के लिए रास्ता खोलने के प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया था. लेकिन भारत ने मतदान से परहेज़ किया था, यह कहते हुए कि स्थायी शांति केवल आमने सामने की बातचीत से ही संभव है.

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने इस ‘बेहद ज़रूरी ऐतिहासिक सफलता’ तक पहुंचने के लिए अमेरिका, क़तर, मिस्र और तुर्की की सराहना की.

उन्होंने कहा, ‘मैं सभी पक्षों से अपील करता हूं कि वे समझौते की सभी शर्तों का पूर्ण रूप से पालन करे. सभी बंधकों को सम्मानपूर्वक रिहा किया जाना चाहिए.. स्थायी युद्धविराम सुनिश्चित की जानी चाहिए.. लड़ाई हमेशा के लिए ख़त्म होनी चाहिए.. मानवीय सहायता और आवश्यक सामग्री को तत्काल प्रभाव और बेरोक गाज़ा में प्रवेश की अनुमति दी जानी चाहिए. यह पीड़ा अब समाप्त होनी चाहिए.’

गुतारेस ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र इस समझौते के पूर्ण क्रियान्वयन में सहयोग करेगा, मानवीय राहत को मज़बूती से आगे बढ़ाएगा और गाज़ा के पुनर्निर्माण के प्रयासों में योगदान देगा.

एमनेस्टी इंटरनेशनल ने ट्रंप की ‘शांति’ योजना में खामी बताई

एमनेस्टी इंटरनेशनल ने अपने महासचिव एग्नेस कैलामार्ड के हवाले से कहा है कि भले ही हमास और इज़रायल के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की गाज़ा ‘शांति’ योजना के पहले चरण पर सहमति की ख़बरें आ रही हों, लेकिन किसी भी युद्धविराम समझौते का आधार यह होना चाहिए कि इज़रायल द्वारा फ़िलिस्तीनियों के नरसंहार को पूरी तरह समाप्त किया जाएगा.

कैलामार्ड ने कहा कि ‘दो वर्षों तक चले शर्मनाक दोहरे मानदंडों और उन वीटो का समय अब खत्म होना चाहिए जिन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को पंगु बना दिया, जबकि दुनिया एक नरसंहार का सीधा प्रसारण देखती रही. अब इस भयावहता को निर्णायक रूप से समाप्त करने का समय आ गया है.

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