हरियाणा आईपीएस अधिकारी की मौत: जातिगत भेदभाव का आरोप, कई शीर्ष अधिकारियों पर एफआईआर

हरियाणा के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक वाई. पूरन कुमार ने 7 अक्टूबर को चंडीगढ़ स्थित उनके आवास पर कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी. सुसाइड नोट में उन्होंने जातिगत भेदभाव, मानसिक उत्पीड़न और अत्याचार का आरोप लगाया है. बढ़ते आक्रोश के बीच कई आला अधिकारियों के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज हुई है.

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पुलिस हरियाणा के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी वाई पूरन कुमार के घर की जांच करती हुई, जिनकी कथित तौर पर चंडीगढ़ में उनके आधिकारिक आवास पर आत्महत्या से मृत्यु हो गई थी. (फोटो: पीटीआई)

चंडीगढ़: हरियाणा के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के वरिष्ठ अधिकारी वाई. पूरन कुमार की मौत से जुड़े परेशान करने वाले विवरण सामने आए हैं, जिससे राज्य के पुलिस और प्रशासनिक हलकों में और भी सवाल उठ रहे हैं.

कुमार के आठ पन्नों के टाइप किए हुए और हस्ताक्षरित सुसाइड नोट- जो 7 अक्टूबर को चंडीगढ़ स्थित उनके आवास पर कथित तौर पर आत्महत्या के बाद बरामद हुआ था – में ‘जातिगत भेदभाव’, ‘मानसिक उत्पीड़न’, ‘सार्वजनिक अपमान’ और ‘अत्याचार’ का बार-बार ज़िक्र था.

आंध्र प्रदेश के रहने वाले 2001 बैच के इस अधिकारी ने राज्य में अपनी लंबी पुलिस सेवा के दौरान कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया. उन्होंने अंबाला और रोहतक पुलिस रेंज के साथ-साथ होमगार्ड, दूरसंचार और कई अन्य प्रमुख विभागों का भी नेतृत्व किया था.

उनके सुसाइड नोट में कहा गया है कि किस प्रकार व्यवस्था के भीतर निरंतर अपमान और पक्षपात ने उन्हें कथित तौर पर आत्महत्या करने के लिए प्रेरित किया.

दिवंगत अधिकारी की पत्नी, भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी, अमनीत पी. ​​कुमार ने 8 अक्टूबर को चंडीगढ़ पुलिस के समक्ष एक आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें हरियाणा के वर्तमान पुलिस महानिदेशक शत्रुजीत सिंह कपूर और रोहतक के पुलिस अधीक्षक नरेंद्र बिजारनिया के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई थी.

उन्होंने अपने पति के साथ कथित जातिगत भेदभाव के लिए अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत इन वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की भी मांग की थी, जिसके कारण उन्हें आत्महत्या के लिए मजबूर होना पड़ा.

उन्होंने अपनी शिकायत में लिखा, ‘यह कोई साधारण आत्महत्या का मामला नहीं है, बल्कि मेरे पति – जो अनुसूचित जाति समुदाय से हैं – के शक्तिशाली और उच्च पदस्थ अधिकारियों द्वारा व्यवस्थित उत्पीड़न का सीधा परिणाम है, जिन्होंने अपने पदों का इस्तेमाल करके उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया, जिससे अंततः उन्हें इस हद तक मजबूर होना पड़ा कि उनके पास आत्महत्या के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा.’

चंडीगढ़ पुलिस फिलहाल मामले की जांच कर रही है, लेकिन शत्रुजीत सिंह कपूर या नरेंद्र बिजारनिया ने अमनीत कुमार द्वारा लगाए गए आरोपों पर कोई सार्वजनिक बयान जारी नहीं किया है.

अमनीत कुमार, जो वर्तमान में हरियाणा सरकार के विदेश सहयोग विभाग में आयुक्त और सचिव के रूप में कार्यरत हैं, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी के नेतृत्व में एक आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल के साथ जापान में थीं, जब उनके पति ने 7 अक्टूबर को चंडीगढ़ स्थित अपने आवास पर कथित तौर पर खुद को गोली मार ली थी.

बाद में सैनी 9 अक्टूबर को चंडीगढ़ के सेक्टर 24 स्थित आईपीएस अधिकारी के आधिकारिक आवास पर शोक संतप्त परिवार के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करने गए. सरकार के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भी उन्हें श्रद्धांजलि दी.

‘सुसाइड नोट’

कुमार ने अपने नोट में कहा कि उनके साथ भेदभाव तब शुरू हुआ जब 2020 में अंबाला के एक पुलिस थाने में उन्होंने एक मंदिर में दर्शन किए. उन्होंने कहा कि तब से उन्हें व्यवस्थित और निरंतर निशाना बनाया जा रहा है. उन्होंने आगे कहा कि उन्हें अपने मरते हुए पिता को देखने के लिए भी छुट्टी नहीं दी गई, जिससे उन्हें बहुत गहरा और स्थायी भावनात्मक दर्द हुआ.

उन्होंने लिखा कि कई बार अनुरोध करने के बावजूद सेवा और अवकाश नियमों, आवास और पदोन्नति नीतियों के उचित अनुप्रयोग सहित समान व्यवहार के उनके अनुरोधों को नज़रअंदाज़ कर दिया गया या उनके खिलाफ प्रतिशोधात्मक तरीके से इस्तेमाल किया गया.

उन्होंने यह भी कहा कि मामले को वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई. कुमार ने कहा कि उनकी शिकायतों, जिनका उन्होंने लिखित साक्ष्य और बैठक रिकॉर्ड के साथ संलग्न किया था, को लगातार नज़रअंदाज़ किया गया.

अधिकारी ने प्रदर्शन मूल्यांकन रिपोर्ट को अंतिम रूप देने में देरी और उनके खिलाफ गुमनाम और छद्म नामों से की गई शिकायतों के आधार पर झूठी, परेशान करने वाली और दुर्भावनापूर्ण कार्यवाही शुरू करके ‘निरंतर भेदभाव’ का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि उन्हें सार्वजनिक रूप से परेशान और अपमानित किया गया.

उन्होंने कहा कि वह ‘जाति-आधारित भेदभाव, सार्वजनिक अपमान, लक्षित मानसिक उत्पीड़न और अत्याचारों को जारी रखने के लिए संबंधित अधिकारियों की निरंतर और ठोस साजिश को और अधिक समय तक बर्दाश्त नहीं कर सकते.’

‘षड्यंत्र’

चंडीगढ़ पुलिस को दी गई अपनी शिकायत में दिवंगत अधिकारी की पत्नी अमनीत कुमार ने कहा कि उन्होंने अपने पति पर वर्षों तक हुए अपमान और उत्पीड़न को देखा है. उन्होंने यह भी कहा कि उनके पति का दर्द छिपा नहीं था और जाति-आधारित भेदभाव सहने के दौरान उनके द्वारा दर्ज की गई कई शिकायतों (जिनका ज़िक्र उन्होंने अपने सुसाइड नोट में भी किया है) से यह स्पष्ट होता है.

उन्होंने शिकायत में आरोप लगाया, ‘मेरे पति को यह पता चल गया था और उन्होंने मुझे सूचित किया था कि हरियाणा के डीजीपी शत्रुजीत सिंह कपूर के निर्देश पर एक षडयंत्र रचा जा रहा है और झूठे सबूत गढ़कर उन्हें एक तुच्छ और शरारती शिकायत में फंसाया जाएगा.’

उन्होंने यह भी दावा किया कि सबसे क्रूर बात यह है कि उनकी मृत्यु से ठीक पहले उनके पति सुशील के एक कर्मचारी के खिलाफ 6 अक्टूबर को अर्बन एस्टेट रोहतक पुलिस स्टेशन में एक झूठी एफआईआर दर्ज की गई थी.

अमनीत कुमार ने अपनी शिकायत में लिखा है कि उनके पति के खिलाफ झूठे सबूत गढ़कर उन्हें इस मामले में फंसाया जा रहा था. उन्होंने यह भी लिखा है कि उनके पति ने इस मामले में डीजीपी से संपर्क किया था और उनसे बातचीत भी की थी, लेकिन उस समय डीजीपी ने ‘बातचीत को दबा दिया था.’

उन्होंने आगे कहा, ‘इसके अलावा, मेरे पति ने रोहतक के एसपी नरेंद्र बिजारनिया को भी फोन किया था, लेकिन उन्होंने जानबूझकर उनका फोन नहीं उठाया. परिस्थितियों से यह स्पष्ट है कि रोहतक के एसपी नरेंद्र बिजारनिया, डीजीपी हरियाणा के साथ मिलकर साजिश रच रहे थे.’

उन्होंने कहा कि आठ पन्नों का यह नोट टूटे हुए मनोबल का दस्तावेज है और इसमें उन कई अधिकारियों के नाम और सच्चाई उजागर की गई है जिनके ‘निरंतर कार्यों ने उन्हें इस हद तक धकेल दिया.’

उन्होंने लिखा, ‘मेरे पति को जो उत्पीड़न सहना पड़ा, उसके बारे में वे मुझे अक्सर बताते रहते थे. मेरे लिए शब्दों में बयां करना मुश्किल है कि मैंने और मेरे बच्चों ने क्या खोया है – एक पति, एक पिता, एक ऐसा इंसान जिसका एकमात्र अपराध सेवा में ईमानदारी थी.’

उन्होंने आगे लिखा कि यह स्थापित कानून है कि लगातार उत्पीड़न, अपमान और मानहानि के कृत्य उकसावे के दायरे में आ सकते हैं. केवल तात्कालिक घटनाओं की नहीं, बल्कि समग्र परिस्थितियों की जांच की जानी चाहिए. प्रशासनिक उत्पीड़न किसी व्यक्ति को आत्महत्या के लिए प्रेरित कर सकता है.

उन्होंने लिखा, ‘इसके अलावा, अनुसूचित जाति की पहचान के आधार पर मेरे पति को परेशान करना अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के तहत एक अलग और गंभीर अपराध है.’

उन्होंने कहा, ‘मैं न केवल अपने परिवार के लिए बल्कि हर ईमानदार अधिकारी के जीवन और सम्मान के मूल्य के लिए भी गुहार लगा रही हूं.’

कई शीर्ष पुलिस अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज, परिवार ने निलंबन और गिरफ्तारी की मांग की

वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी वाई पूरन कुमार की कथित आत्महत्या को लेकर बढ़ते जनाक्रोश के बीच, चंडीगढ़ पुलिस ने गुरुवार (9 अक्टूबर) देर रात हरियाणा के कई शीर्ष पुलिस अधिकारियों पर आत्महत्या के लिए उकसाने और एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया.

राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने भी घटना का स्वतः संज्ञान लिया और चंडीगढ़ पुलिस से कार्रवाई रिपोर्ट मांगी.

चंडीगढ़ पुलिस के आधिकारिक बयान में गुरुवार देर रात कहा गया कि अंतिम एफआईआर (वाई पूरन कुमार के सुसाइड नोट) में नामित सभी अधिकारियों के खिलाफ बीएनएस और एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर (संख्या 156) दर्ज की गई है. चंडीगढ़ पुलिस ने यह भी बताया कि आगे की जांच जारी है.

पूरन कुमार ने आत्महत्या के लिए उकसाने के लिए हरियाणा के वर्तमान पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) सहित हरियाणा के 11 शीर्ष पुलिस अधिकारियों का नाम लिया था. इनमें रोहतक एसपी, पूर्व डीजीपी और कुछ पूर्व एडीजीपी शामिल हैं.

नोट में शत्रुजीत कपूर (हरियाणा डीजीपी), अमिताभ ढिल्लों (एडीजीपी, 1997 बैच), संजय कुमार (एडीजीपी, 1997 बैच), पंकज नैन (आईजीपी, 2007 बैच), कला रामचंद्रन, (आईपीएस, 1994 बैच), संदीप खिरवार (तत्कालीन सीपी गुरुग्राम, 1995 बैच) सिबाश कबीराज (तत्कालीन जेसीपी गुरुग्राम, 1999 बैच), मनोज यादव (पूर्व डीजीपी, 1988 बैच), पीके अग्रवाल (पूर्व डीजीपी) और नरेंद्र बिजारनिया (रोहतक एसपी), पूर्व मुख्य सचिव टीवीएसएन प्रसाद का नाम शामिल है.

बढ़ता जनाक्रोश

हरियाणा की भाजपा सरकार इस आत्महत्या के बाद पूरे देश में जनाक्रोश के कारण कड़ी आलोचनाओं के घेरे में आ गई है. दलित संगठनों से लेकर वरिष्ठ विपक्षी नेताओं तक सभी मृतक अधिकारी के लिए त्वरित कार्रवाई की मांग कर रहे हैं.

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने एक तीखे पोस्ट में कहा, ‘हरियाणा के आईपीएस अधिकारी वाई पूरन कुमार की आत्महत्या उस गहरे होते सामाजिक ज़हर का प्रतीक है जो जाति के नाम पर मानवता को कुचल रहा है. जब एक आईपीएस अधिकारी को अपनी जाति के कारण अपमान और अन्याय का सामना करना पड़ता है, तो कल्पना कीजिए कि एक आम दलित को क्या सहना पड़ता होगा.’

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी ट्वीट किया कि भाजपा की मनुवादी व्यवस्था इस देश के अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और कमजोर वर्गों के लिए अभिशाप बन गई है.

उन्होंने लिखा, ‘हरियाणा के वरिष्ठ दलित आईपीएस अधिकारी एडीजीपी वाई. पूरन कुमार की जबरन आत्महत्या की खबर न केवल चौंकाने वाली है, बल्कि सामाजिक अन्याय, अमानवीयता और असंवेदनशीलता का एक भयावह प्रमाण भी है.’

हरियाणा सिविल सेवा अधिकारी संघ ने भी सैनी को पत्र लिखकर इस मामले में शीघ्र कार्रवाई की मांग की और सुझाव दिया कि ‘जूनियर जांच अधिकारियों पर अनुचित प्रभाव की आशंका को दूर करने के लिए आरोपी अधिकारियों को अस्थायी रूप से पद से हटाना आवश्यक है.’

(अगर आप किसी ऐसे व्यक्ति को जानते हैं– दोस्त या परिजन– जो मानसिक रूप से परेशान हैं और आत्महत्या का जोखिम है, तो कृपया उनसे संपर्क करें. सुसाइड प्रिवेंशन इंडिया फाउंडेशन के पास उन फोन नंबरों की एक सूची है जिन पर कॉल करके वे गोपनीयता से बात कर सकते हैं. टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज द्वारा संचालित परामर्श सेवा, आईकॉल ने देश भर के चिकित्सकों/थेरेपिस्ट की एक क्राउडसोर्स्ड सूची तैयार की है. आप उन्हें नज़दीकी अस्पताल भी ले जा सकते हैं.)

(इस रिपोर्ट को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.)