नई दिल्ली: लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने मंगलवार (14 अक्टूबर) को चंडीगढ़ में दिवंगत दलित आईपीएस अधिकारी वाई. पूरन कुमार के घर जाकर उनकी पत्नी और बेटियों से मुलाकात की और संवेदना व्यक्त की.
गांधी ने कहा कि कुमार की प्रतिष्ठा और करिअर को सुनियोजित तरीके से बर्बाद किया गया और अब उनकी मृत्यु के बाद भी परिवार को भारी दबाव का सामना करना पड़ रहा है. उन्होंने मांग की कि कुमार के सुसाइड नोट में जिन अधिकारियों का ज़िक्र है, उन्हें तुरंत गिरफ़्तार किया जाए.
7 अक्टूबर को चंडीगढ़ स्थित अपने आवास पर कुमार की कथित आत्महत्या के बाद उनके पास से आठ पन्नों का हस्ताक्षरित सुसाइड नोट बरामद हुआ था. सुसाइड नोट में ‘जातीय भेदभाव’, ‘मानसिक उत्पीड़न’, ‘सार्वजनिक अपमान’ और ‘अत्याचार’ का ज़िक्र कई मौकों पर किया गया.
बाद में मीडिया से बातचीत के दौरान राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से अपील की कि वे आरोपी अधिकारियों पर तत्काल कार्रवाई करें. उन्होंने कहा कि अब इस नाटक को ख़त्म करने और परिवार को न्याय देने का समय है.
गांधी के साथ हरियाणा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भूपिंदर सिंह हुड्डा, कुमारी शैलजा और राव नरेंद्र सिंह भी मौजूद थे.
गांधी ने कहा कि यह मामला सिर्फ एक परिवार का नहीं, बल्कि पूरे देश के दलितों की गरिमा से जुड़ा है. उन्होंने कहा, ‘आज देश के दलितों को गलत संदेश गया है कि चाहे आप कितने भी सफल हों या कितने भी बुद्धिमान, लेकिन आपको कुचला जा सकता है, अपमानित किया जा सकता है. यह हमें मंज़ूर नहीं है.’
जब पत्रकारों ने पूछा कि क्या परिवार ने पोस्टमार्टम के लिए सहमति दी है, तब गांधी ने कहा, ‘परिवार कह रहा है कि हमें सम्मान चाहिए. आपने हमारे पति का अपमान किया, उनका करिअर बर्बाद किया. उन्होंने आत्महत्या कर ली. अब मरने के बाद उन्हें सम्मान दीजिए. अगर आप यह सम्मान नहीं देंगे, तो यह हमें स्वीकार्य नहीं है.’
कांग्रेस सांसद ने कहा कि यह केवल एक परिवार का नहीं, बल्कि देश के हर दलित भाई-बहन के सम्मान का सवाल है.

गांधी करीब आधे घंटे तक कुमार के परिवार के साथ रहे. उन्होंने कहा कि अधिकारी के निधन के बाद से परिवार पर लगातार दबाव बना हुआ है और खास तौर पर उनकी पत्नी और बेटियां गहरे सदमे में हैं.
उन्होंने कहा, ‘मामले के तथ्यों से साफ़ है कि अधिकारी को वर्षों तक मानसिक उत्पीड़न और जातीय भेदभाव का सामना करना पड़ा. उनकी साख और करिअर को योजनाबद्ध तरीके से खत्म किया गया. तीन दिन पहले हरियाणा के मुख्यमंत्री ने कार्रवाई का वादा किया था, लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ है.’
गांधी ने कहा, ‘मैं प्रधानमंत्री और हरियाणा के मुख्यमंत्री को साफ़ कहना चाहता हूं कि ये नाटक बंद कीजिए. और जिन अफसरों की वजह से उनकी मौत हुई है, उनके खिलाफ कार्रवाई कीजिए ताकि परिवार पर जो दबाव है, वह खत्म हो सके.’
इससे पहले, मृत अधिकारी की पत्नी अमनीत कुमार ने चंडीगढ़ पुलिस को दी गई शिकायत में कहा था कि उन्होंने अपने पति को वर्षों तक जातीय भेदभाव, अपमान और उत्पीड़न झेलते देखा. उन्होंने यह भी कहा कि ‘उनके पति का दर्द किसी से छिपा नहीं था.. यह उन कई शिकायतों से साफ झलकता है जो उन्होंने जातिगत भेदभाव झेलते हुए दर्ज कराई थीं.’
उन्होंने आरोप लगाया कि ‘मेरे पति ने मुझे बताया था कि हरियाणा के डीजीपी शत्रुजीत सिंह कपूर के निर्देश पर एक साज़िश रची जा रही है, जिसके तहत उन्हें झूठे मामले में फंसाने की योजना बनाई गई थी.’
डीजीपी शत्रुजीत सिंह कपूर को सोमवार (13 अक्टूबर) की रात छुट्टी पर भेज दिया गया है. और मंगलवार (14 अक्टूबर) को 1992 बैच के आईपीएस अधिकारी ओम प्रकाश सिंह को कार्यवाहक डीजीपी का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है.
अगर आप या आपका कोई परिचित आत्महत्या के विचारों से जूझ रहा है, तो कृपया उनकी मदद के लिए संपर्क करें. सुसाइड प्रिवेंशन इंडिया फाउंडेशन आत्महत्या-रोधी हेल्पलाइन नंबरों की सूची उपलब्ध कराता है जहां गोपनीय तौर पर बात चीत की जाती है. टीआईएसएस द्वारा संचालित ‘iCall’ पर देशभर के प्रशिक्षित परामर्शदाताओं की लिस्ट भी मौजूद है. या आप उन्हें नज़दीकी अस्पताल भी ले जा सकते हैं.
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