तमिलनाडु शराब घोटाले की जांच पर सुप्रीम कोर्ट ने ईडी से किए सवाल

तमिलनाडु स्टेट मार्केटिंग कॉरपोरेशन पर कथित शराब घोटाले में ईडी की मनी लॉन्ड्रिंग जांच पर लगी रोक को सुप्रीम कोर्ट ने बढ़ा दिया है. सुनवाई के दौरान सीजेआई ने ईडी के ख़िलाफ़ कड़ी टिप्पणी करने ख़ुद को रोकते हुए कहा, ‘पिछले छह सालों में मैंने ईडी के कई मामले देखे हैं. लेकिन मैं ज़्यादा कुछ नहीं कहना चाहता, वरना यह फिर मीडिया में रिपोर्ट हो जाएगा.’

(इलस्ट्रेशन: कैनवा, तस्वीरें: पीटीआई, फ़ाइल)

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (14 अक्टूबर) को तमिलनाडु स्टेट मार्केटिंग कॉरपोरेशन (टीएएसएमएसी) के ऊपर कथित शराब घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की मनी लॉन्ड्रिंग जांच पर लगी रोक को बढ़ा दिया है.

अदालत का यह फैसला उस मौखिक टिप्पणी के बाद आया, जिसमें उसने सवाल उठाया था कि क्या ईडी की जांच राज्य सरकार के अपराधों की जांच करने के अधिकार में दखल नहीं दे रही है

द हिंदूू की रिपोर्ट के अनुसार, मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) बीआर गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने देश के संघीय ढांचे और ईडी की शक्तियों को लेकर चिंता जताते हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू से सवाल किया, ‘संघीय ढांचे का क्या होगा? क्या यह राज्य के जांच के अधिकार का हनन नहीं है? क्या स्थानीय पुलिस इस मामले की जांच नहीं कर सकती?’ 

सीजेआई गवई और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की दो सदस्यीय पीठ ने मामले की अगली सुनवाई विजय मदनलाल चौधरी केस (2022) पर दायर पुनर्विचार याचिकाओं पर अपना निर्णय सुनाने के बाद तय की है.

गौरतलब है कि साल 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला दिया था कि इंफ़ोर्समेंट केस इनफार्मेशन रिपोर्ट  (ईसीआईआर) को आरोपी के साथ साझा करना अनिवार्य नहीं है. तमिलनाडु की सरकारी शराब रिटेल कंपनी टीएएसएमएसी का कहना है कि उसे ईसीआईआर तक पहुंच नहीं दी गई, जबकि ईडी का तर्क है कि यह एक ‘आंतरिक दस्तावेज़’ है, जिसे साझा करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं बनता.

यह छह महीनों में दूसरी बार है जब सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में ईडी की कार्रवाई पर सवाल उठाया है. इससे पहले, सीजेआई ने टिप्पणी की थी कि ‘ईडी सारी सीमाएं पार कर रही है.’

ईडी ने टीएएसएमएसी में कथित अनियमितताओं, जैसे कमीशनखोरी और खरीद प्रक्रिया में गड़बड़ियों  के आरोपों के आधार पर जांच शुरू की थी. जबकि तमिलनाडु सरकार का कहना है कि ये आरोप राजनीतिक रूप से प्रेरित हैं और केंद्र सरकार अपनी एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है ताकि विपक्षी दलों को निशाना बनाया जा सके. विवाद ईडी की छापेमारी और जब्ती की कार्रवाई को लेकर है जो टीएएसएमएसी के मुख्यालय में की गई थी.

सुनवाई के दौरान टीएएसएमएसी की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने तर्क दिया कि ईडी की कार्रवाई संघीय व्यवस्था पर ‘सीधा प्रहार’ है और एजेंसी ने राज्य सरकार की समानांतर जांच में कोई जानकारी साझा नहीं की. उन्होंने कहा, ‘आप सरकारी दफ्तरों पर कैसे छापा मार सकते हैं? इस देश के संघीय ढांचे का क्या होगा?’ 

वहीं, अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने जवाब में कहा कि ईडी सिर्फ मनी लॉन्ड्रिंग के पहलू की जांच कर रही है और उसे जांच के दौरान कुछ आपत्तिजनक साक्ष्य मिले हैं.

इस पर सीजेआई गवई ने कहा, ‘कानून-व्यवस्था को अपने अधिकारक्षेत्र में ही काम करना चाहिए, वरना संघीय ढांचे का क्या होगा?’

सीजेआई ने ईडी के ख़िलाफ़ कड़ी टिप्पणी करने ख़ुद को रोकते हुए कहा, ‘पिछले छह सालों में मैंने ईडी के कई मामले देखे हैं. लेकिन मैं ज़्यादा कुछ नहीं कहना चाहता, वरना यह फिर मीडिया में रिपोर्ट हो जाएगा.’ 

इस पर राजू ने टिप्पणी की कि ‘मीडिया हमारे पक्ष (ईडी) में आने वाली बातें शायद ही कभी रिपोर्ट करता है, यही मेरी शिकायत है.’