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नए ईपीएफओ नियमों ने बढ़ाई चिंता: रिटायरमेंट के बाद अपने ही पैसों के लिए करना होगा लंबा इंतज़ार

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के नए नियमों के तहत पीएफ की आंशिक निकासी आसान हुई है, लेकिन अंतिम सेटलमेंट की अवधि बढ़ा दी गई है. 25% न्यूनतम शेष राशि के नियम से बेरोजगार कर्मचारियों और मध्यवर्ग में चिंता बढ़ी है, जबकि सरकार इसे सुरक्षा और उच्च ब्याज लाभ देने वाला कदम बता रही है.

द वायर स्टाफ
16/10/2025
भारत
ईपीएफओ का लोगो. (फोटो साभार: www.epfindia.gov.in)
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नई दिल्ली: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) की नई नियमावली की चौतरफ़ा आलोचना का बचाव करने के लिए प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (पीआईबी) सामने आया है. पीआईबी ने दावा किया कि इन नियमों को लेकर ऑनलाइन कई भ्रामक दावे किए जा रहे हैं. हालांकि, उसकी जारी की गई स्पष्टीकरण विज्ञप्ति में वही बातें दोहराई गईं, जिन पर सवाल पहले से उठ रहे थे.

ईपीएफ क्या है?


कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) एक अनिवार्य बचत योजना है, जिसे केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्रालय द्वारा चलाया जाता है और ईपीएफओ (कर्मचारी भविष्य निधि संगठन) इसके संचालन की जिम्मेदारी संभालता है.

इस योजना के तहत हर महीने कर्मचारी और नियोक्ता दोनों कर्मचारी के मूल वेतन का 12-12 प्रतिशत निर्धारित राशि के रूप में भविष्य निधि खाते में जमा करते हैं.

यह फंड वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए एक आर्थिक सुरक्षा कवच का काम करता है, ताकि सेवानिवृत्ति के बाद, नौकरी छूटने पर, या किसी आकस्मिक परिस्थिति जैसे स्वास्थ्य संकट, शादी या अन्य जरूरतों के समय इसका उपयोग किया जा सके.

यह क्यों मायने रखता है?

कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) सीधे तौर पर भारत के मध्यम वर्ग को प्रभावित करती है. यह समाज का वह हिस्सा है जो राजनीतिक रूप से सक्रिय है और सोशल मीडिया पर अपनी राय खुलकर रखता है यानी यह जनमत को दिशा देने की क्षमता रखता है. यही कारण है कि मौजूदा सरकार इस वर्ग को लेकर हमेशा सतर्क रहती है.

पिछले कुछ वर्षों में महंगाई बढ़ने से लोगों की बचत घटी है और बेरोज़गारी दर भी बढ़ी है. ऐसे में कोई भी नीति, जो मध्यम वर्ग की आय या खर्च करने की क्षमता को प्रभावित करती लगे, वह राजनीतिक रूप से संवेदनशील मुद्दा बन सकती है, ख़ासकर तब जब बिहार चुनाव कुछ ही हफ़्तों दूर हैं.

अगर नए ईपीएफओ नियमों को ऐसा समझा गया कि वे लोगों की डिस्पोज़ेबल इनकम (खर्च योग्य आय) को घटा रहे हैं, तो यह सरकार द्वारा पेश किए जा रहे ‘जीएसटी बचत उत्सव’ अभियान की चमक फीकी कर सकता है, जिसे बीजेपी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का तोहफ़ा बताकर प्रचारित कर रही है.

नए नियम क्या हैं?



13 अक्टूबर को कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) की सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज़ (सीबीटी) की बैठक में, जिसकी अध्यक्षता केंद्रीय श्रम एवं रोज़गार मंत्री मनसुख मांडविया ने की, एक बड़ा फैसला लिया गया. इसमें कहा गया कि ईपीएफ योजना के आंशिक निकासी (पार्शियल विदड्रॉअल) से जुड़े 13 जटिल प्रावधानों को मिलाकर अब उन्हें एक सरल और सुव्यवस्थित नियम में बदला जा रहा है, जिसे तीन श्रेणियों में बांटा गया है:

जरूरी ज़रूरतें (बीमारी, शिक्षा, शादी)
आवास संबंधी ज़रूरतें
विशेष परिस्थितियां.

इसके साथ ही, आंशिक निकासी की संख्या और सीमा दोनों बढ़ा दी गई हैं. अब शिक्षा के लिए 10 बार तक और शादी के लिए 5 बार तक निकासी की जा सकेगी, जबकि पहले दोनों मिलाकर केवल 3 बार निकासी की अनुमति थी.

EPF Withdrawal अब और सरल व तेज़!

13 अलग-अलग श्रेणियों और उनसे जुड़ी अनगिनत शर्तों को पूरी तरह सरल बनाकर एक समान प्रावधान तैयार किया गया है, जिससे अब बिना किसी दस्तावेज़ी प्रक्रिया के आसानी से withdrawal किया जा सकेगा.

Withdrawal Limits को सरल बनाया गया है – चाहे वह राशि हो या…

— Dr Mansukh Mandaviya (@mansukhmandviya) October 15, 2025

पहली नज़र में ये बदलाव सकारात्मक या सुविधाजनक लग सकते हैं, और नियमों को आसान बनाने की कोशिश भी कही जा सकती है. लेकिन, नए नियमों की बारीकियों को पढ़ने के बाद लोगों की चिंता बढ़ गई है.

सेवानिवृत्ति के बाद निकासी की अवधि बढ़ाई गई

नए नियमों के तहत, ईपीएफ की समय से पहले अंतिम निपटान (प्रीमेच्योर फाइनल सेटलमेंट) की अवधि दो महीने से बढ़ाकर 12 महीने कर दी गई है, और अंतिम पेंशन निकासी की अवधि भी दो महीने से बढ़ाकर 36 महीने कर दी गई है. इसका मतलब है कि सेवानिवृत्ति के बाद लोगों को अपनी जमा राशि तक पहुंचने में काफी लंबा इंतजार करना पड़ेगा.

विपक्ष के नेताओं ने कहा कि जो लोग महीने की तनख्वाह पर निर्भर हैं, उनके लिए नए नियम यह सुनिश्चित नहीं करेंगे कि पीएफ प्रणाली सेवानिवृत्ति के बाद एक सेफ्टी नेट का काम सके.

25% न्यूनतम शेष राशि

एक और प्रावधान जिसने लोगों को परेशान किया है, वह है व्यक्ति के पीएफ खाते में ‘हमेशा’ 25% न्यूनतम शेष राशि बनाए रखने की आवश्यकता, जो रिटायरमेंट तक लागू रहेगी.

मंत्रालय की सूचना के अनुसार, ‘यह सदस्य को ईपीएफओ द्वारा दी जाने वाली उच्च ब्याज दर (वर्तमान में 8.25% प्रति वर्ष) और कंपाउंडिंग के लाभ के साथ उच्च मूल्य का रिटायरमेंट कोष जमा करने में मदद करेगा.’

*नौकरी छूटने पर EPF निकालने के लिए 2 महीने की जगह 12 महीने क्यो किया गया ?*

– नौकरी छूटने के तुरंत बाद लाभार्थी 75% अमाउंट तुरंत निकाल सकता हैं ।

– ⁠12 महीने तक बेरोजगार रहने पे बाकी 25% राशि भी निकाल सकता हैं ।

– ⁠2 महीने में पूर्ण राशि निकालने से 3 महीने के बाद दूसरी नौकरी…

— EPFO (@officialepfo) October 15, 2025

हालांकि, यह दावा करना कि यह 25% राशि ‘लॉक’ है, भ्रामक है, पीआईबी ने भी स्पष्ट किया कि इसे केवल विशेष परिस्थितियों में ही निकाला जा सकता है. पीआईबी की स्पष्टीकरण में कहा गया: ‘पूरी पीएफ राशि (25% न्यूनतम शेष राशि सहित) केवल कुछ परिस्थितियों में ही निकाली जा सकती है, जैसे कि 55 वर्ष की सेवा पूरी करने के बाद सेवानिवृत्ति, स्थायी अक्षमता, छंटनी, स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति, या भारत छोड़कर स्थायी रूप से जाना आदि. सरल प्रावधानों के तहत, लगातार 12 महीने बेरोजगारी के बाद पूरी पीएफ राशि निकाली जा सकती है.’

इसका मतलब है कि अगर आप अपनी नौकरी छोड़ देते हैं और अपने पीएफ पैसे निकालकर आर्थिक मुश्किलों को संभालना चाहते हैं, तो शुरुआत में आप केवल 75% राशि निकाल पाएंगे. बाकी 25% राशि तब ही उपलब्ध होगी जब आप लगातार 12 महीने बेरोजगार रहें.

इस न्यूनतम शेष राशि को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, क्योंकि ईपीएफओ खाते में पैसा केवल व्यक्ति का निजी धन होता है. इसलिए कुछ लोगों का तर्क है कि कठिनाइयों या नौकरी छूटने की स्थिति में कितनी राशि निकाली जाए, इस पर निर्णय लेने का अधिकार व्यक्ति के पास होना चाहिए.

वहीं, विपक्षी दल इस फैसले की आलोचना कर रहे हैं और सोशल मीडिया पर भी लोग इसे मध्यवर्गीय वेतनभोगी कर्मचारियों पर असर डालने वाला बता रहे हैं. अब देखना यह होगा कि क्या सरकार इन निर्णयों पर पीछे हटती है या नहीं.

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