चीन को गोपनीय जानकारी देने के आरोप में गिरफ़्तारी: कौन हैं एश्ले टेलिस? क्या वे ‘भारत-विरोधी’ हैं?

रणनीतिक विशेषज्ञ एश्ले टेलिस पर चीन को गोपनीय जानकारी देने के आरोप लगे हैं. कभी भारत-अमेरिका साझेदारी के समर्थक रहे टेलिस को सत्तारूढ़ भाजपा के समर्थक ‘भारत-विरोधी’ कह रहे हैं, जबकि कुछ विशेषज्ञ इस गिरफ़्तारी को वॉशिंगटन और नई दिल्ली के बीच बढ़ते तनावों की पृष्ठभूमि में देख रहे हैं. इस पूरे घटनाक्रम को जानने के लिए पढ़ें यह लेख.

एश्ले टेलिस (फोटो साभार: Carnegie Endowment/Pixabay)

नई दिल्ली: अमेरिका में दक्षिण एशियाई मामलों और विदेश नीति विशेषज्ञ, भारतीय मूल के एश्ले टेलिस को 11 अक्टूबर को जांच एजेंसी फ़ेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टीगेशन (एफबीआई) ने गिरफ्तार कर लिया. उनके घर से कथित तौर पर हजार से अधिक पन्नों के दस्तावेज बरामद हुए थे. उनके केस की सुनवाई मंगलवार (21 अक्टूबर) को हुई, जब उन्हें जमानत तो मिल गयी, लेकिन  हाउस अरेस्ट में रखे जाने का आदेश दिया गया. 

टेलिस ने 14 अक्टूबर को अदालत में अपनी पहली पेशी दी थी, उसी दिन अमेरिकी न्याय विभाग ने बताया कि उन पर राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी जानकारी को अवैध रूप से रखने का आरोप लगाया गया है. उनके खिलाफ यह आरोप भी है कि उन्होंने सैन्य उपकरणों से जुड़ी संवेदनशील जानकारी हासिल की और चीन के अधिकारियों के साथ गुप्त मुलाक़ात की. कम से कम पिछले तीन सालों से चीनी अधिकारियों के साथ उनकी बैठकों की निगरानी हो रही थी. उनकी गिरफ़्तारी के बाद भारतीय दक्षिणपंथियों ने उन्हें ‘भारत-विरोधी’ घोषित कर उनके खिलाफ़ अभियान छेड़ दिया है.

उनके वकीलों डेबोरा कर्टिस और जॉन नासिकास ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि वे इन आरोपों को चुनौती देंगे. उन्होंने कहा, ‘एश्ले जे. टेलिस एक सम्मानित विद्वान और वरिष्ठ नीति सलाहकार हैं. हम उन पर लगाए गए आरोपों, विशेष रूप से किसी विरोधी देश की ओर से काम करने के संदिग्ध आरोपों को चुनौती देंगे.’ 

मालूम हो कि 64 वर्षीय टेलिस का जन्म मुंबई में हुआ था. उन्होंने अध्ययन के लिए अमेरिका का रुख किया था. वे लंबे समय तक अमेरिकी सरकार के साथ काम कर चुके हैं और वर्तमान में विदेश विभाग में वरिष्ठ सलाहकार थे.

उन पर लगे आरोप

अमेरिकी अटॉर्नी कार्यालय के बयान के अनुसार, टेलिस को ‘राष्ट्रीय रक्षा जानकारी को अवैध रूप से रखने’ के आरोप में गिरफ्तार किया गया है. यह कार्रवाई राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े दस्तावेजों, कोड या जानकारी को जुटाने, भेजने या खोने से संबंधित है. यदि  टेलिस इस मामले में दोषी पाए जाते हैं तो उन्हें 10 साल तक की जेल या जुर्माना हो सकता है.

एफबीआई के विशेष एजेंट जेफरी स्कॉट ने 13 अक्टूबर को 10 पेज का एफिडेविट दाखिल किया, जिसमें कहा गया कि टेलिस को 11 अक्टूबर को वर्जीनिया के वियना शहर में उनके निवास स्थान पर विशेष वॉरंट के तहत हिरासत में लिया गया.

अदालत के दस्तावेजों के अनुसार, अपने प्रभाव की वजह से वह प्रमुख दस्तावेजों और संवेदनशील जानकारी तक पहुंच बना पाए. एफबीआई के मुताबिक, पिछले दो महीनों में टेलिस कई बार स्टेट और डिफेंस बिल्डिंग में प्रवेश करते देखे गए, जहां उन्होंने अमेरिकी सैन्य विमानों की क्षमताओं सहित संवेदनशील दस्तावेज प्रिंट किए. वीडियो में उन्हें दस्तावेजों से भरे बैग या ब्रीफकेस के साथ बिल्डिंग से बाहर आते देखा गया.

एफबीआई ने दावा किया कि टेलिस ने हाल के वर्षों में कई बार चीनी अधिकारियों से मुलाकात की. एफिडेविट में सितंबर 2022 की एक बैठक का जिक्र है, जिसमें टेलिस वर्जीनिया के फेयरफैक्स में एक रेस्तरां में एक लिफाफे के साथ पहुंचे थे लेकिन बाहर आते समय वह उनके पास नहीं था.

10 अक्टूबर को उनके वियना स्थित घर की तलाशी के दौरान 1,000 से अधिक पन्नों के गुप्त दस्तावेज बरामद हुए, जिन्हें ‘टॉप सीक्रेट’ और ‘सीक्रेट’ मार्क किए गए थे.

पृष्ठभूमि और करिअर

टेलिस अमेरिकी सरकार में कई महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं. वे विदेश नीति समुदाय में जाने-माने विद्वान और वक्ता हैं. वे पिछले दो दशकों में दिल्ली और वॉशिंगटन में भारत-अमेरिका संबंधों को देखने वाले अधिकांश अधिकारियों के साथ करीबी से काम कर चुके हैं.

वर्ष 2000 से 2003 के बीच वे भारत में तत्कालीन अमेरिकी राजदूत रॉबर्ट ब्लैकविल के विशेष सहायक थे. वे अमेरिकी दूतावास में विशेष सहायक और पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज बुश की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद में कई वरिष्ठ पदों पर तैनात रहे हैं. वर्तमान में वे रक्षा विभाग के ‘ऑफिस ऑफ नेट असेसमेंट’ के साथ जुड़े हुए हैं, डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने इस विभाग का नाम बदलकर डिपार्टमेंट ऑफ वॉर रखा है. 

मुंबई के सेंट जेवियर कॉलेज से स्नातक और शिकागो विश्वविद्यालय से डॉक्टरेट करने के बाद उन्हें अमेरिकी राजदूत रॉबर्ट ब्लैकविल ने विशेष सहायक के रूप में चुना. उनके योगदान में 2006 में तत्कालीन राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू. बुश के दिल्ली दौरे के दौरान परमाणु समझौते को अंतिम रूप देना शामिल है.

हाल के वर्षों में टेलिस ने कई लेख लिखे हैं, जिनमें उन्होंने भारत से अमेरिका से अधिक रक्षा उपकरण खरीदने की वकालत की थी, साथ ही उन्होंने भारत में ‘लोकतांत्रिक गिरावट’ की आलोचना की थी और अपने हालिया लेख में भारत की ‘महाशक्ति बनने की आकांक्षा’ पर सवाल उठाया था.

चीन के साथ एश्ले टेलिस के संबंधों पर उठ रहे सवाल

अमेरिकी जांच एजेंसियों के अनुसार, एश्ले टेलिस पर अपने निजी कब्जे में लगभग 1,000 पन्नों के ‘टॉप सीक्रेट’ और ‘सीक्रेट’ दस्तावेज रखने का आरोप है. ये दस्तावेज उनके घर में अलग-अलग जगहों पर, जैसे फाइल कैबिनेट और कचरे के थैलों में पाए गए. 

एफबीआई के हलफ़नामे में 2022 से 2025 के बीच टेलिस और चीनी अधिकारियों के बीच हुई कई मुलाक़ातों का ज़िक्र है. एक मौके पर चीनी अधिकारियों से मुलाक़ात के बाद उनके हाथ में ‘गिफ्ट बैग’ होने का भी उल्लेख है.

कहा गया है कि टेलिस ने 2022 से अब तक चीन के सरकारी अधिकारियों से कई बार मुलाक़ात की है. हालांकि उन पर फिलहाल चीन के लिए जासूसी का औपचारिक आरोप नहीं लगाया गया है.

चीन में गिरफ्तारी पर प्रतिक्रियाएं

द डिप्लोमैट की रिपोर्ट के अनुसार, बीजिंग स्थित प्रतिष्ठित त्सिंघुआ विश्वविद्यालय के युवा शोधकर्ता माओ केजी ने अपने लेख में टेलिस की गिरफ्तारी पर कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि अमेरिका-भारत संबंधों को मज़बूत करने वाले प्रमुख व्यक्ति पर ही चीन से मिलीभगत के आरोप लग रहे हैं.

माओ केजी ने लिखा, ‘कई वर्षों से भारतीय-अमेरिकी रणनीतिक विद्वान के रूप में टेलिस न केवल अमेरिका की प्रमुख भू-राजनीतिक नीतियों को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे थे, बल्कि अमेरिका-भारत संबंधों को ‘ठंडे से गर्म’ दौर में लाने वाले प्रमुख व्यक्तियों में से एक रहे हैं.’ 

एक चीनी विश्लेषक ने इस पूरे मामले को ‘सावधानी से रची गई राजनीतिक रणनीति’ बताया. उन्होंने व्यंग्यपूर्वक कहा कि यह गहरी विडंबना है कि एश्ले टेलिस, जिन्होंने चीन के प्रभाव को कमजोर करने के लिए वर्षों तक भारत-अमेरिका गठजोड़ को मज़बूत करने की वकालत की, अब स्वयं ‘कम्युनिस्ट जासूस’ कहलाए जा रहे हैं.

चीनी विश्लेषकों का कहना है कि यह गिरफ्तारी केवल इसलिए महत्वपूर्ण नहीं है कि टेलिस कौन हैं और उनके ऊपर क्या आरोप लगे हैं, बल्कि इसलिए भी है कि यह भारत-अमेरिका संबंधों के बारे में क्या संकेत देती है. ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के दौरान भारत-अमेरिका संबंधों में ठंडापन देखने को मिल रहा है, जो टेलिस के लंबे समय से किए जा रहे प्रयासों के बिल्कुल विपरीत है.

अमेरिका-भारत-चीन संबंधों पर टेलिस 

टेलिस लंबे समय से अमेरिका-भारत संबंधों को मज़बूत करने के समर्थक रहे हैं और भारत को वॉशिंगटन का प्रमुख साझेदार मानते हैं. हालांकि, कार्नेगी एंडाउमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस के लिए अपने नवीनतम प्रकाशन में, जो पिछले सप्ताह प्रकाशित हुआ, उन्होंने भारत की क्षमताओं के बारे लिखा कि ‘अमेरिका लंबे समय से नई दिल्ली को बीजिंग के उदय के खिलाफ एक रणनीतिक संतुलन के रूप में देखता रहा है, लेकिन वास्तविकता में भारत आर्थिक रूप से चीन जितनी तेजी से आगे नहीं बढ़ सका है.’

टेलिस ने अपने पेपर Multipolar Dreams, Bipolar Realities: India’s Great Power Future में लिखा, ‘हालांकि पिछले दो दशकों में भारत ने अपनी ताकत बढ़ाई है और अमेरिका के साथ मिलकर चीनी आक्रामकता के खिलाफ काम किया है. इन सभी उपलब्धियों के बावजूद, भारत इतनी तेज़ी से नहीं बढ़ रहा कि वह चीन को प्रभावी ढंग से संतुलित कर सके.’

इसके बावजूद, टेलिस का मानना है कि भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखने के लिए अत्यधिक सावधान रहा है और अमेरिकी गुट से पूरी तरह जुड़ने के बजाय अपने विदेश संबंधों को संतुलित करता रहा.

टेलिस के अनुसार, यह भारत की एक बड़ी गलती है. उन्होंने लिखा कि भारत चीन की तुलना में अपनी अपेक्षाकृत कमजोरी के कारण लंबी अवधि में बीजिंग का मुकाबला करने के लिए किसी बाहरी साझेदार पर निर्भर रहेगा, और इसके लिए भारत के पास सबसे बढ़िया विकल्प संयुक्त राज्य अमेरिका है.

भारतीय दक्षिणपंथियों के निशाने पर  

कुछ विश्लेषकों का कहना है कि टेलिस ने कांग्रेस नेतृत्व वाली यूपीए और भाजपा नेतृत्व वाली एनडीए दोनों सरकारों के साथ काम किया है, वहीं भाजपा समर्थकों ने आरोप लगाया कि वह ‘भारत-विरोधी’ ताकतों का हिस्सा हैं और ‘विपक्ष के चहेते’ हैं. 

टेलिस अक्सर टेलीविजन पैनल और पॉडकास्ट में दिखाई देते रहे हैं, जहां कई बार वह यह तर्क देते हैं कि ‘भारत ने अपनी प्रमुख जगह खो दी है.’ इसके कारण दक्षिणपंथी उनकी आलोचना करते हैं और उन्हें ‘लेफ्ट-लिबरलों’ का चहेता बताते रहे हैं. 

उनकी गिरफ्तारी और चीन के साथ उनके कथित संबंधों को लेकर भाजपा आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने एक्स पर लिखा, ‘यही कारण है कि एश्ले टेलिस, जिन्हें अक्सर भारत के विपक्ष द्वारा सराहा जाता रहा है, हमारे (भारत) खिलाफ इतनी बार और कठोर तरीके से बोलते रहे. भारत-विरोधी ताकतें अब ऐसे तरीके से सामने आ रही हैं, जिसकी कल्पना किसी ने भी नहीं की थी.’

एक अन्य प्रभावशाली दक्षिणपंथी एक्स हैंडल ने लिखा, ‘एक भारतीय मूल का अमेरिकी निवासी, जो हमेशा भारत का आलोचक रहा है और लंबे समय से कांग्रेस का पसंदीदा रहा है. विपक्ष मोदी सरकार पर निशाना साधने के लिए टेलिस का हवाला देता रहा है. भगवान का शुक्र है कि इसे अमेरिका ने फ्रेम किया है, भारत ने नहीं.. वरना विपक्ष इस पर रोज़ाना शोर मचाता कि ‘मोदी ने उन्हें मोदी सरकार के खिलाफ बोलने के लिए फंसाया है.’ 

‘अगर ठीक से जांच की जाए, तो ऐसे कई लोग मिल सकते हैं जो सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से चीन के हितों के लिए काम कर रहे हों.. ऐसे गद्दार जो न तो अपने जन्म देश के प्रति वफादार है, और न ही उस देश के प्रति जहां वह रहे और बस गए.’